कोसी के आसमान में उड़ान की तैयारी तेज, AAI ने शुरू की बड़ी निर्माण प्रक्रिया; 15-20 सीट वाले विमानों के लिए तैयार होगा एयरपोर्ट
सहरसा। कोसी क्षेत्र को हवाई संपर्क से जोड़ने का वर्षों पुराना इंतजार अब धीरे-धीरे निर्माण की ठोस प्रक्रिया में बदलता दिखाई दे रहा है। सहरसा हवाई अड्डे के विकास एवं उन्नयन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने ₹42.52 करोड़ की नई निविदा जारी कर दी है।
यह निविदा महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट को छोटे विमानों के परिचालन के योग्य बनाने के लिए रनवे और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है।
सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार निविदा 8 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुई है। इसमें सहरसा एयरपोर्ट को Code-2B श्रेणी के विमानों के लिए विकसित और उन्नत करने का प्रस्ताव है। निविदा की अनुमानित लागत ₹42.52 करोड़ है, जबकि काम पूरा करने की अवधि 450 दिन निर्धारित की गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पोस्ट
सहरसा को हवाई सम्पर्कता देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम!
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार।
सहरसा हवाई अड्डे के विकास एवं उन्नयन हेतु AAI द्वारा ₹42.52 करोड़ की निविदा प्रकाशित कर दी गई है। ये पूरे कोसी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है।
12 एकड़ भूमि ₹147…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 9, 2026
सहरसा को हवाई संपर्कता देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम! देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का आभार। सहरसा हवाई अड्डे के विकास एवं उन्नयन हेतु एएआइ द्वारा ₹42.52 करोड़ की निविदा प्रकाशित कर दी गई है। ये पूरे कोसी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है।
12 एकड़ भूमि ₹147 करोड़ की लागत से राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सहरसा सहित पूरे कोसी क्षेत्र को शीघ्र हवाई संपर्कता मिलने की राह प्रशस्त होगी।
सिर्फ टर्मिनल नहीं, पूरा एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तैयार
सहरसा एयरपोर्ट के मौजूदा विकास प्लान को देखें तो इस बार काम का दायरा काफी व्यापक है। AAI की निविदा में रनवे, टैक्सीवे, एप्रन, परिधि सड़क, GSE क्षेत्र, वाहन लेन, आपातकालीन पहुंच सड़क, RESA और रनवे बेसिक स्ट्रिप समेत अन्य संबंधित कार्य शामिल हैं। यानी परियोजना का लक्ष्य केवल यात्री भवन खड़ा करना नहीं, बल्कि एयरपोर्ट को परिचालन की बुनियादी जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में AAI ने सहरसा एयरपोर्ट के लिए लगभग ₹35.14 करोड़ की एक अलग EPC निविदा जारी की थी, जिसमें प्री-फैब्रिकेटेड टर्मिनल भवन, ATC टावर, फायर स्टेशन और अन्य संबंधित भवनों का निर्माण शामिल था। AAI के रिकॉर्ड में इस काम की अवधि 15 महीने निर्धारित की गई थी।
इस लिहाज से ₹42.52 करोड़ की ताजा निविदा को परियोजना के रनवे और एयरसाइड विकास की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।
854 मीटर का रनवे बढ़कर 1121 मीटर होगा
सहरसा एयरपोर्ट के मौजूदा रनवे की लंबाई लगभग 854 मीटर बताई गई है। प्रस्तावित विस्तार के बाद इसकी लंबाई करीब 1121 मीटर हो जाएगी।
यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सहरसा में फिलहाल बड़े वाणिज्यिक विमानों के बजाय छोटे क्षेत्रीय विमानों के परिचालन की योजना है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार यहां 15 से 20 सीट क्षमता वाले छोटे विमानों के परिचालन के लिए आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है।
