पटना/हाजीपुर/दरभंगा, 12 सितंबर 2026।
जिस दूध को परिवार अपने बच्चों के लिए सुरक्षित समझकर खरीदता है और जिस पनीर को त्योहार से लेकर रोजमर्रा की थाली तक भरोसे के साथ इस्तेमाल करता है, उसी खाद्य सामग्री में मिलावट का खेल अब कार्रवाई के घेरे में है।
बिहार में खाद्य सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिस तरह जांच और छापेमारी तेज की है, उसका असर पटना, हाजीपुर और दरभंगा में हुई ताजा कार्रवाई में साफ दिखाई दिया।
कहीं पनीर में स्टार्च मिला तो कहीं एक्सपायर्ड दूध और खराब पनीर मिला। फतुहा में दूध के नमूने में फॉर्मेलिन की मौजूदगी सामने आने के बाद करीब 126 लीटर दूध नष्ट कराया गया।
स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर चल रही इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि कार्रवाई केवल नमूने लेने तक सीमित नहीं रही, बल्कि खराब, एक्सपायर्ड और असुरक्षित पाए गए खाद्य पदार्थों को मौके पर ही नष्ट कराया गया।
इससे मिलावटखोरों और खाद्य मानकों की अनदेखी करने वालों को साफ संदेश गया है कि लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ अब आसानी से नहीं चलेगा।
हाजीपुर में 72 किलो पनीर में मिली मिलावट, मौके पर नष्ट
वैशाली जिले के हाजीपुर स्टेशन रोड में खाद्य सुरक्षा टीम ने पनीर की जांच के दौरान बड़ी गड़बड़ी पकड़ी। सुधीर किराना दुकान से बरामद 14 किलो पनीर में स्टार्च की मिलावट पाई गई। इसे मौके पर ही नष्ट करा दिया गया।
इसी तरह श्री गणेश पनीर हाउस में जांच के दौरान 58 किलो पनीर में स्टार्च की मिलावट मिली। इसे भी विनष्ट कराया गया। टीम ने नमूना लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यानी सिर्फ एक कार्रवाई में 72 किलो पनीर लोगों की थाली तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।

दरभंगा में एक्सपायर्ड दूध और खराब पनीर मिला
दरभंगा के बेनीपुर स्थित आशापुर चौक के सुधा मिल्क पार्लर में जांच के दौरान भी खाद्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई। यहां 21 लीटर एक्सपायर्ड सुधा मिल्क और 18 किलो खराब पनीर पाया गया।
खाद्य सुरक्षा टीम ने दोनों खाद्य सामग्रियों को मौके पर ही नष्ट कराया। इसके साथ ही आवश्यक नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

फतुहा में दूध में फॉर्मेलिन की मौजूदगी, 126 लीटर दूध नष्ट
पटना जिले के फतुहा क्षेत्र में हुई कार्रवाई इस पूरे अभियान का सबसे गंभीर हिस्सा रही। सबलपुर, फतुहा टेढ़ी पुल के पास राजीव डेयरी में दूध और पनीर की जांच की गई।
जांच में दूध के नमूने में फॉर्मेलिन की मौजूदगी पाई गई। इसके बाद करीब 126 लीटर दूध नष्ट कराया गया। टीम ने आवश्यक नमूने भी संग्रहित किए हैं और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
दूध जैसी रोजमर्रा की खाद्य सामग्री में इस तरह की अनियमितता सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित जांच और सख्त कार्रवाई उपभोक्ताओं के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण है।
Food Supplements के ठिकाने पर भी संयुक्त छापेमारी
फतुहा थाना क्षेत्र के बाजितपुर स्थित Alexa Foods and Supplements परिसर में भी संयुक्त टीम ने निरीक्षण और छापेमारी की। इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ औषधि निरीक्षक, आयुष निदेशालय और पुलिस पदाधिकारी शामिल रहे।
जांच के दौरान Food Supplements, Raw Materials और Manufacturing Equipment पाए गए। कुछ तैयार और कुछ अर्द्धनिर्मित Food Supplements भी मिले। नियमानुसार विश्लेषण के लिए कुल 6 नमूने संग्रहित किए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान Food Supplements के अलावा कोई अन्य औषधि या आपत्तिजनक अथवा संदिग्ध पदार्थ नहीं पाया गया। संस्थान के स्वाधिकारी ने संबंधित खाद्य विनिर्माण अनुज्ञप्ति उपलब्ध होने की जानकारी दी है। दस्तावेजों और प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

पटना की मिठाई दुकान में भी औचक जांच
पटना शहर स्थित संतुष्टि स्वीट्स और उसकी विनिर्माण इकाई में भी खाद्य सुरक्षा टीम ने औचक निरीक्षण और सघन जांच की। टीम ने साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों को लेकर प्रतिष्ठान को सख्त निर्देश दिए।
इस कार्रवाई का व्यापक संदेश यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग अब केवल मिलावट की शिकायत मिलने के बाद ही सक्रिय नहीं हो रहा, बल्कि खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण और मानकों की निगरानी को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
कुमार रवि का सख्त रुख, मिलावटखोरों के लिए साफ संदेश
स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर हो रही कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी निरंतरता है। खाद्य सुरक्षा जैसे विषय में केवल एक-दो छापेमारी पर्याप्त नहीं होती। नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला जांच और रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई—इन सभी स्तरों पर निगरानी जरूरी है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक्सपायर्ड, खराब, मिलावटी या असुरक्षित खाद्य सामग्री का भंडारण, उपयोग अथवा बिक्री किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मिलावटखोरों के लिए संदेश साफ है—मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया तो कार्रवाई से बचना मुश्किल होगा।
कुमार रवि के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा टीमों की सक्रियता इस लिहाज से सराहनीय है कि कार्रवाई को जमीन पर उतारने के साथ-साथ संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इससे केवल मौके पर सामान नष्ट कराने के बजाय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर आगे की विधिक कार्रवाई का रास्ता भी खुलता है।
आखिरकार खाद्य सुरक्षा का सवाल सिर्फ मिलावट पकड़ने का नहीं, बल्कि लोगों की थाली में पहुंचने वाले भोजन पर भरोसा कायम रखने का सवाल है।
ऐसे में जांच और कार्रवाई का यह अभियान जितना नियमित और पारदर्शी होगा, आम उपभोक्ता के लिए उतना ही मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा।