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पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, FSSAI को दो हफ्ते की मोहलत

State Desk Bihar
Last updated: अगस्त 13, 2026 7:09 अपराह्न
By : State Desk Bihar
Published on : 3 महीना पहले
पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त
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नई दिल्ली: पैकेज्ड फूड पदार्थों में ज्यादा चीनी, नमक और संतृप्त वसा की जानकारी स्पष्ट रूप से देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि उपभोक्ताओं, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र और FSSAI को अंतिम निर्णय लेकर दो सप्ताह के भीतर उसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सरकार इस अवधि में खुद कोई ठोस फैसला नहीं करती है तो अदालत अगली सुनवाई में इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। सुनवाई के दौरान पीठ ने इसे सरकार के लिए “आखिरी मौका” बताया।

क्या है पूरा मामला?

मामला पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर Front-of-Pack Warning Labels (FOPWL) लगाने की मांग से जुड़ा है। इसका उद्देश्य पैकेट के सामने ही यह स्पष्ट करना है कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा अधिक है या नहीं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केवल पोषण संबंधी आंकड़े लिख देने से आम उपभोक्ता के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि किसी खाद्य पदार्थ में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा स्वास्थ्य के लिहाज से कितनी अधिक है। इसलिए पैकेट के सामने सरल और स्पष्ट चेतावनी दी जानी चाहिए।

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FSSAI के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं दिखी अदालत

सुनवाई के दौरान FSSAI ने चेतावनी लेबल की जगह पैकेजिंग पर चीनी, नमक और संतृप्त वसा की दैनिक अनुशंसित मात्रा से संबंधित जानकारी देने का प्रस्ताव रखा। यह व्यवस्था 2024 की ICMR-NIN Dietary Guidelines के आधार पर तैयार किए जाने की बात कही गई।

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FSSAI ने यह भी बताया कि मार्च 2026 में हितधारकों के साथ हुई चर्चा में कई उद्योग संगठनों ने चेतावनी लेबल का विरोध किया था। उनकी दलील थी कि इससे उपभोक्ताओं के बीच किसी उत्पाद को लेकर अनावश्यक भय पैदा हो सकता है और इसकी जगह ऐसी जानकारी दी जानी चाहिए जिससे लोग खुद फैसला ले सकें।

हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि उपभोक्ता को खरीदारी से पहले यह पता होना चाहिए कि वह जो खाद्य पदार्थ लेने जा रहा है, उसमें स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण तत्व कितनी मात्रा में मौजूद हैं।

कॉरपोरेट दबाव पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या खाद्य उद्योग से पड़ने वाले दबाव का असर नियामक के फैसले पर पड़ रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह किसी खास खाद्य उत्पाद या कंपनी के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसका मकसद उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना है।

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पीठ ने यह भी कहा कि किसी उत्पाद पर चेतावनी होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे खरीदने पर रोक लग जाएगी। अंतिम फैसला उपभोक्ता का ही होगा। अदालत के अनुसार, जरूरी यह है कि खरीदारी का निर्णय लेते समय व्यक्ति के पास पर्याप्त और आसानी से समझ आने वाली जानकारी मौजूद हो।

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कोर्ट की चिंता

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि बढ़ती उम्र के बच्चों में पैकेज्ड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की खपत को देखते हुए उपभोक्ताओं को उनके पोषण संबंधी जोखिमों की जानकारी मिलना जरूरी है।

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि भारत को खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों से पीछे क्यों रहना चाहिए। पीठ ने कहा कि देश को यह संदेश देना चाहिए कि नागरिकों, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर वह गंभीर है।

पहले भी FSSAI को दिया गया था निर्देश

यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर FSSAI से जवाब मांगा है। इससे पहले फरवरी 2026 में अदालत ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी के मुद्दे पर FSSAI की कार्रवाई पर असंतोष जताया था और मामले पर दोबारा विचार करने को कहा था।

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FSSAI ने इससे पहले Indian Nutrition Rating (INR) जैसे विकल्प पर भी काम किया था। इसके तहत पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को अलग-अलग पोषण मानकों के आधार पर रेटिंग देने का प्रस्ताव था। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर भी व्यापक सहमति नहीं बन सकी।

अब दो हफ्ते में होगा अगला फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और FSSAI को दो सप्ताह का समय दिया है। इस दौरान सरकार को इस मुद्दे पर अपना अंतिम रुख स्पष्ट करना होगा। यदि सरकार चेतावनी लेबल लागू करने की दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लेती है, तो अदालत ने संकेत दिया है कि वह खुद आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है।

इस मामले में अगली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि उसके बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चीनी, नमक और संतृप्त वसा की मात्रा को लेकर उपभोक्ताओं के लिए किस तरह की अनिवार्य जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

TAGGED:Breaking NewsFSSAISupreme Court
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