पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्तों को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपना रुख साफ कर दिया है। बहरमपुर में बुधवार को उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के विरोध की अपनी राजनीतिक नीति से वह पीछे नहीं हटेंगे। अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में तृणमूल कांग्रेस के कथित अत्याचार और हमलों के कारण बंगाल में कांग्रेस का संगठन कमजोर हुआ और पार्टी के कार्यकर्ताओं को राजनीतिक हिंसा का सामना करना पड़ा।
बहरमपुर में संवाददाता सम्मेलन के दौरान बयान
अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को बहरमपुर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को अपना नेता बताया था। इस घटनाक्रम के बाद बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
ममता बनर्जी के बयान के करीब 72 घंटे बाद अधीर चौधरी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी नेताओं की मुलाकात या बयान से बंगाल में उनका राजनीतिक रुख नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के प्रति उनका विरोध पिछले अनुभवों पर आधारित है और वह इसे वापस लेने के पक्ष में नहीं हैं।
पिछले 15 वर्षों में संगठन कमजोर होने का आरोप
अधीर चौधरी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासन के पिछले 15 वर्षों में बंगाल में कांग्रेस को लगातार राजनीतिक दबाव और हमलों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण पार्टी का संगठन बिखर गया और कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि ये बातें झूठ नहीं हैं और इसी वजह से ममता बनर्जी के प्रति उनका विरोध बना हुआ है।

हालांकि, कांग्रेस नेता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ भविष्य में राजनीतिक संबंधों को लेकर कोई अंतिम बात नहीं कही। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, यह अभी नहीं बताया जा सकता। अखिल भारतीय कांग्रेस नेतृत्व जो निर्णय करेगा, प्रदेश नेतृत्व की भी उसमें भूमिका होगी। उनके मुताबिक, भविष्य की राजनीतिक स्थिति समय आने पर स्पष्ट होगी।
राष्ट्रीय विपक्षी एकता और बंगाल की अलग राजनीतिक स्थिति
राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोध के मुद्दे पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच समय-समय पर नजदीकी के संकेत मिलते रहे हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में दोनों दलों के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। अधीर चौधरी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के मुखर आलोचक रहे हैं। यही विरोध राज्य की राजनीति में कांग्रेस की रणनीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
करीब डेढ़ वर्ष पहले भाजपा विरोध के संदर्भ में अधीर चौधरी के ‘तालाब और नदी’ वाले बयान के बाद यह चर्चा शुरू हुई थी कि क्या वह तृणमूल के प्रति अपना रुख नरम कर रहे हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयान को लेकर उठी अटकलों को समाप्त कर दिया था। बुधवार के संवाददाता सम्मेलन में भी उन्होंने किसी संभावित समझौते या रणनीतिक बदलाव की पुष्टि नहीं की।
चुनावी गठबंधन और बहरमपुर में हार का संदर्भ
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के प्रति अधीर चौधरी का विरोध वर्ष 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों के साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम दलों को साथ लाने की राजनीति का प्रमुख आधार रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में बहरमपुर सीट से अधीर चौधरी को हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने अपनी हार के लिए तृणमूल कांग्रेस पर तीव्र सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराने का आरोप लगाया था।

अधीर का आरोप था कि उन्हें हराने के उद्देश्य से गुजरात से यूसुफ पठान को बहरमपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में भी अधीर चौधरी बहरमपुर से मैदान में उतरे, लेकिन इस बार भी उन्हें हार मिली। इन चुनावी परिणामों के बाद राज्य में कांग्रेस की स्थिति और उसके भविष्य के राजनीतिक विकल्पों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
रामलीला मैदान की तस्वीरों के बाद बढ़ी अटकलें
दिल्ली के रामलीला मैदान में ममता बनर्जी की मौजूदगी और सोनिया गांधी सहित राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस तथा वामपंथी नेताओं के साथ उनकी नजदीकी की तस्वीरों ने बंगाल में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को हवा दी। राज्य में कांग्रेस और वाम दलों के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बताई गई। हालांकि, राष्ट्रीय मंच पर नेताओं की मौजूदगी अपने आप में बंगाल में किसी गठबंधन या सीट समझौते की पुष्टि नहीं करती।
इसी बीच भाजपा नेताओं ने विपक्षी दलों की एकजुटता पर सवाल उठाए। रविवार को राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पाल सहित भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरा था। बुधवार को सिलीगुड़ी से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वाम दलों, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को एक ही राजनीतिक खेमे में रखते हुए निशाना साधा।
अधीर चौधरी ने फिलहाल अपना रुख स्पष्ट रखा
बहरमपुर में दिए गए बयान से अधीर रंजन चौधरी ने यह संकेत दिया कि ममता बनर्जी के प्रति उनका विरोध तत्काल समाप्त होने वाला नहीं है। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले को महत्व देते हुए भविष्य के राजनीतिक संबंधों पर अंतिम टिप्पणी करने से परहेज किया। इससे यह स्पष्ट है कि बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल के बीच किसी संभावित राजनीतिक समझ की स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।

फिलहाल अधीर चौधरी ने अपने पुराने राजनीतिक रुख को दोहराया है। आने वाले समय में कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश इकाई किस तरह की रणनीति अपनाते हैं, इससे राज्य में विपक्षी राजनीति की दिशा तय हो सकती है।
