Meta ने नाबालिग यूजर्स की सोशल मीडिया आदतों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। Instagram और Facebook इस्तेमाल करने वाले 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए रोजाना 2 घंटे की डिफॉल्ट लिमिट, रात में ऐप एक्सेस बंद करने और स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन म्यूट करने जैसे नए नियम सामने आए हैं।
सोशल मीडिया पर बच्चों और टीनएजर्स की सुरक्षा को लेकर दुनियाभर में बहस लगातार बढ़ रही है। इसी बीच Meta ने अमेरिका में बच्चों और किशोरों के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स को लेकर कई बड़े बदलावों पर सहमति जताई है।
नए प्लान के तहत 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए Facebook और Instagram पर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट टाइम लिमिट होगी। इस सीमा को हटाने के लिए पैरेंट की अनुमति जरूरी होगी।
2 घंटे के बाद क्या होगा?
नए नियम में Facebook और Instagram का इस्तेमाल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा डेली लिमिट में गिना जाएगा। यानी कोई टीनएजर Facebook पर एक घंटे और Instagram पर एक घंटा बिताता है तो उसकी कुल दो घंटे की सीमा पूरी मानी जाएगी।
Meta के मुताबिक, यह टाइम लिमिट डिफॉल्ट रूप से लागू होगी और इसे बदलने के लिए माता-पिता की अनुमति की जरूरत होगी। कंपनी का उद्देश्य बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोकना है।
इतना ही नहीं, लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने पर यूजर्स को ब्रेक लेने के लिए भी रिमाइंडर मिलेंगे। Meta के नए समझौते में हर 15 मिनट के लगातार स्क्रीन टाइम के बाद एक प्रॉम्प्ट दिखाने की बात कही गई है। 60 और 90 मिनट का कुल इस्तेमाल पूरा होने पर भी अतिरिक्त रिमाइंडर दिए जाएंगे।
रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रहेगा ऐप
बच्चों और किशोरों के देर रात तक सोशल मीडिया इस्तेमाल को कम करने के लिए Meta ने Night Mode की व्यवस्था की है। इसके तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Facebook और Instagram का इस्तेमाल डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा।
इस अवधि में टीन यूजर्स Feed, Stories, Explore और Reels जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। हालांकि, दोस्तों और परिवार से संपर्क बनाए रखने के लिए Direct Messages को इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।
इसका मकसद खास तौर पर रात में लगातार स्क्रॉलिंग और देर रात तक फोन इस्तेमाल करने की आदत को कम करना है।
स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन भी होंगे बंद
Meta ने बच्चों के स्कूल समय को ध्यान में रखते हुए School Mode का भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक Facebook और Instagram के सामान्य पुश नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे।
हालांकि जरूरी चीजों को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। Direct Messages और अकाउंट की सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट मिलते रहेंगे।
इस बदलाव का उद्देश्य स्कूल के दौरान सोशल मीडिया से आने वाले बार-बार के नोटिफिकेशन से बच्चों का ध्यान भटकने से रोकना है।
पैरेंट्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल
नए प्लान में माता-पिता की भूमिका भी बढ़ाई जा रही है। Meta पैरेंटल सुपरविजन टूल्स को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है, जिससे माता-पिता अपने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को ज्यादा आसानी से समझ और नियंत्रित कर सकेंगे।
कंपनी के अनुसार, माता-पिता को यह जानने में भी मदद मिल सकती है कि उनका बच्चा कोई दूसरा अकाउंट जोड़ रहा है या सुरक्षा सेटिंग्स में बदलाव करने की कोशिश कर रहा है। संदिग्ध अकाउंट्स से होने वाली बातचीत को लेकर भी पैरेंट्स को अलर्ट देने की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।
उम्र की जांच भी होगी सख्त
Meta लंबे समय से यह कोशिश कर रहा है कि कम उम्र के बच्चे गलत उम्र बताकर प्लेटफॉर्म पर अकाउंट न बना सकें। इसके लिए कंपनी AI आधारित Age Assurance Technology पर भी काम कर रही है।
Meta ने बताया है कि वह ऐसे संकेतों की पहचान करने के लिए तकनीक विकसित कर रहा है, जिनसे किसी यूजर की उम्र का अनुमान लगाया जा सके। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी संबंधित AI तकनीक का उद्देश्य सामान्य विजुअल पैटर्न आदि के आधार पर उम्र का अनुमान लगाना है, न कि किसी व्यक्ति की पहचान के लिए फेस फिंगरप्रिंट बनाना।
लाइक और कंटेंट को लेकर भी बदलाव
नाबालिग यूजर्स के अनुभव को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए Meta कई अन्य बदलावों पर भी काम कर रहा है। इनमें किशोरों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के उपाय, कुछ ब्यूटी फिल्टर पर सीमाएं और नाबालिगों के पोस्ट पर लाइक तथा रिएक्शन की संख्या को छिपाने जैसे बदलाव शामिल हैं।
Meta ने पहले भी Instagram, Facebook और Messenger के Teen Accounts में उम्र के हिसाब से कंटेंट सेटिंग्स और अन्य सुरक्षा उपायों का विस्तार किया है।
क्या भारत में भी लागू होंगे ये नियम?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि अभी सामने आया 2 घंटे की लिमिट और रात 12 से सुबह 6 बजे तक ऐप बंद करने वाला समझौता अमेरिका से संबंधित है। Meta ने 52 अमेरिकी राज्यों, क्षेत्रों और District of Columbia के अटॉर्नी जनरल्स के साथ समझौते की घोषणा की है। इसलिए इसे फिलहाल भारत में लागू होने वाला नियम नहीं माना जाना चाहिए।
हालांकि Meta ने इन उपायों को व्यापक इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बनाने के लिए TikTok और YouTube से भी ऐसे कदम अपनाने की अपील की है। कंपनी का तर्क है कि अगर एक ऐप पर बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाए जाते हैं और दूसरे प्लेटफॉर्म पर नहीं, तो वे आसानी से दूसरे ऐप पर चले जाते हैं।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर बढ़ता फोकस
सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार दबाव बढ़ रहा है। एक तरफ प्लेटफॉर्म्स अपने Teen Accounts, पैरेंटल कंट्रोल और AI आधारित उम्र पहचान जैसी तकनीकों को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टाइम लिमिट पर्याप्त नहीं हो सकती।