सारण में बेमौसम वर्षा और तेज हवा ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बाढ़ की मार से उबरने की कोशिश कर रहे किसानों के सामने अब खेतों में तैयार धान की फसल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। चक्रवाती तूफान अर्णव के प्रभाव और लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में खड़ी धान की फसल खेतों में गिरकर बिछ गई है। कुछ स्थानों पर कटाई के बाद खेत या खुले स्थान में रखी फसल में भी पानी भर गया है। किसानों को आशंका है कि मौसम में जल्द सुधार नहीं हुआ तो दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
100 से 125 मिलीमीटर बारिश का अनुमान
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 26 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच सारण में 100 से 125 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसका असर केवल खरीफ की तैयार फसल तक सीमित नहीं रहने वाला है। लगातार नमी के कारण खरीफ की कटाई का काम प्रभावित हो सकता है और खेतों में जरूरत से अधिक पानी रहने पर रबी फसलों की बुआई भी पीछे खिसक सकती है।
जिला कृषि पदाधिकारी मधुरेन्द्र कुमार सिंह के अनुसार तेज हवा और बारिश से खेत में खड़ी धान की फसल गिरने की स्थिति में अनाज की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हाल में बोई गई दलहन और तिलहन फसलों के बीजों के लिए भी अत्यधिक नमी परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम को देखते हुए खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
इसुआपुर में डेढ़ बीघा धान खेत में गिरा
इसुआपुर प्रखंड में मौसम का असर तैयार धान की फसल पर साफ दिखाई दे रहा है। बजरहियां गांव के किसान विजय राय ने बताया कि उनकी डेढ़ बीघा में लगी धान की फसल तेज हवा और वर्षा के कारण गिर गई। इतना ही नहीं, काटकर रखी गई धान की पथारी में भी पानी भर गया है। किसान को चिंता है कि यदि बारिश और नमी का सिलसिला जारी रहा तो खेत में गिरे धान के दाने अंकुरित होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।

अमनौर में 30 से 40 हेक्टेयर फसल प्रभावित
अमनौर प्रखंड में भी तेज हवा और वर्षा से करीब 30 से 40 हेक्टेयर में लगी धान की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है। ढोलाही कैथल के किसान दिलीप सिंह समेत गुड्डू सिंह, अशोक सिंह, बीटू कुमार और अन्य किसानों ने बताया कि इससे पहले बाढ़ के कारण मक्का और सब्जियों की खेती को नुकसान पहुंचा था। अब बची हुई धान की फसल पर भी मौसम की मार पड़ गई है।
दरियापुर समेत जिले के अन्य इलाकों में भी धान की फसल गिरने की सूचना से किसानों की चिंता बढ़ी है। किसानों के लिए समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक ओर उन्हें तैयार फसल को सुरक्षित करना है, वहीं दूसरी ओर आने वाले रबी मौसम की खेती के लिए खेत तैयार करने की चुनौती है।
कृषि विभाग ने जलनिकासी और फसल सुरक्षा पर दिया जोर
जिला कृषि पदाधिकारी ने किसानों से खेतों में जमा अतिरिक्त पानी निकालने के लिए नालियों की व्यवस्था करने की सलाह दी है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, उन्हें फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखकर ढकने को कहा गया है। इससे बारिश के पानी से कटी हुई फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
कृषि विभाग ने पशुपालकों को भी सतर्क रहने और मवेशियों को बारिश से बचाकर सूखे स्थान पर रखने की सलाह दी है। लगातार मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता खेत में बची फसल को सुरक्षित करना है। इसके बाद ही रबी की बुआई की तैयारी सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।

