छपरा के मारुति मानस मंदिर में चल रहे श्री हनुमज्जयंती समारोह में भक्ति, आध्यात्मिक चर्चा और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। 59वें ग्यारह दिवसीय वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को मंदिर परिसर में प्रवचन माला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से पहुंचे शक्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शारदा स्वामी शारदानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद से आए वैराग्यानंद जी परमहंस ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। दोनों संतों ने मंदिर के मुख्य पुजारी राघव तिवारी के साथ दीप प्रज्वलित कर प्रवचन माला की शुरुआत की।
हनुमान बाहुक को बताया भक्ति और आत्मबल का माध्यम
प्रवचन के दौरान स्वामी शारदानंद सरस्वती ने हनुमान बाहुक की धार्मिक और आध्यात्मिक महिमा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान हनुमान को संकटमोचन और कलियुग के जाग्रत देवता के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता है। उनके अनुसार हनुमान बाहुक का पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करने की परंपरा व्यक्ति को शारीरिक कष्टों के बीच आत्मबल और आध्यात्मिक संबल प्रदान करने की प्रेरणा देती है।
संत ने हनुमान बाहुक को केवल स्तुति तक सीमित न मानते हुए इसे भगवान हनुमान की आराधना और मनोबल बढ़ाने वाली साधना के रूप में बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से भक्ति, विश्वास और राम नाम के स्मरण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
तुलसीदास की पीड़ा से जुड़ी कथा सुनाई
प्रवचन के दौरान स्वामी शारदानंद सरस्वती ने हनुमान बाहुक की रचना से जुड़ी प्रचलित धार्मिक कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास एक समय अपनी भुजा में असहनीय वात-पीड़ा से परेशान थे और उन्हें फोड़े-फुंसियों की समस्या भी थी। राहत नहीं मिलने पर उन्होंने भगवान बजरंगबली की शरण ली और उनकी स्तुति में 44 छंदों की रचना की। यही रचना आगे चलकर हनुमान बाहुक के नाम से प्रसिद्ध हुई।

संत के अनुसार धार्मिक परंपरा में यह माना जाता है कि हनुमान जी की स्तुति के बाद तुलसीदास को अपनी पीड़ा से राहत मिली। इसी प्रसंग को आधार बनाकर उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि कठिन परिस्थितियों में भक्ति व्यक्ति के भीतर धैर्य और आत्मविश्वास पैदा करने का माध्यम बन सकती है।
सात नवंबर तक चलेगी प्रवचन माला
मारुति मानस मंदिर में आयोजित समारोह के तहत सात नवंबर तक प्रतिदिन दोपहर और शाम प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। आयोजन के अगले चरण में धार्मिक अनुष्ठानों का भी क्रम जारी रहेगा। 30 अक्टूबर से प्रतिदिन हनुमान जी का गोदुग्ध से अभिषेक, सामूहिक रामचरितमानस पाठ और वैदिक हवन किया जाएगा।
सात नवंबर को सहस्रनाम पूजन, राम राज्याभिषेक, दीपमाला और हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी आठ नवंबर की सुबह मंदिर परिसर से हनुमान जी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। समारोह को लेकर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भागीदारी बनी हुई है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
कार्यक्रम में मंदिर के सचिव सतनारायण शर्मा, प्रधान सचिव संगीता सिंह, चंद्रभूषण सिंह, बासुदेव नारायण वर्मा, सरोज सिंह, अनिरुद्ध सिंह, ललित कुमार, रितेश कुमार और रजनीश कुमार समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रवचन के दौरान संतों ने धार्मिक आस्था के साथ राम नाम और हनुमान भक्ति के महत्व पर जोर दिया।