यानी सहरसा एयरपोर्ट का मॉडल फिलहाल पटना या दरभंगा जैसे बड़े एयरपोर्ट की तर्ज पर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी केंद्र के रूप में विकसित करने का है।
12 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण, मुआवजे के लिए ₹147.76 करोड़
रनवे विस्तार के लिए एयरपोर्ट के पश्चिमी हिस्से की ओर अतिरिक्त जमीन की जरूरत है। बिहार सरकार के आधिकारिक कैबिनेट रिकॉर्ड में सहरसा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 12.08891 एकड़ भूमि के अधिग्रहण हेतु ₹1,47,76,56,180 की मुआवजा राशि की प्रशासनिक स्वीकृति दर्ज है।
यानी भूमि अधिग्रहण की लागत और निर्माण लागत को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। एक तरफ राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराने के लिए लगभग ₹147.76 करोड़ खर्च कर रही है, वहीं AAI एयरपोर्ट के भौतिक विकास के लिए अलग से निर्माण निविदाएं जारी कर रहा है।
यही वजह है कि सहरसा एयरपोर्ट परियोजना का वास्तविक वित्तीय आकार केवल ₹42.52 करोड़ की मौजूदा निविदा तक सीमित नहीं है।
नरियार मौजा की जमीन से जुड़े 174 रैयत
रनवे विस्तार के लिए कहरा अंचल के राजस्व थाना बनगांव के अंतर्गत नरियार मौजा की जमीन चिह्नित की गई है। उपलब्ध स्थानीय प्रशासनिक जानकारी के अनुसार भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में 67 खेसरा शामिल हैं और 174 रैयतों की सूची तैयार की गई है।
यह हिस्सा परियोजना की गति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट निर्माण की निविदा जारी हो जाना एक बड़ा चरण है, लेकिन रनवे विस्तार के लिए आवश्यक जमीन का वास्तविक हस्तांतरण, निर्माण स्थल की तैयारी और एजेंसी को कार्यस्थल उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
30 जून 2025 को बनी थी बड़ी आधारभूमि
सहरसा एयरपोर्ट की मौजूदा परियोजना को समझने के लिए वर्ष 2025 का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।
30 जून 2025 को बिहार सरकार और AAI के बीच छह क्षेत्रीय एयरपोर्ट विकसित करने के लिए MoU हुआ था। इसमें सहरसा के साथ बीरपुर, मधुबनी, मुंगेर, वाल्मीकिनगर और मुजफ्फरपुर को शामिल किया गया था। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में भी इस MoU की पुष्टि की गई है।
इससे पहले बिहार कैबिनेट ने इन छह हवाई अड्डों के विकास के लिए शुरुआती चरण में ₹150 करोड़ की योजना को मंजूरी दी थी, यानी प्रत्येक स्थान के लिए करीब ₹25 करोड़ का प्रावधान रखा गया था।
अब सहरसा में AAI की ओर से अलग-अलग निर्माण घटकों के लिए निविदाएं निकलना इस समझौते को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है।
‘उड़ान’ योजना से जुड़ा है पूरा विजन
सहरसा को विकसित करने की योजना केंद्र की क्षेत्रीय हवाई संपर्क नीति यानी UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) के व्यापक उद्देश्य से जुड़ी है।
2026 में केंद्र सरकार ने Modified UDAN को भी मंजूरी दी है। केंद्र के अनुसार नई योजना का लक्ष्य अगले दस वर्षों में क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ाना, छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को जोड़ना तथा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना है। इसके लिए ₹28,840 करोड़ के कुल परिव्यय को मंजूरी दी गई है।
सहरसा जैसे क्षेत्र के लिए इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि सड़क और रेल संपर्क होने के बावजूद तेज हवाई कनेक्टिविटी की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
कोसी की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बदल सकता है?
