कटिहार के कुरसेला में गंगा-कोसी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराया, कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटा; फसलें बर्बाद होने से किसानों की बढ़ी चिंता
कुरसेला (कटिहार): कटिहार के कुरसेला प्रखंड में गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। कोसी नदी इस समय खतरे के निशान से 156 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं नदी का जलस्तर अब हाई फ्लड लेवल (HFL) से महज 54 सेंटीमीटर नीचे रह गया है।
पानी के लगातार फैलाव से दो दर्जन से अधिक गांवों में जनजीवन प्रभावित है और कई इलाकों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट गया है।
बाढ़ का असर सबसे ज्यादा निचले और दियारा क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। कई गांवों में घरों के भीतर पानी पहुंच चुका है, जबकि गंगा पार बसे दियारा क्षेत्र के गांव चारों तरफ पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गए हैं।
कई गांवों के घरों में घुसा बाढ़ का पानी
कुरसेला के पत्थर टोला, मलीनिया, मिर्जापुर, बाघमारा, पचकुट्टी, मेहर टोला, कमलाकानी, खेरिया, तीनघरिया, बालू टोला, मजदिया, कटरिया, चायटोला और शेरमारी समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी फैल चुका है।
इन गांवों में सैकड़ों घर प्रभावित हुए हैं। गंगा पार स्थित गोबराही दियारा के घाट टोला, धनेशर टोला, कैंप टोला और स्कूल टोला का संपर्क दूसरे इलाकों से लगभग कट गया है। पानी चारों ओर फैलने के कारण इन गांवों की स्थिति टापू जैसी हो गई है।
वहीं पत्थर टोला और बाघमारा का प्रखंड मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क भी बाधित हो गया है। इससे लोगों को जरूरी सामान, इलाज और अन्य कामों के लिए बाहर निकलने में परेशानी हो रही है।
नाव बनी आवागमन का मुख्य सहारा
बाढ़ के कारण कुरसेला प्रखंड के करीब डेढ़ दर्जन स्कूल भी प्रभावित हुए हैं। कई रास्तों पर पानी भर जाने के बाद सामान्य आवागमन मुश्किल हो गया है। ऐसे में लोगों के लिए नाव ही एक प्रमुख साधन बची है।
मजदिया और कमलाकानी की सड़कों पर पानी भरने के बाद प्रभावित लोगों को ट्रैक्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों के सामने परिवार के साथ-साथ मवेशियों को सुरक्षित रखने की भी चुनौती है।
बाढ़ के पानी से घिरे इलाकों में रहने वाले लोगों को सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का डर भी सता रहा है। कई परिवार ऊंचे और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
मक्का और जूट की फसलें पानी में डूबीं
बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खेतों में लगी मक्का, पटसन (जूट) और दूसरी खरीफ फसलें पानी में डूब गई हैं। लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसलों के नष्ट होने की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों के सामने अब आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है। एक ओर खेतों की फसल बर्बाद हो रही है, तो दूसरी तरफ परिवार और मवेशियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चिंता बनी हुई है।
दियारा क्षेत्रों में हालात ज्यादा चुनौतीपूर्ण
गंगा और कोसी के उफान के कारण दियारा इलाकों में स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। पानी बढ़ने से गांवों के बीच सड़क संपर्क बाधित है और जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों को राहत और बचाव कार्य तेज होने की उम्मीद है। खासकर संपर्क कट चुके गांवों में नावों की उपलब्धता, सुरक्षित स्थानों तक लोगों की पहुंच और मवेशियों के लिए व्यवस्था तत्काल जरूरी बताई जा रही है।
फिलहाल कुरसेला में लोगों की नजर गंगा और कोसी के जलस्तर पर टिकी है। अगर नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और संपर्क टूटे इलाकों में बचाव व्यवस्था मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।