मुंगेर के जमालपुर में रेलवे सिग्नल सिस्टम से जुड़ी तीन बैटरियों की चोरी का आरपीएफ ने खुलासा किया है। मालदा रेल मंडल के दशरथपुर-जमालपुर रेलखंड पर सिग्नल बाक्स से बैटरियां चोरी किए जाने के मामले में आरपीएफ ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार चोरी की गई बैटरियों को रेलवे पुल के पास एक पुलिया के पानी में छिपाकर रखा गया था। दोनों आरोपितों की निशानदेही पर तीनों बैटरियां बरामद कर ली गई हैं।
सिग्नल बाक्स संख्या 46 को बनाया गया था निशाना
आरपीएफ के मुताबिक दशरथपुर और जमालपुर स्टेशन के बीच बाक्स संख्या 46 से करीब 15 दिन पहले तीन सिग्नल बैटरियां चोरी हुई थीं। घटना के बाद आरपीएफ पोस्ट जमालपुर में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। मामले की जांच एएसआइ मोतीलाल को सौंपी गई थी। जांच के दौरान चोरी की घटना से जुड़े संदिग्धों और संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही थी।
रेलवे सिग्नल व्यवस्था से जुड़ी बैटरियां चोरी होने के कारण मामला केवल रेलवे संपत्ति की चोरी तक सीमित नहीं था। इन उपकरणों का संबंध सिग्नल प्रणाली से होने के कारण घटना ने रेल परिचालन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा की। आरपीएफ ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई।
दशरथपुर स्टेशन के पास शुरू हुई निगरानी
शुक्रवार को सूचना मिलने के बाद एएसआइ मोतीलाल, एसआइ भवेश कुमार, कांस्टेबल अमित रंजन और सीआइबी जमालपुर की टीम ने दशरथपुर स्टेशन के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान दो युवक संदिग्ध स्थिति में घूमते मिले। टीम ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ के क्रम में दोनों ने सिग्नल बैटरियां चोरी करने की बात स्वीकार की।

पूछताछ के आधार पर आरपीएफ टीम दोनों युवकों को उस स्थान तक ले गई, जहां चोरी का सामान छिपाकर रखा गया था। पुलिया के पानी से तीनों बैटरियां बरामद कर ली गईं। इस बरामदगी के बाद जांच टीम ने चोरी की घटना में दोनों की भूमिका को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की।
दोनों आरोपित जमालपुर के रहने वाले
आरपीएफ ने जिन दोनों युवकों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान जमालपुर के छोटी केशोपुर निवासी छोटू कुमार और बिट्टू कुमार के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार दोनों से पूछताछ और बरामदगी की कार्रवाई मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। चोरी की बैटरियों को पानी में छिपाकर रखने की बात सामने आने के बाद जांच टीम ने बरामद सामान को भी केस का अहम साक्ष्य माना है।
आरपीएफ की कार्रवाई में सीआइबी जमालपुर की टीम भी शामिल रही। मामले में जांच अधिकारी एएसआइ मोतीलाल के साथ एसआइ भवेश कुमार और कांस्टेबल अमित रंजन ने निगरानी और पूछताछ की कार्रवाई में हिस्सा लिया।
रेलवे न्यायालय में पेश किए गए आरोपित
सीआइबी इंस्पेक्टर एसके सुधा ने बताया कि दोनों आरोपितों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बरामद तीनों बैटरियों के साथ किऊल स्थित रेलवे न्यायालय में पेश किया गया। आरपीएफ की जांच में अब घटना से जुड़े अन्य पहलुओं को भी देखा जा रहा है।

इस मामले में तीन सिग्नल बैटरियों की बरामदगी से रेलवे संपत्ति चोरी की घटना का एक हिस्सा सामने आया है। वहीं, सिग्नल प्रणाली से जुड़े उपकरणों को निशाना बनाए जाने के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी घटना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरपीएफ की ओर से की गई कार्रवाई के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ऐसे मामलों में निगरानी और जांच की भूमिका एक बार फिर सामने आई है।
