नवादा साइबर अपराध सजा के एक मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय उमेश कुमार की अदालत ने युवक शिवकरण कुमार को पांच वर्ष के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। फाइनेंस कंपनी के नाम पर ठगी कर साइबर अपराध करने के आरोप में दोषी ठहराए गए शिवकरण कुमार नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सिमरीडीह गांव के निवासी हैं। बुधवार को सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें मंडल कारा भेज दिया गया। मामला साइबर थाना कांड संख्या 70/25 से जुड़ा है।
अदालत ने पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद फैसला सुनाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 और 111(1) के तहत पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा दी गई। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी दंड सुनाया गया। विभिन्न धाराओं के तहत कुल 11 लाख 43 हजार रुपये अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
गुप्त सूचना पर सिमरीडीह में हुई थी छापेमारी
मामले के अनुसार, साइबर थाना को गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर साइबर थाना की पुलिस अवर निरीक्षक नेहा कुमारी ने पुलिस बल के साथ वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सिमरीडीह गांव में छापेमारी की। पुलिस टीम अनिल सिंह के मकान में पहुंची, जहां एक कमरे में शिवकरण कुमार मौजूद थे। छापेमारी के दौरान उन्हें साइबर अपराध से जुड़ी सामग्री और नकद राशि के साथ गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने साइबर थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच और अनुसंधान के बाद संबंधित साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और गवाहों के बयान पर विचार किया गया। इसके बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

अदालत ने पांच वर्ष के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय उमेश कुमार ने बुधवार को फैसला सुनाया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 338 और 111(1) के तहत पांच-पांच वर्ष के कारावास का दंड दिया गया। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत भी सजा सुनाई गई। सभी संबंधित धाराओं के तहत अर्थदंड की कुल राशि 11 लाख 43 हजार रुपये बताई गई है।
सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को मंडल कारा भेज दिया गया। अदालत का फैसला पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहम्मद मिसवाह रसूल ने अदालत में पक्ष रखा।
फाइनेंस कंपनी के नाम पर ठगी से जुड़ा था मामला
इस मामले में शिकायत और पुलिस कार्रवाई का संबंध फाइनेंस कंपनी के नाम पर की गई कथित साइबर ठगी से था। साइबर थाना कांड संख्या 70/25 के तहत दर्ज मामले में पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपी को साइबर अपराध से जुड़ी सामग्री और नकद राशि के साथ पकड़ा था। हालांकि, उपलब्ध विवरण में ठगी की कुल रकम, पीड़ितों की संख्या, इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यम या कथित फाइनेंस कंपनी का नाम नहीं बताया गया है। इसलिए इन पहलुओं को लेकर कोई अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता।
फिर भी अदालत का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस जांच, डिजिटल या अन्य साक्ष्यों का संकलन और अदालत में उनकी प्रस्तुति महत्वपूर्ण होती है। इस प्रकरण में पुलिस की ओर से पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर दोषसिद्धि हुई।

साइबर अपराध के मामलों में कानूनी कार्रवाई का संदेश
फाइनेंस कंपनी के नाम पर ठगी जैसे मामलों में लोगों को अक्सर वित्तीय सेवा, ऋण या भुगतान से जुड़ी जानकारी देकर भरोसे में लेने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इस मामले में ठगी की विशिष्ट कार्यप्रणाली का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए आम तौर पर सामने आने वाले तरीकों को इस घटना से जोड़ना उचित नहीं होगा। यहां आधिकारिक रूप से उपलब्ध तथ्य यही हैं कि मामला साइबर थाना में दर्ज हुआ, पुलिस ने गुप्त सूचना पर छापेमारी कर शिवकरण कुमार को गिरफ्तार किया और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई।
अदालत के फैसले के बाद अभियुक्त को जेल भेज दिया गया है। कुल 11 लाख 43 हजार रुपये के अर्थदंड के साथ पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी अपर लोक अभियोजक मोहम्मद मिसवाह रसूल ने की।
