दीघा से गाय घाट तक तैयारियों का जायजा, खतरनाक घाटों पर लाल निशान और SDRF-NDRF की तैनाती के निर्देश; पार्किंग से लेकर रोशनी और चेंजिंग रूम तक की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा
पटना, 4 नवंबर। छठ महापर्व पर गंगा घाटों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पटना जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार घाटों के किनारे ही नहीं, बल्कि पानी के भीतर भी निर्धारित गहराई तक मजबूत बैरिकेडिंग कराने का निर्देश दिया गया है। खतरनाक घाटों को लाल कपड़े से घेरकर वहां स्पष्ट रूप से चेतावनी लिखी जाएगी। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बुधवार को वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा और नगर आयुक्त यशपाल मीणा के साथ दीघा से गाय घाट तक प्रमुख गंगा घाटों का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसियों को दो टूक निर्देश दिया कि छठ से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी हों। सुरक्षा के इंतजामों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। खासकर गंगा के जलस्तर और घाटों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बैरिकेडिंग की मजबूती तथा खतरनाक स्थलों की पहचान पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
पानी के भीतर तक सुरक्षा घेरा, खतरनाक घाटों पर लाल निशान
छठ के दौरान श्रद्धालु अर्घ्य देने के लिए पानी में उतरते हैं। ऐसे में घाटों पर केवल जमीन के हिस्से में बैरिकेडिंग पर्याप्त नहीं होती। पानी की गहराई, तल की स्थिति और संभावित खतरे को ध्यान में रखकर सुरक्षा घेरा बनाना जरूरी है। जिलाधिकारी ने इसी पहलू पर जोर देते हुए पानी के भीतर भी निर्धारित गहराई तक मजबूत बैरिकेडिंग कराने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही सभी खतरनाक घाटों को लाल कपड़े से घेरने और वहां बड़े तथा स्पष्ट अक्षरों में ‘खतरनाक घाट’ लिखने को कहा गया है। इसका मकसद श्रद्धालुओं को जोखिम वाले स्थानों के बारे में पहले से सचेत करना है। हालांकि, केवल चेतावनी बोर्ड या लाल कपड़े से घेराबंदी पर्याप्त नहीं होगी; इन स्थानों पर निगरानी और लोगों को सुरक्षित विकल्पों की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
दीघा से गाय घाट तक तैयारियों की समीक्षा
जिलाधिकारी ने पाटी पुल एवं दीघा घाट से लेकर गाय घाट तक विभिन्न घाटों का भ्रमण किया। इस दौरान मिनार घाट, तिरानवे घाट, कलेक्ट्रेट घाट और जजेज घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर चल रहे कार्यों की प्रगति देखी। संबंधित पदाधिकारियों और एजेंसियों से तैयारियों की जानकारी ली तथा जहां काम अधूरा है, वहां तेजी लाने को कहा।
यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब छठ महापर्व के लिए घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। इसलिए प्रशासन के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं—घाटों को सुरक्षित बनाना, भीड़ को नियंत्रित करना, वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित रखना और आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना।
पार्किंग और पहुंच पथ दुरुस्त करने का निर्देश
घाटों तक पहुंचने के रास्ते और पार्किंग की व्यवस्था भी छठ के दौरान महत्वपूर्ण होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर संकरी सड़कों और अव्यवस्थित वाहन पार्किंग से जाम की स्थिति बन सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने छठव्रतियों और श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग स्थल तैयार करने तथा घाटों तक जाने वाले सभी पहुंच पथों की मरम्मत और जरूरी व्यवस्था जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।

प्रशासनिक तैयारी का यह हिस्सा इसलिए भी अहम है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस, पुलिस और राहत दलों को घाटों तक पहुंचने में बाधा नहीं होनी चाहिए।
रोशनी, पेयजल और चेंजिंग रूम की व्यवस्था
सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है। जिलाधिकारी ने सभी घाटों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, चेंजिंग रूम, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। घाटों की सजावट भी निर्धारित समय में पूरी करने का निर्देश दिया गया।
पब्लिक एड्रेस सिस्टम और नियंत्रण कक्ष की भूमिका खास तौर पर भीड़ के समय बढ़ जाती है। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को जरूरी सूचनाएं दी जा सकती हैं और किसी अप्रिय स्थिति में लोगों को तत्काल सतर्क किया जा सकता है।
SDRF-NDRF और प्रशिक्षित गोताखोरों की होगी तैनाती
गंगा घाटों पर किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की तैयारी की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने प्रमुख घाटों पर पर्याप्त संख्या में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तथा प्रशिक्षित गोताखोर तैनात करने का निर्देश दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन, निगरानी और त्वरित सहायता के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया।

गंगा में अर्घ्य के दौरान पानी की गहराई, फिसलन और भीड़ का दबाव दुर्घटना की आशंका बढ़ा सकते हैं। ऐसे में प्रशिक्षित गोताखोरों की उपलब्धता, राहत दलों की त्वरित पहुंच और पुलिस की सतत निगरानी सुरक्षा व्यवस्था के अहम हिस्से हैं।
निरीक्षण के बाद असली कसौटी समय पर काम पूरा होना
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों और कार्यकारी एजेंसियों को आपसी समन्वय से शेष कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि छठ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी व्यवस्थाएं इस तरह की जाएं कि व्रती तथा श्रद्धालु सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण में अर्घ्य दे सकें।
हालांकि, किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन में प्रशासनिक निरीक्षण और निर्देश तभी प्रभावी साबित होते हैं, जब उनका जमीन पर समयबद्ध क्रियान्वयन हो। पटना के गंगा घाटों पर इस बार पानी के भीतर बैरिकेडिंग, खतरनाक घाटों की पहचान, गोताखोरों की तैनाती और पहुंच पथों की व्यवस्था इस तैयारी की महत्वपूर्ण कसौटी होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा का भरोसा केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि घाटों पर दिखाई देने वाले पुख्ता इंतजामों से बनेगा।
