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रूस ने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को क्यों चुना? यूक्रेनी बैंक से जुड़े करोड़ों डॉलर के विवाद में निभाएंगे बड़ी भूमिका

State Desk Bihar
Last updated: अगस्त 14, 2026 2:01 अपराह्न
By : State Desk Bihar
Published on : 3 महीना पहले
डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने क्यों चुना? यूक्रेन के ओशाडबैंक विवाद में बड़ी भूमिका
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नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशाडबैंक से जुड़े एक बड़े निवेश विवाद में अपना arbitrator (मध्यस्थ न्यायाधिकरण का सदस्य) नियुक्त किया है। यह मामला रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुई द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कार्यवाही से जुड़ा है। ओशाडबैंक ने युद्ध के दौरान अपनी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को हुए नुकसान के लिए रूस से मुआवजे का दावा किया है।

मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल करेगा। कोस्टा रिका की पूर्व व्यापार मंत्री और arbitrator डियाला जिमेनेज को रूस और ओशाडबैंक की सहमति से ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष चुना गया है। ओशाडबैंक ने ग्रीस के arbitrator और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को अपनी ओर से नियुक्त किया है।

क्या है रूस और ओशाडबैंक के बीच विवाद?

यह विवाद रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ओशाडबैंक की संपत्तियों और कारोबारी संचालन को हुए कथित नुकसान से संबंधित है। यूक्रेन के सरकारी बैंक का कहना है कि डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और गतिविधियों को युद्ध के कारण भारी नुकसान पहुंचा। बैंक ने इसी आधार पर निवेश संधि के तहत रूस के खिलाफ मुआवजे का दावा किया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ओशाडबैंक का दावा करोड़ों डॉलर का है। बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद के समाधान के लिए औपचारिक नोटिस भेजा था। इसके बाद मामला अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया तक पहुंचा।

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1998 की निवेश संधि के तहत हो रही सुनवाई

इस पूरे विवाद की कानूनी बुनियाद रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुई द्विपक्षीय निवेश संधि यानी Bilateral Investment Treaty (BIT) में है। इसी संधि के तहत ओशाडबैंक ने अपने निवेश और संपत्तियों को हुए नुकसान का दावा आगे बढ़ाया है।

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यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच संपत्तियों, निवेश और कारोबारी अधिकारों से जुड़े कई कानूनी विवाद अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचे हैं।

रूस ने चंद्रचूड़ को ही क्यों चुना?

डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सुप्रीम कोर्ट में लंबे न्यायिक अनुभव और जटिल संवैधानिक एवं कानूनी मामलों की सुनवाई के कारण अंतरराष्ट्रीय कानूनी जगत में भी उनकी पहचान बनी है। रूस इससे पहले भी कुछ निवेश संधि विवादों में उन्हें arbitrator बनाने के लिए संपर्क कर चुका था।

रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने इससे पहले जर्मन ऊर्जा कंपनी Wintershall Dea और यूक्रेन की सरकारी बिजली कंपनी Ukrenergo से जुड़े संधि विवादों में भी चंद्रचूड़ से arbitrator बनने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने उन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था। इस बार उन्होंने रूस की ओर से नियुक्ति स्वीकार की है।

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चंद्रचूड़ रूस के ‘वकील’ नहीं होंगे

इस मामले को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। चंद्रचूड़ रूस के कानूनी प्रतिनिधि या वकील के तौर पर मामले में शामिल नहीं हैं। वह रूस की ओर से नियुक्त arbitrator हैं और तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण का हिस्सा होंगे।

ट्रिब्यूनल में एक सदस्य रूस की ओर से, एक सदस्य ओशाडबैंक की ओर से और अध्यक्ष दोनों पक्षों की सहमति से चुना गया है। ऐसे में चंद्रचूड़ की भूमिका मामले में रूस के पक्ष में पैरवी करने की नहीं, बल्कि आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के सदस्य के रूप में कार्यवाही में हिस्सा लेने की होगी।

अब आगे क्या होगा?

अब तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल रूस और ओशाडबैंक के दावों तथा जवाबों पर विचार करेगा। विवाद में मुख्य सवाल यह होगा कि युद्ध के दौरान बैंक की संपत्तियों और निवेश को हुए नुकसान के लिए 1998 की निवेश संधि के तहत रूस की क्या कानूनी जिम्मेदारी बनती है।

इस मामले का अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया के बाद सामने आएगा। फिलहाल डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति ने इस विवाद को भारत में भी खासा महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि पहली बार किसी पूर्व भारतीय CJI की अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में ऐसी भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

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