किशनगंज: रोजगार की उम्मीद लेकर मलेशिया पहुंचे किशनगंज और पूर्णिया के कई युवाओं के कथित तौर पर फंसने का मामला सामने आया है। इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक मलेशिया के जंगल में छिपकर रहने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।
युवकों का कहना है कि उनके पास न तो रोजगार है, न पर्याप्त पैसे और न ही वैध दस्तावेज होने की स्थिति स्पष्ट है। पुलिस और इमिग्रेशन की कार्रवाई के डर से वे जंगल में छिपकर दिन गुजारने को मजबूर हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद किशनगंज और पूर्णिया के उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिनके बच्चे रोजगार की तलाश में एजेंटों के माध्यम से मलेशिया गए थे। परिजनों का दावा है कि कई युवाओं की स्थिति बेहद मुश्किल है और उन्हें खाने-पीने तक के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कजलामनी के चार युवाओं के फंसे होने की जानकारी
कोचाधामन प्रखंड के कजलामनी गांव के चार युवाओं के मलेशिया में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। परिजनों के अनुसार, बड़ा तनवीर आलम और ओवैद आलम को इमिग्रेशन और पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद जेल भेजा गया है। वहीं छोटा तनवीर आलम और रूखसेद गिरफ्तारी से बचने के लिए जंगल में छिपे हुए हैं।
परिजनों का कहना है कि जंगल में रहने वाले युवाओं से कभी-कभार मोबाइल के माध्यम से संपर्क हो पाता है। बातचीत के दौरान वे अपनी परेशानी बताते हैं। कुछ युवाओं के घायल और बीमार होने की बात भी परिजनों ने कही है। उनका कहना है कि इलाज के लिए अस्पताल जाने में भी गिरफ्तारी का डर बना हुआ है।
हालांकि, मलेशिया में इन युवाओं की मौजूदा स्थिति और गिरफ्तारियों से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
एजेंट पर आठ लाख रुपये लेने का आरोप
चारों युवाओं के स्वजनों ने नाहिद गनी नामक एजेंट पर प्रत्येक युवक से दो-दो लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। परिवारों के मुताबिक, चार युवाओं से कुल आठ लाख रुपये लेकर उन्हें रोजगार के लिए मलेशिया भेजा गया था।
परिजनों का कहना है कि विदेश में नौकरी मिलने की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमा-पूंजी खर्च की और जरूरत पड़ने पर कर्ज भी लिया। लेकिन मलेशिया पहुंचने के बाद युवाओं को कथित तौर पर न तो अपेक्षित रोजगार मिला और न ही रहने-खाने की समुचित व्यवस्था हो सकी।
अब परिवारों के सामने एक ओर अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी की चिंता है, वहीं दूसरी ओर विदेश भेजने के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने का दबाव भी है।
पहले भी करीब 40 युवाओं की गिरफ्तारी का वीडियो आया था
इससे पहले इंटरनेट मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में किशनगंज और पूर्णिया के करीब 40 युवाओं को मलेशिया पुलिस द्वारा पकड़े जाने का दावा किया गया था। वीडियो में कुछ युवाओं को पुलिस वाहन में ले जाते हुए दिखाया गया था।
अब जंगल में छिपे युवाओं से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद इस पूरे मामले को लेकर परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि सीमांचल क्षेत्र के कई युवा एजेंटों के माध्यम से रोजगार की तलाश में मलेशिया गए हैं।
पूर्व विधायक ने परिजनों से की मुलाकात
मामले की जानकारी मिलने के बाद कोचाधामन के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम कजलामनी गांव पहुंचे। उन्होंने मलेशिया में फंसे बताए जा रहे चार युवाओं के स्वजनों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
परिजनों ने युवाओं की मौजूदा स्थिति से उन्हें अवगत कराया और उनकी सुरक्षित वापसी में मदद की अपील की। पूर्व विधायक ने परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए कहा कि युवाओं की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक स्तर पर प्रयास किया जाएगा।
इस दौरान मुखिया अबु नसर, सरपंच दिलीप यादव, सरपंच जाहिद हुसैन समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
सांसद ने एसपी से की मुलाकात, एजेंटों पर कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर किशनगंज सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार से मुलाकात की। उन्होंने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये लेने वाले एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका की गंभीरता से जांच कराने की मांग की।
सांसद ने कहा कि यदि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर संगठित तरीके से लोगों के साथ ठगी की जा रही है तो पीड़ितों की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोषियों तक पहुंचने और ऐसे मामलों की जांच की जरूरत बताई, ताकि दूसरे युवा भी इस तरह के जाल में फंसने से बच सकें।
भारत सरकार और भारतीय मिशन से हस्तक्षेप की मांग
मलेशिया में फंसे बताए जा रहे युवाओं के स्वजनों ने भारत सरकार और मलेशिया स्थित भारतीय मिशन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। परिजनों का कहना है कि सबसे पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि मलेशिया में किशनगंज और पूर्णिया के कितने युवा फंसे हुए हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।
परिजनों ने जंगल में छिपे युवाओं के लिए सुरक्षित व्यवस्था, भोजन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा दस्तावेज या वीजा से जुड़ी समस्या वाले युवाओं को आवश्यक कानूनी सहायता दिलाने की मांग की है।
परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके बच्चे विदेश में कथित तौर पर असुरक्षित परिस्थितियों में हैं और उनसे लगातार संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वे सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर युवाओं की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित कराने की गुहार लगा रहे हैं।