जमालपुर/मुंगेर: भारतीय रेल के तकनीकी क्षेत्र में बेहतर मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। जमालपुर स्थित भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान (इरिमी) और भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बीसीई) के बीच पांच वर्षों के लिए शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग का समझौता हुआ है।
इस करार के तहत रेलवे से जुड़े आधुनिक यांत्रिक और विद्युत अभियंत्रण की तकनीकों को प्रशिक्षण और प्रयोगशाला आधारित अध्ययन से जोड़ा जाएगा।
इस समझौते का प्रमुख लाभ भारतीय रेल प्रबंधन सेवा (IRMS) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ उनके व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
खास बात यह है कि प्रशिक्षण केवल कक्षा में सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशिक्षणार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में तकनीकों का प्रयोग और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा। इससे रेलवे में काम करने वाले भावी अधिकारियों को तकनीकी समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में बेहतर तैयारी मिल सकेगी।
किताबों तक सीमित नहीं रहेगी पढ़ाई, लैब में होगा तकनीक का अभ्यास
रेलवे में लगातार नई तकनीक और आधुनिक प्रणालियों को अपनाया जा रहा है। ऐसे में तकनीकी अधिकारियों के लिए केवल किताबों से जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इरिमी और बीसीई के बीच हुए समझौते में लैब आधारित प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है।
प्रशिक्षणार्थियों को विभिन्न तकनीकों की कार्यप्रणाली समझने के साथ उन्हें प्रयोगशाला में इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें तकनीकी ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
वहीं, इस सहयोग का लाभ बीसीई के विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को भी मिलेगा। इरिमी के पास रेलवे के यांत्रिक एवं विद्युत क्षेत्र से जुड़े अत्याधुनिक उपकरणों के साथ रोलिंग स्टॉक से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इन संसाधनों के माध्यम से इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को रेलवे की तकनीक और कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पर रहेगा फोकस
समझौते के तहत प्रशिक्षण में मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न विषयों को शामिल किया जाएगा। बीसीई के विशेषज्ञ संकाय और प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल प्रशिक्षण कार्यक्रम में किया जाएगा।
इससे प्रशिक्षणार्थियों को तकनीकी अवधारणाओं की जानकारी के साथ उनके व्यावहारिक पक्ष को समझने में भी मदद मिलेगी। वहीं विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इरिमी की रेलवे विशेषज्ञता तकनीकी ज्ञान को नए नजरिए से समझने का अवसर प्रदान करेगी।
बहुविषयक तकनीकी समझ विकसित करना लक्ष्य
इरिमी के महानिदेशक अनिमेष कुमार सिन्हा ने कहा कि भारतीय रेल में तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं। ऐसे में IRMS अधिकारियों के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और बहुविषयक समझ विकसित करना जरूरी है।
इरिमी और बीसीई का सहयोग शैक्षणिक विशेषज्ञता को व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संकायाध्यक्ष एवं वरिष्ठ आचार्य प्रेम प्रकाश ने कहा कि तकनीकी शिक्षा को प्रयोगशाला आधारित अध्ययन से जोड़ने से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होती है। बीसीई के विशेषज्ञ संकाय और प्रयोगशाला सुविधाओं के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
एमओयू पर इरिमी के महानिदेशक, संकायाध्यक्ष, वरिष्ठ आचार्य राजीव कुमार, सेक्रेटरी टू डीजी प्रेमनजीत कुमार, आचार्य शिशिरचंद्र शेखर और आचार्य कुमार ज्योतिरादित्य की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
विद्यार्थियों को क्या मिलेगा फायदा?
- रेलवे की आधुनिक तकनीक को करीब से समझने का अवसर
- अत्याधुनिक लैब में व्यावहारिक प्रशिक्षण
- मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की आधुनिक तकनीकों की जानकारी
- रेलवे के उपकरणों और रोलिंग स्टॉक की कार्यप्रणाली को समझने का मौका
- इरिमी और बीसीई के विशेषज्ञों से तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान
- किताबों की पढ़ाई को वास्तविक तकनीकी परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर