पटना: पटना विश्वविद्यालय में 2 सितंबर 2026 को प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक नंदकिशोर नवल की स्मृति में सातवें स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी कहानी के बदलते स्वरूप, उसकी संरचना और साहित्य में परिवर्तन के साथ निरंतरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद ने की। उन्होंने नंदकिशोर नवल के परिवार की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया।

स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. संजीव कुमार रहे। उन्होंने व्याख्यान के मुख्य विषय ‘हिन्दी कहानी की कहनी (परिवर्तन और निरंतरता का एक और व्याख्यान)’ पर अपने विचार रखे। उन्होंने हिंदी कहानी की बदलती संरचना और उसके विभिन्न पक्षों की ओर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
कहानी के दो पक्ष—परिणति और प्रक्रिया
डॉ. संजीव कुमार ने हिंदी कहानी के स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि कहानी के दो प्रमुख पक्ष हो सकते हैं—एक परिणति पक्ष और दूसरा प्रक्रिया पक्ष। उन्होंने इन दोनों पक्षों के माध्यम से कहानी की संरचना और उसके विकास को समझने की कोशिश की।

व्याख्यान के दौरान हिंदी कहानी में समय के साथ आए बदलावों के साथ-साथ उसकी निरंतरता पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में मौजूद साहित्यप्रेमियों और विद्यार्थियों ने विषय को गंभीरता से सुना।
ऋषिकेश सुलभ ने साझा की नंदकिशोर नवल से जुड़ी स्मृतियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कहानीकार ऋषिकेश सुलभ ने की। उन्होंने नंदकिशोर नवल के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि “नवल जी मेरे गुरु रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने नवल जी के साथ विद्यार्थी के रूप में काफी समय बिताया है। उनके वक्तव्य में नंदकिशोर नवल के साथ बिताए समय और उनसे मिले साहित्यिक मार्गदर्शन की स्मृतियां भी सामने आईं।
शिक्षकों और विद्यार्थियों की रही बड़ी भागीदारी
कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उत्तम कुमार ने किया। वहीं डॉ. संजय कुमार ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम के अंत में नंदकिशोर नवल के पुत्र चिंतन भारद्वाज ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर डॉ. तरुण कुमार, डॉ. योगेश सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। हिंदी साहित्य और कहानी के बदलते स्वरूप पर आयोजित इस व्याख्यान ने विद्यार्थियों और साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों को एक महत्वपूर्ण विमर्श का अवसर दिया।