सहरसा में हवाई सेवा शुरू होने का असर सिर्फ यात्रियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
व्यापार को मिल सकता है नया बाजार
तेज हवाई संपर्क से स्थानीय कारोबारियों, उद्यमियों और सेवा क्षेत्र को बड़े शहरों तक जल्दी पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर ऐसे कारोबार जिनमें समय महत्वपूर्ण है, उनके लिए यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।
पर्यटन को मिलेगा कनेक्टिविटी का सहारा
कोसी और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाएं हैं। बेहतर हवाई संपर्क से बाहर से आने वाले पर्यटकों और निवेशकों के लिए क्षेत्र की पहुंच आसान हो सकती है।
रोजगार के नए अवसर
एयरपोर्ट के निर्माण से तत्काल निर्माण क्षेत्र में रोजगार पैदा होगा। इसके बाद टर्मिनल संचालन, सुरक्षा, परिवहन, होटल, टैक्सी, लॉजिस्टिक्स, खानपान और अन्य सेवाओं में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
आपातकालीन सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण
हवाई संपर्क का एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर कम चर्चा वाला पहलू मेडिकल इमरजेंसी और आपदा प्रबंधन है। कोसी जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भविष्य में एयर कनेक्टिविटी आपातकालीन लॉजिस्टिक्स और राहत व्यवस्था में भी उपयोगी हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल: उड़ान कब शुरू होगी?
यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है—₹42.52 करोड़ की निविदा जारी होने का मतलब यह नहीं है कि सहरसा से तत्काल नियमित यात्री उड़ान शुरू हो जाएगी।
अभी निर्माण प्रक्रिया के कई चरण बाकी हैं। वर्तमान निविदा में 450 दिनों की कार्य अवधि निर्धारित है। इसके बाद निर्माण की प्रगति, भूमि उपलब्धता, नियामकीय स्वीकृतियां, एयरपोर्ट की परिचालन तैयारियां और एयरलाइन/UDAN स्तर पर उड़ान की व्यवस्था जैसे चरण महत्वपूर्ण होंगे।
इसलिए अभी सबसे सही निष्कर्ष यही है कि सहरसा एयरपोर्ट की उड़ान का सपना अब घोषणा के चरण से निकलकर निर्माण के चरण में प्रवेश कर चुका है, लेकिन नियमित यात्री सेवा शुरू होने की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।
एक नजर में सहरसा एयरपोर्ट परियोजना
- नई AAI निविदा: ₹42.52 करोड़
- निविदा जारी: 8 सितंबर 2026
- बिड जमा करने की अंतिम तिथि: 7 अक्टूबर 2026
- बिड खुलने की तारीख: 14 अक्टूबर 2026
- निर्माण अवधि: 450 दिन
- एयरपोर्ट श्रेणी: Code-2B
- प्रस्तावित विमान: छोटे क्षेत्रीय विमान
- प्रस्तावित रनवे: लगभग 1121 मीटर
- मौजूदा रनवे: लगभग 854 मीटर
- भूमि अधिग्रहण: 12.08891 एकड़ के लिए स्वीकृति
- भूमि मुआवजा: ₹147.76 करोड़
- अधिग्रहण क्षेत्र: नरियार मौजा
- MoU: बिहार सरकार और AAI के बीच 30 जून 2025
- UDAN के तहत बिहार के छह स्थानों में शामिल: सहरसा समेत बीरपुर, मधुबनी, मुंगेर, वाल्मीकिनगर और मुजफ्फरपुर
विश्लेषण: घोषणा से आगे बढ़कर अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की
सहरसा एयरपोर्ट के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि परियोजना अब केवल राजनीतिक घोषणा या कागजी स्वीकृति तक सीमित नहीं दिख रही। भूमि अधिग्रहण के लिए बड़ी राशि की प्रशासनिक स्वीकृति, AAI की निर्माण निविदाएं और एयरपोर्ट के विभिन्न हिस्सों के लिए अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान—तीनों समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।
हालांकि असली सफलता का पैमाना टेंडर जारी होना नहीं, बल्कि समय पर भूमि उपलब्ध होना, निर्माण पूरा होना और उसके बाद नियमित व्यावसायिक उड़ान शुरू होना होगा।
यदि यह तीनों चरण तय समय में पूरे होते हैं, तो सहरसा एयरपोर्ट सिर्फ सहरसा जिले की परिवहन सुविधा नहीं रहेगा। यह पूरे कोसी क्षेत्र के लिए तेज कनेक्टिविटी का नया द्वार बन सकता है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है—कोसी के आसमान में उड़ान की तैयारी अब फाइलों से निकलकर निर्माण स्थल तक पहुंच चुकी है।