शिवसागर तालाब जीर्णोद्धार की उम्मीद एक बार फिर बढ़ी है। रोहतास जिले के शिवसागर में करीब 20 एकड़ क्षेत्र में फैला ऐतिहासिक तालाब दशकों से अतिक्रमण, जलकुंभी और गंदगी की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार उठाई जा रही मांग के बाद जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा के निर्देश पर बुधवार को सदर एसडीएम प्रिया रानी ने तालाब का निरीक्षण किया। इस दौरान शिवसागर के अंचलाधिकारी दिलीप कुमार और कार्यक्रम पदाधिकारी संजय कुमार भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के बाद अंचलाधिकारी से तालाब के अतिक्रमित क्षेत्रफल और उसकी भौगोलिक स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है। प्रशासनिक स्तर पर यह ब्योरा जुटाए जाने को तालाब के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। हालांकि, अभी जीर्णोद्धार कार्य की स्वीकृति, बजट या निर्माण शुरू होने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
दैनिक जागरण की खबर और स्थानीय पहल के बाद प्रशासन सक्रिय
तालाब की बदहाली को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चिंता जताई जा रही थी। बताया गया है कि दैनिक जागरण में आठ और 11 अक्टूबर को ‘जब सिस्टम ने खड़े किए हाथ, तब युवक बने तालाब का तारणहार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। खबर की कटिंग जिलाधिकारी को उनके वाट्सएप नंबर पर भेजी गई। इसके अलावा युवा जनशक्ति समिति के सदस्यों ने अखबार की कटिंग के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात कर तालाब की स्थिति बताई और जीर्णोद्धार की मांग की।
पांच दिन पहले छठ पूजा समिति की ओर से भी जिलाधिकारी को आवेदन दिया गया था। आवेदन में ऐतिहासिक तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसका जीर्णोद्धार कराने की मांग की गई थी। स्थानीय लोगों, समिति के सदस्यों और छठ पूजा समिति की ओर से लगातार उठाए गए मुद्दे के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद एसडीएम ने स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

जलकुंभी और गंदे पानी से तालाब की हालत खराब
युवा जनशक्ति समिति के अध्यक्ष मोनू गुप्ता के अनुसार, शिवसागर का ऐतिहासिक तालाब वर्षों से अतिक्रमण और जलकुंभी की समस्या से प्रभावित है। तालाब में नाले का पानी, शौचालय का गंदा पानी और कूड़ा-कचरा गिराए जाने से इसकी स्थिति लगातार खराब हुई है। जलकुंभी और बरसाती घास के कारण तालाब का बड़ा हिस्सा ढक गया है। इससे जलाशय की उपयोगिता और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
तालाब की खराब स्थिति का असर छठ पूजा के दौरान भी दिखाई देता है। व्रतियों को पूजा और अर्घ्य के लिए साफ जल तथा व्यवस्थित घाट की जरूरत होती है, लेकिन जलकुंभी और गंदगी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। समिति के सदस्य पिछले करीब सात वर्षों से श्रमदान कर तालाब की सफाई करते आ रहे हैं। हर साल छठ पूजा समिति की ओर से भी पर्व के अवसर पर सफाई कराई जाती है, लेकिन तालाब का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण सीमित संसाधनों से पूरी सफाई संभव नहीं हो पाती।
डेढ़ वर्ष पहले भी तैयार हुआ था जीर्णोद्धार का प्रस्ताव
स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन उप विकास आयुक्त विजय कुमार पांडेय ने लघु सिंचाई विभाग को तालाब के जीर्णोद्धार के लिए प्राक्कलन तैयार कर विभाग को भेजने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्राक्कलन तैयार कर पटना स्थित विभाग को भेजा गया, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो सका। इस वजह से तालाब की समस्या बनी रही और स्थानीय स्तर पर सफाई का प्रयास ही मुख्य सहारा रहा।
अब जिलाधिकारी के संज्ञान लेने और एसडीएम के निरीक्षण के बाद लोगों को उम्मीद है कि इस बार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अंचलाधिकारी से मांगी गई रिपोर्ट में अतिक्रमण की स्थिति और तालाब की भौगोलिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इन तथ्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जा सकती है।

स्थायी समाधान की उम्मीद, लेकिन काम शुरू होने का इंतजार
शिवसागर तालाब केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। छठ पूजा के समय इसकी उपयोगिता विशेष रूप से बढ़ जाती है। ऐसे में तालाब की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान स्थानीय लोगों की प्रमुख मांग है।
फिलहाल प्रशासन ने निरीक्षण कर स्थिति का ब्योरा मांगा है। यह कदम आगे की योजना बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जीर्णोद्धार तभी जमीन पर दिखेगा जब अतिक्रमण की पहचान, तकनीकी प्रस्ताव, वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति तथा कार्यान्वयन की प्रक्रिया पूरी होगी। स्थानीय लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद संबंधित विभाग कितनी तेजी से अगली कार्रवाई करता है।
