पटना: राजधानी पटना में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले एक व्यक्ति के साथ हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बहादुरपुर निवासी राकेश कुमार के क्रिप्टो वॉलेट में मौजूद करीब 50 लाख रुपये अचानक गायब हो गए। राकेश ने वर्ष 2017 में करीब 3 लाख रुपये क्रिप्टोकरेंसी में लगाए थे। समय के साथ निवेश की बाजार कीमत बढ़कर करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। रकम गायब होने के बाद उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और पटना साइबर थाने में भी लिखित आवेदन दिया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
वॉलेट चेक किया तो गायब थी पूरी रकम
राकेश कुमार के मुताबिक, वह लंबे समय से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर रहे थे। 2017 में किए गए निवेश की कीमत धीरे-धीरे बढ़ती गई। हाल में उनके वॉलेट में इस निवेश की बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपये दिखाई दे रही थी।
इसी बीच जब उन्होंने अपने ब्लॉकचेन वॉलेट की जांच की तो रकम वहां मौजूद नहीं थी। बड़ी राशि गायब होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने स्तर पर इसकी पड़ताल करने की कोशिश की, लेकिन लेनदेन का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका।
साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत
रकम गायब होने के बाद राकेश ने सबसे पहले भारत सरकार के साइबर क्राइम नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद वह पटना साइबर थाने पहुंचे और पूरे मामले की लिखित जानकारी पुलिस को दी।
शिकायत के साथ उन्होंने निवेश और भुगतान से जुड़े दस्तावेज, ऑनलाइन शिकायत की कॉपी तथा क्रिप्टो वॉलेट से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं।
ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन की जांच में जुटी पुलिस
शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि वॉलेट से रकम किस तरीके से निकली और किस डिजिटल वॉलेट या पते पर ट्रांसफर हुई।
पुलिस उपलब्ध ब्लॉकचेन ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम किसी साइबर अपराध के जरिए निकाली गई या इसके पीछे कोई तकनीकी अथवा अन्य कारण था।
क्रिप्टो निवेश में डिजिटल सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मामलों में वॉलेट की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। डिजिटल वॉलेट की निजी चाबी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ लगने पर रकम पर नियंत्रण खोने का खतरा रहता है।
इसके अलावा साइबर अपराधी फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, नकली क्रिप्टो एक्सचेंज, सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल ऐप के जरिए भी निवेशकों को निशाना बनाते रहे हैं। हालांकि, पटना के इस मामले में रकम किस वजह से गायब हुई, इसका अभी पुलिस जांच के बाद ही पता चलेगा।
2017 में लगाया था पैसा, अब 50 लाख की कीमत
इस मामले की खास बात यह है कि राकेश कुमार ने करीब नौ साल पहले 3 लाख रुपये क्रिप्टोकरेंसी में लगाए थे। बाजार में कीमत बढ़ने के साथ उनके निवेश का मूल्य करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच गया था।
यानी शुरुआती निवेश के मुकाबले रकम कई गुना बढ़ चुकी थी। लेकिन वॉलेट से पूरी रकम गायब होने के बाद अब निवेशक ने पुलिस से इसकी जांच कराकर रकम का पता लगाने की मांग की है।
जांच के बाद साफ होगी रकम गायब होने की वजह
फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति या समूह पर पुलिस की ओर से आरोप तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है। साइबर पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और ब्लॉकचेन लेनदेन की जांच कर रही है।
अब जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि करीब 50 लाख रुपये वाले क्रिप्टो फंड तक किसने पहुंच बनाई और रकम आखिर किस वॉलेट में ट्रांसफर हुई। पुलिस की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।