मूर्ति स्थापना के लिए लाइसेंस अनिवार्य, विसर्जन जुलूस की होगी वीडियोग्राफी; रात 10 बजे के बाद पटाखों के इस्तेमाल पर नियंत्रण और प्रदूषण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने को कहा
पटना, 4 नवंबर। दीपावली के दौरान आग लगने की आशंका, पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं और भीड़भाड़ के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पटना जिला प्रशासन ने सुरक्षा तैयारियां तेज करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने अग्निशमन वाहनों को हर समय तैयार रखने, अस्पतालों में चिकित्सकों और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा बर्न वार्ड को अलर्ट मोड में रखने को कहा है। वहीं, मूर्ति स्थापना के लिए विधिवत लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। मूर्ति विसर्जन के दौरान जुलूस निर्धारित मार्ग से ही निकालने और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश भी दिया गया है।
दीपावली पर पटाखों के इस्तेमाल, अस्थायी पूजा स्थलों और विसर्जन कार्यक्रमों के कारण प्रशासन के सामने सुरक्षा की कई चुनौतियां रहती हैं। आग लगने की घटना में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जबकि पटाखों से झुलसने या घायल होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ती है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने पुलिस, अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग को आपसी समन्वय के साथ तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया है।
मूर्ति स्थापना के लिए लाइसेंस जरूरी, अग्निशमन वाहनों की होगी जांच
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में जहां भी दीपावली के अवसर पर मूर्तियों की स्थापना की जाती है, वहां विधिवत लाइसेंस प्राप्त करने के बाद ही स्थापना की अनुमति दी जाए। संबंधित पदाधिकारियों को इस व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।

अग्निशमन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में अग्निशमन वाहनों की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता की जांच कराने को कहा गया है। वाहनों को ऐसी स्थिति में रखा जाए कि आग लगने की सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू किया जा सके।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दीपावली के दौरान घरों, बाजारों, दुकानों और पूजा स्थलों पर दीप, बिजली की सजावट तथा पटाखों के कारण आग लगने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में केवल अग्निशमन वाहन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, उनका चालू हालत में रहना और घटनास्थल तक समय पर पहुंचना भी जरूरी है।
अस्पतालों में इमरजेंसी तैयारी, बर्न वार्ड रहेंगे अलर्ट
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जिलाधिकारी ने सभी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। जिन अस्पतालों में बर्न वार्ड हैं, उन्हें अलर्ट मोड में रखने को कहा गया है। वहीं, जहां बर्न वार्ड उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी एहतियातन जरूरी चिकित्सा व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
आपातकालीन स्थिति में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सिविल सर्जन और डीपीएम, हेल्थ को विशेष रूप से जिम्मेदारी दी गई है।

पटाखों से झुलसने, आंखों में चोट लगने या धुएं के संपर्क में आने जैसी घटनाओं में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता के साथ जरूरी दवाओं और प्राथमिक उपचार की तैयारी भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन का निर्देश है कि किसी आपात स्थिति में मरीज को चिकित्सा सहायता मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए।
विसर्जन जुलूस निर्धारित मार्ग से ही निकलेंगे, होगी वीडियोग्राफी
पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा ने मूर्ति विसर्जन को लेकर सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विसर्जन जुलूस निर्धारित मार्ग से ही निकाले जाएं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की निगरानी की जा सके।
सभी थानाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने, आवश्यक पुलिस बल की तैनाती करने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। विसर्जन के दौरान भीड़, यातायात और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी की जरूरत होगी। निर्धारित मार्ग का पालन कराने से जुलूसों के संचालन और सुरक्षा प्रबंधन में प्रशासन को मदद मिल सकती है।
रात 10 बजे के बाद पटाखों पर नियंत्रण का निर्देश
पुलिस अधीक्षक ने रात 10 बजे के बाद पटाखों के इस्तेमाल पर यथासंभव रोक लगाने और इस संबंध में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। थानाध्यक्षों को अपने क्षेत्रों में सतर्कता बरतने तथा लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया गया है।

पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज वायु तथा ध्वनि प्रदूषण बढ़ाते हैं। इसका असर आम लोगों के साथ बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन कराना प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
प्रदूषण के प्रति जागरूकता, पर्यावरण अनुकूल दीपावली पर जोर
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निर्देशों के आलोक में आम लोगों को पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के प्रति जागरूक करने को कहा गया है। प्रशासन का जोर लोगों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से दीपावली मनाने के लिए प्रेरित करने पर है।
दीपावली के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण, दोनों पहलुओं को साथ लेकर चलना जरूरी है। एक ओर आग और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए अग्निशमन तथा स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखना होगा, वहीं दूसरी ओर पटाखों के इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियमों का पालन और जन-जागरूकता भी जरूरी है।
निर्देशों के क्रियान्वयन पर रहेगी सुरक्षा व्यवस्था की असली कसौटी
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय पर तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है। प्रशासन की रणनीति में अग्निशमन वाहनों की तत्परता, अस्पतालों की आपातकालीन व्यवस्था, मूर्ति स्थापना के लिए लाइसेंस, विसर्जन जुलूसों की निगरानी और पटाखों के इस्तेमाल पर नियंत्रण जैसे पहलू शामिल हैं।

हालांकि, इन तैयारियों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्देशों का जमीन पर कितना प्रभावी पालन होता है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों, पूजा स्थलों और विसर्जन मार्गों पर अग्निशमन वाहनों की पहुंच, पुलिस की निगरानी और अस्पतालों की तत्काल चिकित्सा सुविधा महत्वपूर्ण होगी। दीपावली का उत्सव सुरक्षित रहे, इसके लिए प्रशासनिक सतर्कता के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है।
