Munger Flood: बाढ़ में घर-आंगन डूबने के बाद सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटकने वाले पीड़ितों को अब राहत के लिए जहां-तहां रात गुजारने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिला प्रशासन ने पहली बार टेंट सिटी नुमा बाढ़ राहत केंद्र तैयार किया है।
समाहरणालय के सामने स्थित केसी सुरेंद्र बाबू पार्क में रविवार से शुरू हुए इस केंद्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आराम, इलाज और बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
इस राहत केंद्र में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग 25-25 बेड वाले विश्राम स्थल बनाए गए हैं। बाढ़ पीड़ित परिवारों को सबसे पहले निबंधन काउंटर पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद वे निर्धारित विश्राम स्थल में आराम कर सकेंगे।
50 बेड वाले विश्राम स्थल में महिलाओं-पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था
टेंट सिटी में कुल 50 बेड की व्यवस्था की गई है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग विश्राम स्थल बनाए जाने से राहत केंद्र में रहने वाले परिवारों को सुविधा मिलेगी।
बाढ़ के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर लोगों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर उपयोगी होगी। प्रशासन का उद्देश्य है कि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान के साथ-साथ जरूरी स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं भी एक ही परिसर में मिल सकें।
बच्चों के लिए दूध, बीमारों का होगा इलाज
राहत केंद्र में आईसीडीएस, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग के अलग-अलग स्टाल लगाए गए हैं। आंगनबाड़ी शिविर में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा शिविर में बीमार लोगों का इलाज किया जाएगा। बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी झेल रहे लोगों को राहत केंद्र पर ही चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
बीमार पशुओं का भी होगा उपचार
बाढ़ के कारण केवल इंसान ही नहीं, बल्कि पालतू और अन्य पशु भी प्रभावित होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राहत केंद्र में पशुपालन विभाग का शिविर भी लगाया गया है।
इस शिविर में बीमार पशुओं को उपचार की सुविधा मिलेगी। इस तरह एक ही परिसर में परिवार के सदस्यों और उनके पशुओं से जुड़ी जरूरी मदद उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है।
सुबह 10 से शाम पांच बजे तक मौजूद रहेंगे कर्मचारी और चिकित्सक
राहत केंद्र में लगाए गए सभी विभागीय स्टालों पर संबंधित कर्मचारी और चिकित्सक सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक मौजूद रहेंगे। इससे बाढ़ पीड़ितों को अपनी समस्याओं के लिए अलग-अलग जगह जाने की जरूरत कम होगी।
बच्चों के लिए दूध, बीमार लोगों के इलाज और पशुओं के उपचार की सुविधा एक ही स्थान पर मिलने से बाढ़ प्रभावित परिवारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
जिला प्रशासन ने पहली बार की ऐसी व्यवस्था
बाढ़ राहत केंद्र के नोडल पदाधिकारी सह जिला पंचायती राज पदाधिकारी कमल कुमार ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में पहली बार इस तरह की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि जिला प्रभारी मंत्री संजय कुमार और प्रभारी सचिव पंकज कुमार पाल सोमवार को राहत केंद्र का जायजा लेंगे।
बाढ़ के कारण जिन परिवारों के आशियाने पानी में डूब गए हैं, उनके लिए यह टेंट सिटी फिलहाल सुरक्षित ठिकाने के साथ-साथ राहत और जरूरी सुविधाओं का केंद्र बनकर सामने आई है।
यहां प्रभावित लोगों को आराम, चिकित्सा सहायता और बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।