बिहार टेंडर घोटाले में निलंबित 2017 बैच के अधिकारी से विदेश यात्रा और रिशुश्री की कंपनी को सरकारी ठेके मिलने के कथित संबंधों पर सवाल; परिवार के आठ सदस्यों के साथ जून 2024 में गए थे ऑस्ट्रिया
बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब IAS अधिकारी योगेश कुमार सागर से पूछताछ शुरू कर दी है। बुधवार, 4 नवंबर को वह पटना स्थित ED के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। जांच एजेंसी उनसे जून 2024 में परिवार के आठ सदस्यों के साथ की गई ऑस्ट्रिया यात्रा और उस पर हुए 21.92 लाख रुपये के खर्च को लेकर सवाल कर रही है। आरोप है कि इस यात्रा का खर्च ठेकेदार रिशुश्री से जुड़ी कंपनी ने उठाया था।
ED की जांच का मुख्य सवाल यह है कि आखिर एक निजी कंपनी ने सरकारी अधिकारी और उनके परिवार की विदेश यात्रा का खर्च क्यों उठाया? क्या इसके बदले कंपनी को सरकारी टेंडर हासिल करने में कोई फायदा मिला? एजेंसी विदेश यात्रा के खर्च और सरकारी ठेकों से जुड़े फैसलों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल ये आरोप जांच के दायरे में हैं और इन पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
9 लोगों की ऑस्ट्रिया यात्रा पर खर्च हुए 21.92 लाख रुपये
जांच एजेंसी के मुताबिक, योगेश कुमार सागर जून 2024 में अपने परिवार के आठ सदस्यों के साथ ऑस्ट्रिया गए थे। यानी इस यात्रा में अधिकारी समेत कुल नौ लोग शामिल थे। 22 से 30 जून 2024 के बीच हुए इस दौरे में परिवार ने ऑस्ट्रिया के वियना, साल्जबर्ग और वोल्फगैंग की यात्रा की थी।
ED के अनुसंधान के अनुसार, यात्रा के दौरान हवाई टिकट और होटलों में ठहरने पर कुल 21.92 लाख रुपये खर्च हुए। आरोप है कि यह रकम रिशुश्री से जुड़ी कंपनी ने चुकाई थी। जांच एजेंसी अब इस भुगतान के स्रोत, कंपनी और अधिकारी के बीच संबंधों तथा यात्रा के पीछे की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है।

टेंडर दिलाने में कंपनी को फायदा पहुंचाने का भी आरोप
मामले का दूसरा अहम पहलू सरकारी टेंडरों से जुड़ा है। ED यह पता लगाना चाहती है कि योगेश कुमार सागर की रिशुश्री की कंपनी से क्या नजदीकी थी और क्या उन्होंने कंपनी को सरकारी ठेके दिलाने में किसी तरह की भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि विदेश यात्रा के खर्च और टेंडर से जुड़े फैसलों के बीच कोई लेन-देन या अनुचित लाभ का संबंध तो नहीं था।
जांच के केंद्र में ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशुश्री और उससे जुड़ी कंपनी रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है। आरोप है कि कंपनी ने सरकारी विभागों में संपर्कों का इस्तेमाल कर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और अपने या अपने पसंदीदा ठेकेदारों के पक्ष में ठेके हासिल करने की कोशिश की। एजेंसियां कथित तौर पर टेंडर से जुड़ी गोपनीय जानकारी, अधिकारियों से संपर्क और संभावित आर्थिक लाभ के पहलुओं की जांच कर रही हैं।
मई में निलंबित हो चुके हैं योगेश कुमार सागर
योगेश कुमार सागर 2017 बैच के IAS अधिकारी हैं। बिहार सरकार ने 30 मई 2026 को उन्हें और 2014 बैच की IAS अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा को निलंबित कर दिया था। दोनों अधिकारियों पर ठेकेदार रिशुश्री से कथित तौर पर अनुचित लाभ लेने के आरोप लगे थे। इससे पहले बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने 27 मई को रिशुश्री को कथित टेंडर हेराफेरी और धनशोधन के मामले में गिरफ्तार किया था।
इस मामले में SVU ने IAS अधिकारियों के ठिकानों पर तलाशी भी ली थी। ED और SVU अलग-अलग स्तर पर मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों के साथ ठेकेदार के कथित संबंधों की जांच कर रहे हैं।

जांच के दायरे में दूसरे अधिकारी भी
रिशुश्री से जुड़े टेंडर घोटाले की जांच केवल योगेश कुमार सागर तक सीमित नहीं है। ED ने इससे पहले भी कई IAS अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार, संतोष कुमार मल्ल, सुनील कुमार यादव और अभिलाषा कुमारी शर्मा समेत अन्य अधिकारियों से भी इस मामले में पूछताछ या जानकारी जुटाने की कार्रवाई हुई है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित संपर्कों का टेंडर आवंटन तथा सरकारी फैसलों पर क्या असर पड़ा।
फिलहाल योगेश कुमार सागर से पूछताछ के जरिए ED ऑस्ट्रिया यात्रा के खर्च, रिशुश्री की कंपनी से उनके संबंधों और सरकारी ठेकों में संभावित भूमिका की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। 21.92 लाख रुपये के खर्च का वास्तविक स्रोत और उसके बदले किसी सरकारी लाभ का लेन-देन हुआ या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
