कंपनी पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप, याचिका में कहा गया, रिंग नींद के अलग-अलग चरणों को सीधे नहीं मापती
नई दिल्ली। स्मार्ट रिंग बनाने वाली कंपनी Oura मुश्किल में घिर गई है। कंपनी के खिलाफ अमेरिका में एक प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि Oura ने अपने स्मार्ट रिंग की नींद ट्रैक करने की क्षमता और उसकी सटीकता को लेकर ग्राहकों को गुमराह किया।
मामला खास तौर पर इस दावे पर केंद्रित है कि Oura Ring नींद के अलग-अलग चरणों को बेहद सटीक तरीके से पहचान सकती है।
यह मुकदमा 20 अगस्त 2026 को अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित संघीय अदालत में दायर किया गया। मामले में कैलिफोर्निया की रहने वाली Madison Surber को प्रमुख वादी बताया गया है।
उन्होंने 2025 में Oura Ring खरीदने के लिए 513.68 डॉलर खर्च किए थे। शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने कंपनी के उन दावों पर भरोसा किया था, जिनमें रिंग की नींद ट्रैकिंग क्षमता को काफी सटीक बताया गया था।
95% सटीकता के दावे पर सवाल
मुकदमे में Oura की उस मार्केटिंग को चुनौती दी गई है, जिसमें कंपनी ने अपने रिंग की स्लीप-स्टेजिंग सटीकता को क्लिनिकल स्लीप लैब की तुलना में 95% तक बताया था। शिकायत के मुताबिक, कंपनी पहले भी लगभग 79% सटीकता जैसे दावे कर चुकी थी।
वादी पक्ष का आरोप है कि वास्तविक प्रदर्शन इन दावों से काफी कम हो सकता है। शिकायत में एक अध्ययन का हवाला देते हुए नींद के चरणों की पहचान की सटीकता करीब 53% बताई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग अध्ययनों और मापने के तरीकों के अनुसार बदल सकता है। इसलिए इसे Oura Ring की हर स्थिति में तय सटीकता नहीं माना जा सकता।
रिंग आखिर नींद कैसे पहचानती है?
मुकदमे में सबसे बड़ा सवाल यही उठाया गया है कि Oura Ring नींद के अलग-अलग चरणों को किस आधार पर पहचानती है। शिकायत के अनुसार, क्लिनिकल स्लीप टेस्ट यानी पॉलीसोमनोग्राफी में नींद के चरणों की जांच के लिए दिमाग की विद्युत गतिविधि, आंखों की गतिविधि और शरीर से जुड़े दूसरे संकेतों को मापा जाता है। इसके लिए सिर और चेहरे के आसपास सेंसर और इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं।
वादी पक्ष का कहना है कि उंगली में पहनी जाने वाली रिंग इन सभी संकेतों को सीधे नहीं मापती। इसके बजाय वह हार्ट रेट, त्वचा का तापमान और शरीर की गतिविधि जैसे संकेतों को रिकॉर्ड करती है और फिर सॉफ्टवेयर व AI मॉडल के जरिए नींद के चरणों का अनुमान लगाती है। शिकायत में इसी अनुमान की सटीकता को लेकर सवाल उठाया गया है।
Oura ने आरोपों को खारिज किया
Oura ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी ने कहा है कि वह शिकायत में लगाए गए आरोपों से असहमत है और मुकदमे में अपना बचाव करेगी। यानी अभी अदालत ने यह तय नहीं किया है कि कंपनी ने वास्तव में ग्राहकों को गुमराह किया या नहीं। मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है।
मामला सिर्फ नींद तक सीमित नहीं
यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्मार्टवॉच और स्मार्ट रिंग अब सिर्फ कदम गिनने या समय देखने वाले गैजेट नहीं रह गए हैं। लोग इन डिवाइस से नींद, हार्ट रेट, रिकवरी और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी हासिल करते हैं। कई लोग इन आंकड़ों के आधार पर अपनी दिनचर्या और नींद की आदतों में बदलाव करते हैं।
वादी पक्ष का कहना है कि अगर किसी डिवाइस को मेडिकल टेस्ट जैसी सटीकता वाला बताकर बेचा जाता है और उसके आंकड़े उतने सटीक नहीं हैं, तो ग्राहक गलत जानकारी के आधार पर फैसले ले सकते हैं।
क्या मांग की गई है?
मुकदमे में अदालत से Oura के कथित भ्रामक दावों को रोकने की मांग की गई है। इसके अलावा उन ग्राहकों को पैसा लौटाने की मांग भी की गई है, जिन्होंने शिकायत के अनुसार इन दावों पर भरोसा करके Oura Ring खरीदी।
फिलहाल यह प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमा है। क्लास को अदालत से औपचारिक मंजूरी मिलना और आरोपों पर फैसला होना अभी बाकी है। ऐसे में इस मामले को Oura की गलती साबित होने के तौर पर नहीं, बल्कि कंपनी के विज्ञापनों और उसके स्लीप-ट्रैकिंग दावों पर उठे कानूनी सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए।