पश्चिम बंगाल सरकार की प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति-2026 में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले उद्योगों के लिए विशेष आर्थिक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति के मसौदे के मुताबिक, पात्र सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के मामले में नियोक्ता की ओर से जमा कराए जाने वाले कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) अंशदान की पूरी राशि वापस की जाएगी। पुरुष कर्मचारियों के लिए नियोक्ता के अंशदान का 50 प्रतिशत लौटाने का प्रस्ताव है। दोनों श्रेणियों में यह सुविधा 10 वर्षों तक देने की बात कही गई है।
नई औद्योगिक नीति में रोजगार आधारित प्रोत्साहन
राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने के साथ उद्योगों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित औद्योगिक नीति-2026 इसी दिशा में तैयार की जा रही है। मसौदे में कंपनियों को नई नियुक्तियां करने के लिए आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था रखी गई है। इसमें महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों की नियुक्ति को विशेष प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों की नियुक्ति लागत कम करना और रोजगार में इन वर्गों की भागीदारी बढ़ाना है।
मसौदे के अनुसार, पात्र एमएसएमई इकाइयों को महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए नियोक्ता के ईपीएफ अंशदान का 100 फीसदी वापस मिलेगा। वहीं पुरुष कर्मचारियों के लिए यह प्रतिपूर्ति 50 फीसदी प्रस्तावित है। यह सहायता 10 साल तक दी जा सकती है। इस प्रावधान से कंपनियों को कर्मचारियों के वेतन के अलावा भविष्य निधि में अपनी ओर से जमा की जाने वाली राशि का कुछ या पूरा हिस्सा वापस मिलने का अवसर होगा।
कर्मचारी के हिस्से पर नहीं, नियोक्ता के अंशदान पर लाभ
इस प्रस्ताव को समझने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार की ओर से प्रस्तावित भरपाई कर्मचारी के वेतन या कर्मचारी के व्यक्तिगत पीएफ अंशदान पर नहीं है। मसौदे में नियोक्ता की ओर से जमा कराए जाने वाले ईपीएफ अंशदान की प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के मामले में नियोक्ता का पूरा पात्र अंशदान और पुरुष कर्मचारियों के मामले में उसका आधा हिस्सा लौटाने का प्रस्ताव है।

इससे पात्र उद्योगों की नियमित रोजगार लागत में कमी आ सकती है। खासकर छोटे उद्यमों के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखना वित्तीय योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। सरकार का मानना है कि पीएफ अंशदान की भरपाई से उद्योग नई नियुक्तियों के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता, दस्तावेज और अन्य शर्तें अंतिम नीति में स्पष्ट होंगी।
एमएसएमई को सालाना पांच करोड़ रुपये तक की सीमा
मसौदे में छोटे उद्योगों के लिए प्रतिपूर्ति की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की गई है। प्रत्येक पात्र एमएसएमई इकाई को एक वित्त वर्ष में अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक की ईपीएफ राशि की भरपाई मिल सकेगी। इस सीमा के जरिए सरकार ने सहायता को एक निर्धारित वित्तीय दायरे में रखने का प्रस्ताव किया है।
छोटे उद्योगों को रोजगार सृजन के साथ उत्पादन और बाजार की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियुक्ति से जुड़ी लागत में राहत मिलने पर नई भर्तियों का निर्णय आसान हो सकता है। हालांकि, पांच करोड़ रुपये की सीमा और प्रतिपूर्ति की वास्तविक गणना किन नियमों के आधार पर होगी, इसका विस्तृत विवरण मसौदे के उपलब्ध अंश में नहीं दिया गया है।
बड़े और मेगा उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था
प्रस्तावित नीति में बड़े उद्योगों, रणनीतिक परियोजनाओं और मेगा परियोजनाओं को भी ईपीएफ प्रतिपूर्ति देने की बात है। इस श्रेणी में नियोक्ता के ईपीएफ अंशदान का अधिकतम 50 फीसदी पांच वर्षों तक लौटाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए रोजगार सृजन की न्यूनतम शर्तें तय की गई हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कम से कम 200 लोगों और अन्य क्षेत्रों में न्यूनतम 400 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देना जरूरी होगा।

इस श्रेणी में प्रत्येक पात्र इकाई को एक वित्त वर्ष में अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। बड़े उद्योगों के लिए उपलब्ध प्रस्ताव में महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए 100 फीसदी प्रतिपूर्ति की अलग व्यवस्था का उल्लेख नहीं है। इसलिए एमएसएमई और बड़े उद्योगों के प्रावधानों को अलग-अलग समझना होगा।
तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए भी अनुदान
नई औद्योगिक नीति में रोजगार प्रोत्साहन के अलावा उद्योगों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए सहायता देने का प्रस्ताव है। पात्र एमएसएमई को तकनीकी उन्नयन पर होने वाले स्वीकृत खर्च का अधिकतम 50 फीसदी अनुदान मिल सकता है। इसकी अधिकतम सीमा प्रति इकाई 50 लाख रुपये प्रस्तावित है।
इसमें रोबोटिक्स, उत्पादन से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से उत्पादों की गुणवत्ता जांचने जैसी तकनीकें शामिल की गई हैं। सामान्य मशीनों को बदलने या नियमित सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन पर होने वाला खर्च इस सहायता के दायरे में नहीं आएगा।
अंतिम नीति के बाद स्पष्ट होंगी शर्तें
प्रस्तावित प्रावधानों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार उद्योगों में निवेश और रोजगार दोनों को बढ़ावा देना चाहती है। महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों की नियुक्ति पर अधिक प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव रोजगार में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने की कोशिश है। वहीं बड़े उद्योगों के लिए रोजगार की न्यूनतम सीमा तय कर सहायता को प्रत्यक्ष नियुक्तियों से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

फिलहाल ये प्रावधान औद्योगिक नीति के मसौदे का हिस्सा हैं। अंतिम नीति में क्या बदलाव होंगे, किन उद्योगों को पात्र माना जाएगा और प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी, यह आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए प्रस्तावित सहायता को अभी लागू योजना या उपलब्ध लाभ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
