नालंदा: चंडी थाना क्षेत्र में हुई लूट की घटना की जांच में बिहार एसटीएफ और नालंदा जिला पुलिस को सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने मामले के प्राथमिकी अभियुक्त विकास कुमार को गिरफ्तार किया है। उसके साथ एक विधि-विरुद्ध बालक को भी निरुद्ध किया गया है। कार्रवाई 29 अक्टूबर 2026 को चंडी थाना क्षेत्र में की गई।
STF की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई चंडी थाना कांड संख्या 640/26 से संबंधित है। मामला 6 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया था और इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(6) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने छापेमारी के बाद विकास कुमार को पकड़ा, जबकि एक नाबालिग को भी अपने संरक्षण में लिया गया।
चंडी लूटकांड में पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, बिहार एसटीएफ की विशेष टीम और नालंदा जिला पुलिस ने मिलकर मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच के क्रम में आरोपियों से संबंधित जानकारी जुटाई गई और उसके बाद चंडी थाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई। विकास कुमार, पिता भूषण प्रसाद, ससौरा जैतपुर, थाना चंडी, जिला नालंदा का निवासी बताया गया है।
29 अक्टूबर को की गई कार्रवाई में विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान एक विधि-विरुद्ध बालक को भी निरुद्ध किया गया। नाबालिग की पहचान और उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत की जाती है। उपलब्ध आधिकारिक सूचना में उसके संबंध में इससे अधिक विवरण जारी नहीं किया गया है।

एक आरोपी पर पहले से दो लूट के मामले
STF के अनुसार, गिरफ्तार विकास कुमार के खिलाफ नालंदा जिले के चंडी थाना में लूट सहित दो मामले दर्ज हैं। यह जानकारी जांच के दौरान सामने आई है। पुलिस अब इन मामलों के बीच संभावित संबंध और आरोपी की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
एक से अधिक मामलों में नाम सामने आने के बाद पुलिस के लिए यह जरूरी हो जाता है कि प्रत्येक घटना में आरोपी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर तय की जाए। इसके लिए पुराने मामलों के रिकॉर्ड, प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों और जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों को देखा जाता है। उपलब्ध STF सूचना में दूसरे मामले का पूरा विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए उसके संबंध में अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
6 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला
आधिकारिक सूचना के मुताबिक, चंडी थाना कांड संख्या 640/26 दिनांक 6 अक्टूबर 2026 से जुड़ा है। इसमें BNS की धारा 309(6) के तहत कार्रवाई की गई है। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले में संदिग्ध गतिविधियों और आरोपियों की पहचान पर काम किया। छापेमारी और गिरफ्तारी इसी जांच का परिणाम बताई गई है।
मामले की प्रकृति को देखते हुए पुलिस के सामने सबसे अहम चुनौती घटना की पूरी कड़ी को स्पष्ट करना है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और वारदात की योजना किस स्तर पर तैयार हुई थी। हालांकि, इन बिंदुओं पर STF ने अभी कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

नाबालिग की भूमिका की भी जांच
संयुक्त कार्रवाई में एक विधि-विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया जाना भी मामले का महत्वपूर्ण पहलू है। पुलिस के लिए अब यह समझना जरूरी होगा कि उसकी कथित भूमिका क्या थी और घटना से उसका संबंध किस स्तर पर था। चूंकि वह नाबालिग है, इसलिए उसके मामले में सामान्य आरोपी की तरह कार्रवाई के बजाय किशोर न्याय से जुड़े कानूनी प्रावधान लागू होंगे।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी में नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि घटना में उसकी भूमिका किस प्रकार की थी। ऐसे में इस संबंध में किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
आगे की जांच में सामने आएंगे और तथ्य
विकास कुमार की गिरफ्तारी के बाद चंडी थाना क्षेत्र के लूटकांड की जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है। पुलिस के सामने घटना से जुड़े अन्य संभावित लोगों की पहचान, पुराने मामलों से संबंध और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करने की प्रक्रिया होगी। STF ने बताया है कि कार्रवाई संयुक्त रूप से की गई और गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ नालंदा जिले के चंडी थाना में दो मामले दर्ज हैं।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि चंडी में दर्ज लूटकांड की जांच में एक नामजद आरोपी गिरफ्तार हुआ है और एक विधि-विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया गया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के आधार पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

