मधेपुरा/कटक: साइबर अपराध के एक अंतरराज्यीय मामले में बिहार एसटीएफ को बड़ी कार्रवाई मिली है। बिहार एसटीएफ की विशेष टीम ने मधेपुरा जिला पुलिस और ओडिशा पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए कटक (ओडिशा) साइबर क्राइम थाना कांड संख्या 17/2026 के प्राथमिकी अभियुक्त प्रभु साह को गिरफ्तार किया है। STF के अनुसार, आरोपी को 29 अक्टूबर 2026 को उसके गांव कुस्थनी से छापेमारी कर पकड़ा गया।
इस कार्रवाई की अहम कड़ी आरोपी के बैंक खाते से जुड़ी बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने प्रभु साह के बैंक खाते का इस्तेमाल कर लगभग एक करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कराया था। इसी वित्तीय लेन-देन की जांच के दौरान आरोपी की भूमिका सामने आई और जांच की कड़ी बिहार के मधेपुरा तक पहुंची।
कटक साइबर क्राइम केस में हुई गिरफ्तारी
STF की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, मामला कटक साइबर क्राइम थाना कांड संख्या 17/2026 से संबंधित है। प्राथमिकी 5 अगस्त 2026 को दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66, 66C और 66D के तहत कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान प्रभु साह को मामले का प्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया और उसकी तलाश शुरू हुई।
29 अक्टूबर को बिहार एसटीएफ की विशेष टीम ने मधेपुरा जिला पुलिस और ओडिशा पुलिस के सहयोग से कुस्थनी गांव में कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान प्रभु साह को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है।

बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़ा अहम पहलू
जांच में सामने आया कि आरोपी के बैंक खाते का इस्तेमाल कथित साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया गया। STF के अनुसार, इस खाते के माध्यम से करीब एक करोड़ रुपये की राशि को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कराया गया। ऐसे मामलों में बैंकिंग ट्रेल जांच का महत्वपूर्ण आधार बनती है, क्योंकि इससे रकम के स्रोत और उसके अंतिम ठिकाने तक पहुंचने में मदद मिलती है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि खाते का संचालन किस तरीके से किया गया और रकम किन-किन खातों में भेजी गई। उपलब्ध आधिकारिक सूचना में अन्य संदिग्धों के नाम या पूरे नेटवर्क की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल जांच के इस हिस्से को आगे की कार्रवाई के लिए खुला माना जा रहा है।
दो मोबाइल, आधार और पैन कार्ड बरामद
गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सामान भी मिला है। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन और पहचान संबंधी दस्तावेज जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन उपकरणों से संपर्क, डिजिटल गतिविधियों और लेन-देन से जुड़े संभावित साक्ष्य की जांच की जा सकती है।
STF ने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपी के अन्य आपराधिक इतिहास का पता लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि उसका किसी अन्य आपराधिक मामले या साइबर अपराध से जुड़ा कोई पुराना संबंध रहा है या नहीं।

अंतरराज्यीय समन्वय से कार्रवाई
इस गिरफ्तारी में बिहार और ओडिशा की पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। कटक में दर्ज मामले की जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर बिहार में आरोपी के ठिकाने की पहचान की गई। इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से STF ने कार्रवाई की।
साइबर अपराध के मामलों में अक्सर आरोपी, बैंक खाते और रकम का प्रवाह अलग-अलग राज्यों में फैला होता है। ऐसे में एक राज्य में दर्ज मामले की जांच दूसरे राज्य तक पहुंच सकती है। प्रभु साह की गिरफ्तारी भी इसी तरह की अंतरराज्यीय जांच का हिस्सा है।
आगे डिजिटल साक्ष्यों की जांच पर नजर
अब जांच एजेंसियों की नजर बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों पर है। इनके आधार पर कथित साइबर ठगी में इस्तेमाल संपर्कों, खातों और लेन-देन की जानकारी जुटाई जा सकती है। साथ ही यह भी जांच का विषय रहेगा कि करीब एक करोड़ रुपये की बताई गई राशि किन खातों में स्थानांतरित हुई और इस प्रक्रिया में आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या रही।
फिलहाल आधिकारिक तौर पर सामने आए तथ्यों के अनुसार प्रभु साह की गिरफ्तारी कटक साइबर क्राइम केस में हुई है और पुलिस उसके अन्य आपराधिक इतिहास की भी जानकारी जुटा रही है। मामले की जांच जारी है।

