एनआईए जाली करेंसी छापेमारी: जाली भारतीय करेंसी नोटों की तस्करी से जुड़े मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बुधवार को बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में एक साथ आठ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 2,48,500 रुपये मूल्य के कथित जाली भारतीय नोटों की बरामदगी से जुड़े मदनपुर मामले में की गई। तलाशी के दौरान जांच टीमों ने डिजिटल डिवाइस, महत्वपूर्ण दस्तावेज, बांग्लादेशी करेंसी और अन्य सामग्री जब्त की है। एजेंसी अब इन सामग्रियों की जांच कर मामले से जुड़े संभावित संपर्कों और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
तीन राज्यों में आठ स्थानों पर एक साथ तलाशी
एजेंसी की कार्रवाई बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में की गई। बिहार के औरंगाबाद जिले में दो और गया जिले में तीन स्थानों पर तलाशी ली गई। झारखंड के हजारीबाग जिले में दो ठिकानों पर टीम पहुंची, जबकि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक स्थान पर छापेमारी की गई। इस तरह कुल आठ जगहों पर एक साथ कार्रवाई की गई।
तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों के साथ बांग्लादेशी करेंसी भी जब्त की। अधिकारियों की ओर से जब्त सामग्री के बारे में विस्तृत सूची या उसके संभावित इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। फिलहाल इन वस्तुओं को जांच का हिस्सा बनाया गया है। डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों की पड़ताल से यह समझने में मदद मिल सकती है कि आरोपितों के बीच किस तरह संपर्क था और कथित तस्करी गतिविधियों का दायरा कितना बड़ा है।
मदनपुर में 2.48 लाख रुपये के जाली नोट मिलने से शुरू हुआ मामला
यह मामला बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां 2,48,500 रुपये अंकित मूल्य के जाली भारतीय करेंसी नोट बरामद किए जाने के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 15 अगस्त को दर्ज इस मामले में चार लोगों को आरोपित बनाया गया था। प्राथमिकी में सुरेंद्र कुमार, विजय यादव, रंजन और प्रदीप साव उर्फ प्रदीप कुमार साव के नाम शामिल हैं।

जाली नोटों की बरामदगी के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आगे बढ़ी। गृह मंत्रालय के आदेश के बाद NIA ने 18 अक्टूबर को इस केस को दोबारा दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली। इसके बाद एजेंसी ने मामले से जुड़े तथ्यों, आरोपितों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।
जांच में तस्करी से जुड़े होने की बात सामने आने का दावा
NIA के अनुसार, अब तक की जांच में यह सामने आया है कि आरोपित कथित तौर पर जाली भारतीय नोटों की तस्करी में शामिल थे। एजेंसी की हालिया कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाना और इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोगों या संपर्कों का पता लगाना है। हालांकि, जांच अभी जारी है और छापेमारी में जब्त सामग्री की विस्तृत जांच के बाद ही इसके आधार पर आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।
जाली करेंसी से जुड़े मामलों में केवल नोटों की बरामदगी ही नहीं, बल्कि उनके स्रोत, आपूर्ति के रास्ते, लेन-देन और नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। इसी क्रम में तीन राज्यों में तलाशी की गई है। जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों से एजेंसी को आरोपितों के संभावित संपर्कों और गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
मधुबनी के एक अन्य मामले में दो आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट
इसी बीच, NIA ने बिहार के मधुबनी जिले में जाली भारतीय करेंसी नोटों की बरामदगी से जुड़े एक अलग मामले में दो आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी ने 30 अक्टूबर को भरत महासेठ और शिव कुमार राउत उर्फ मेहमान के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला मधुबनी के बसोपट्टी इलाके में दुहाबी बाजार से 2 अगस्त को 281 कथित नकली नोट जब्त किए जाने से जुड़ा है। इन नोटों का कुल अंकित मूल्य 50,150 रुपये बताया गया है।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 61(2), 179, 180 और 3(5) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया है। मधुबनी की यह कार्रवाई मदनपुर मामले से अलग है, लेकिन दोनों घटनाएं बिहार में जाली भारतीय करेंसी से जुड़े मामलों की जांच के संदर्भ में सामने आई हैं।
जब्त सामग्री की जांच के बाद आगे की कार्रवाई
मदनपुर मामले में तीन राज्यों में हुई छापेमारी के बाद अब NIA का ध्यान जब्त डिजिटल डिवाइस, दस्तावेजों और अन्य सामग्री के विश्लेषण पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद जाली नोटों के मामले में आरोपितों के अलावा और कौन लोग जुड़े हो सकते हैं तथा कथित तस्करी नेटवर्क का विस्तार किन क्षेत्रों तक है।
फिलहाल जांच एजेंसी ने आठ ठिकानों पर तलाशी के दौरान सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी दी है। इस कार्रवाई के बाद किसी नई गिरफ्तारी या नेटवर्क के पूरी तरह खुलासे की पुष्टि उपलब्ध सूचना में नहीं की गई है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
