कोलकाता के रविंद्र सरोवर में छठ पूजा दोबारा आयोजित कराने की संभावना पर पश्चिम बंगाल सरकार विचार कर रही है। शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने संकेत दिया है कि स्थानीय श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए सरकार इस दिशा में पहल करना चाहती है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि किसी भी निर्णय में सरोवर के पर्यावरण और प्राकृतिक व्यवस्था की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर राज्य सरकार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से बातचीत करने की तैयारी में है।
स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का दिया हवाला
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि रविंद्र सरोवर में पहले छठ पूजा की अनुमति नहीं दी जाती थी, लेकिन अब सरकार इस विषय पर विचार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्थानीय श्रद्धालु छठ पूजा कहां करेंगे और उनकी धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उनके बयान से यह संकेत मिला है कि नई सरकार सरोवर में पूजा की वापसी के विकल्प तलाशना चाहती है।
मंत्री ने इससे कुछ दिन पहले रविंद्र सरोवर के पानी को शुद्ध करने की योजना का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि पानी को इस स्तर तक परिशोधित करने का प्रयास होगा कि उसे गिलास में भरकर पिया जा सके। अब इसी सरोवर में छठ पूजा फिर शुरू कराने की संभावना पर बयान आने के बाद पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आयोजन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाने की शर्त
अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि पूजा की अनुमति देने का अर्थ पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करना नहीं होगा। सरकार की प्राथमिकता सरोवर की प्राकृतिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना है। मंत्री के अनुसार, पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासनिक व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन परिसर में गंदगी जमा होने या पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पूजा के समय प्रशासनिक कर्मचारी निगरानी के लिए तैनात रहेंगे। इसके अलावा पूजा समितियों और श्रद्धालुओं के परिवारों से जुड़े स्वयंसेवक भी सफाई व्यवस्था में सहयोग करेंगे। पूजा संपन्न होने के बाद पूजन सामग्री और अन्य सामान को वहां से हटाने की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ सरोवर की स्वच्छता बनाए रखना है।
मंत्री ने छठ पूजा की प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रद्धालु मुख्य रूप से जल में उतरकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं और दीप जलाते हैं। उनके मुताबिक, यदि उचित व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित की जाए तो पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए आयोजन की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
एनजीटी के पुराने निर्देश सबसे बड़ी चुनौती
रविंद्र सरोवर में छठ पूजा की वापसी के रास्ते में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के पुराने निर्देश अहम हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अधिकरण ने पहले सरोवर में छठ पूजा पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन राज्य सरकार ने इन्हीं निर्देशों के आधार पर यहां पूजा की अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में राज्य सरकार के सामने केवल प्रशासनिक फैसला लेने का प्रश्न नहीं है, बल्कि न्यायिक और पर्यावरणीय निर्देशों के अनुरूप समाधान तलाशने की चुनौती भी है।
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि राज्य सरकार एनजीटी से बातचीत करेगी। उनका मानना है कि चर्चा के जरिए कोई रास्ता निकल सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि रविंद्र सरोवर में छठ पूजा फिर से शुरू हो। हालांकि, बातचीत का स्वरूप, समय और एनजीटी की ओर से संभावित प्रतिक्रिया के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

पहले छठ पूजा पर रोक को लेकर रहा राजनीतिक विवाद
रविंद्र सरोवर में छठ पूजा पर रोक का मुद्दा पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक विवाद का विषय रहा था। भाजपा ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे हिंदू धार्मिक आयोजनों में बाधा डालने वाला कदम बताया था। दूसरी ओर, तत्कालीन सरकार का तर्क था कि सरोवर के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और एनजीटी के निर्देशों का पालन करने के लिए रोक जरूरी थी।
छठ पूजा के दौरान सरोवर की सुरक्षा के लिए पहले कड़े इंतजाम किए जाते थे। कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) की ओर से प्रवेश द्वारों को टिन और बांस की बैरिकेडिंग से बंद किया जाता था। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती थी। पूजा सामग्री या प्रतिमा लेकर आने वाले वाहनों को भी सरोवर के आसपास की सड़कों तक पहुंचने से रोका जाता था।
अंतिम फैसला पर्यावरणीय शर्तों पर निर्भर
नई सरकार के रुख से रविंद्र सरोवर में छठ पूजा की व्यवस्था में बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हुई है। लेकिन मंत्री के संकेत को अंतिम अनुमति नहीं माना जा सकता। आयोजन की वापसी एनजीटी के निर्देशों, पर्यावरणीय शर्तों और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगी। सरकार की ओर से अभी बातचीत कर समाधान तलाशने की बात कही गई है।
स्थानीय श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सरोवर के पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना इस मामले का केंद्रीय प्रश्न है। यदि सरकार कोई प्रस्ताव तैयार करती है तो उसे संबंधित पर्यावरणीय निर्देशों के अनुरूप होना होगा। फिलहाल अग्निमित्रा पॉल के बयान ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया है और आगे की स्थिति एनजीटी से होने वाली बातचीत के बाद स्पष्ट हो सकेगी।

