Sleep Problems: अगर आपकी नींद रात में बार-बार खुल जाती है और आंख खुलने के बाद दोबारा सोना मुश्किल हो जाता है, तो इसे केवल थकान या आदत मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कभी-कभी खराब स्लीप शेड्यूल, तनाव, अनिद्रा (Insomnia) या स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) जैसी समस्याएं भी रात की नींद को प्रभावित कर सकती हैं।
कई लोगों को रात में एक-दो बार नींद खुलना सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर यह लगातार होने लगे, सुबह उठने के बाद भी थकान रहे या दिनभर चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो इसके पीछे की वजह समझना जरूरी है।
रात में अचानक नींद खुलने की क्या वजह हो सकती है?
रात में नींद टूटने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव और चिंता प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दिनभर किसी बात को लेकर परेशान रहने पर दिमाग रात में भी सक्रिय रह सकता है, जिससे नींद बार-बार टूट सकती है।
इसके अलावा सोने की जगह असहज होना, गलत तकिया या गद्दा, अनियमित सोने-जागने का समय और सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल भी नींद की गुणवत्ता प्रभावित कर सकता है।
बार-बार नींद खुलना कहीं Insomnia तो नहीं?
Insomnia यानी अनिद्रा में व्यक्ति को सोने में परेशानी हो सकती है या रात में नींद खुलने के बाद दोबारा नींद नहीं आती। कुछ लोगों की नींद सुबह सामान्य समय से पहले खुल जाती है, जबकि कुछ लोग पूरी रात ठीक से सो नहीं पाते।
इसका असर केवल रात तक सीमित नहीं रहता। नींद पूरी न होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और काम पर ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है।
अगर यह समस्या कभी-कभार हो रही है तो इसका कारण तनाव या दिनचर्या में बदलाव भी हो सकता है। लेकिन समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
खर्राटे और सांस रुकने के साथ नींद टूटे तो रहें सावधान
रात में बार-बार नींद खुलने का एक और कारण Sleep Apnea हो सकता है। इसमें सोते समय सांस रुकने जैसी स्थिति बन सकती है। तेज खर्राटे, नींद में घुटन महसूस होना या अचानक हड़बड़ाकर उठना इसके संभावित संकेतों में शामिल हैं।
कई बार व्यक्ति को खुद पता भी नहीं चलता कि सोते समय उसकी सांस में रुकावट आ रही है और परिवार के सदस्य इसे नोटिस करते हैं।
ऐसे लक्षण बार-बार दिखाई दें तो इसे सामान्य खर्राटे समझकर छोड़ने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
अच्छी नींद के लिए सबसे पहले ठीक करें Sleep Schedule
नींद को बेहतर बनाने के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है एक नियमित Sleep Schedule बनाना। कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह भी तय समय के आसपास उठें।
सोने और जागने का समय लगातार बदलता रहने से शरीर की नींद-जागने की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। इसलिए छुट्टी वाले दिन भी समय में बहुत ज्यादा बदलाव न करना बेहतर आदत हो सकती है।
सोने से पहले मोबाइल चलाना कम करें
बिस्तर पर जाने के बाद लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या दूसरे गैजेट इस्तेमाल करने की आदत भी नींद के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। ABP की रिपोर्ट में भी सोने से पहले गैजेट का इस्तेमाल सीमित करने की सलाह दी गई है।
इसके बदले सोने से पहले किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना या कोई शांत गतिविधि करना मददगार हो सकता है।
तकिया और गद्दा भी कर सकता है नींद खराब
अगर आपका बिस्तर आरामदायक नहीं है तो शरीर को रातभर सही स्थिति में रहने में परेशानी हो सकती है। बहुत ऊंचा या बहुत नीचा तकिया और असुविधाजनक गद्दा भी नींद में खलल डाल सकता है।
इसलिए सोने की जगह ऐसी होनी चाहिए जहां शरीर को आराम मिले और बार-बार करवट बदलने की जरूरत न पड़े।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर रात में नींद टूटने की समस्या लगातार बनी हुई है, सुबह उठने के बाद भी पर्याप्त आराम महसूस नहीं होता या दिनभर अत्यधिक थकान और चिड़चिड़ापन रहता है, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है।
खासकर तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकना, घुटन के साथ जागना या बार-बार नींद टूटना जैसे लक्षण दिखाई दें तो Sleep Apnea जैसी समस्या की जांच जरूरी हो सकती है।
जरूरी बात
हर बार रात में नींद खुलना किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। तनाव, कमरे का माहौल, सोने की स्थिति या दिनचर्या में बदलाव भी इसका कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर समस्या लगातार हो रही है या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगी है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।