मदनपुर जाली नोट तस्करी मामला अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच के दायरे में है। बुधवार को एनआईए की टीम औरंगाबाद जिले के मदनपुर पहुंची और मामले से जुड़े दो आरोपियों के आवासों की तलाशी ली। न्यायालय से जारी सर्च वारंट के आधार पर अधिकारियों ने आजन थाना क्षेत्र के बाबू बांध स्थित जेल में बंद सुरेंद्र कुमार और मिठाईया गांव में विजय यादव के घर की तलाशी की। इस दौरान टीम ने विभिन्न बिंदुओं पर जांच की और बैंक खातों से संबंधित जानकारियां तथा दस्तावेज जुटाए।
यह कार्रवाई 15 अगस्त 2026 को मदनपुर में जिला पुलिस की ओर से की गई छापेमारी के बाद दर्ज मामले की आगे की जांच का हिस्सा है। उस समय पुलिस ने कथित जाली नोट तस्करी के मामले में दो लाख 48 हजार रुपये के साथ सुरेंद्र कुमार और विजय यादव को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। अब मामले के नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल केंद्रीय एजेंसी कर रही है।
दो लाख 48 हजार रुपये के साथ हुई थी गिरफ्तारी
एसडीपीओ आदित्य कुमार के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को जिला पुलिस की टीम ने मदनपुर में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान जाली नोट तस्करी के मामले में सुरेंद्र कुमार और विजय यादव को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दोनों के पास से दो लाख 48 हजार रुपये बरामद किए थे। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस मामले में मदनपुर थाना में कांड संख्या 317/2026 दर्ज किया गया था। प्रारंभिक कार्रवाई जिला पुलिस ने की थी। बाद में जाली नोटों की तस्करी के पीछे सक्रिय नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के उद्देश्य से एनआईए ने इस कांड को अपने अधीन ले लिया। इसके बाद एजेंसी ने अपने स्तर से जांच शुरू की।

सर्च वारंट के आधार पर दोनों ठिकानों पर तलाशी
बुधवार को एनआईए की टीम ने न्यायालय से निर्गत सर्च वारंट के आधार पर तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों ने बाबू बांध में सुरेंद्र कुमार के घर और मिठाईया में विजय यादव के आवास की तलाशी ली। दोनों आरोपी पहले से जेल में बंद हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न दस्तावेजों और सूचनाओं की जांच की। खास तौर पर बैंक से संबंधित डिटेल्स जुटाने की बात सामने आई है।
बैंक खातों से जुड़ी जानकारी की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि जांच एजेंसी को कथित तस्करी के आर्थिक पक्ष की पड़ताल करनी है। हालांकि, तलाशी के दौरान किन-किन दस्तावेजों की बरामदगी हुई, कितने बैंक खाते जांच के दायरे में आए या कोई नई गिरफ्तारी हुई—इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल तलाशी और बैंक विवरण जुटाए जाने की पुष्टि तक ही तथ्य सीमित हैं।
जाली नोटों के स्रोत और नेटवर्क की पड़ताल
एनआईए की जांच का उद्देश्य कथित जाली नोटों के स्रोत, उनकी आपूर्ति और वितरण के नेटवर्क का पता लगाना है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस गतिविधि में किन लोगों की भूमिका रही और आर्थिक लेन-देन किस तरह किया गया। इस तरह की जांच में बरामद नकदी, बैंक खातों, दस्तावेजों और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को मिलाकर देखा जाता है। मदनपुर मामले में भी बैंक से जुड़े दस्तावेज जुटाने की कार्रवाई को इसी व्यापक जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
जिला पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और नकदी की बरामदगी हुई थी। अब एनआईए की जांच का दायरा उन तथ्यों से आगे बढ़कर कथित नेटवर्क और वित्तीय गतिविधियों तक पहुंच रहा है। एजेंसी की ओर से जांच के अंतिम निष्कर्ष या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

जांच जारी, आगे की कार्रवाई साक्ष्यों पर निर्भर
मदनपुर थाना कांड संख्या 317/2026 में एनआईए की कार्रवाई से संकेत मिलता है कि एजेंसी मामले के आर्थिक और नेटवर्क संबंधी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। तलाशी में जुटाए गए बैंक दस्तावेजों और अन्य सूचनाओं का विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित तस्करी का दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
फिलहाल सुरेंद्र कुमार और विजय यादव न्यायिक हिरासत में हैं। दोनों के घरों की तलाशी न्यायालय से प्राप्त वारंट के आधार पर की गई। जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण पर निर्भर करेगी। जाली नोटों की तस्करी जैसे मामलों में केवल बरामद रकम ही नहीं, बल्कि उसके स्रोत, लेन-देन और आपूर्ति श्रृंखला की पहचान भी जांच का अहम हिस्सा होती है।
