छठ से पहले काम पर वापस लेने और बकाया भुगतान की मांग; ऐक्टू ने पीएमसीएच अधीक्षक और दो आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की
पटना। पांच महीने की बकाया मजदूरी और न्यूनतम वेतन की मांग उठाने वाले पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के 15 आउटसोर्स वार्ड बॉय और वार्ड गर्ल को काम से हटाए जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई के विरोध में गुरुवार को मजदूरों ने गंगा पथ पर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने हटाए गए सभी कर्मचारियों को दोबारा काम पर रखने, बकाया मजदूरी का भुगतान करने और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
यह प्रदर्शन ऐक्टू से जुड़े आउटसोर्स वर्कर्स यूनियन बिहार के आह्वान पर पीएमसीएच वार्ड अटेंडेंट वर्कर्स संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया। यूनियन का आरोप है कि मजदूरी की मांग करने पर 15 महिला और पुरुष कर्मचारियों को बिना पूर्व सूचना और बकाया भुगतान किए काम से हटा दिया गया। संगठन ने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए पीएमसीएच प्रशासन और आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पांच महीने की मजदूरी बकाया होने का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि पीएमसीएच में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर उचित न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है। इसके साथ ही ओवरटाइम भुगतान, छुट्टी, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), बोनस और ग्रेच्युटी जैसे अधिकारों के पालन में भी अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया गया है।
यूनियन ने पीएमसीएच अधीक्षक और आउटसोर्स एजेंसियों इंटेलिजेंस सिक्योरिटी तथा फ्रंटलाइन के बीच कथित मिलीभगत की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मजदूरों के वेतन और अन्य वैधानिक लाभों से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

छठ से पहले काम पर वापस लेने की चेतावनी
प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू बिहार के राज्य महासचिव और आउटसोर्स वर्कर्स यूनियन बिहार के संयोजक रणविजय कुमार ने किया। उनके साथ संघर्ष मोर्चा के विकास कुमार, मानस्वी कुमारी और दिगंबर ठाकुर सहित अन्य लोग मौजूद रहे। रेल और ऐक्टू नेता जितेंद्र कुमार, इनौस (आरवाईए) के सचिव विनय कुमार, आइसा नेता विकास कुमार तथा ऐक्टू नेता राजकुमार उर्फ पप्पू शर्मा भी प्रदर्शन में शामिल हुए।
मजदूरों को संबोधित करते हुए रणविजय कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री और श्रम मंत्री पर पीएमसीएच प्रशासन तथा आउटसोर्स एजेंसियों को मजदूरों के अधिकारों के उल्लंघन की खुली छूट देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में श्रम कानूनों का पालन नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरी और अधिकारों की मांग करने वाले कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है।
मांगें नहीं मानी गईं तो धरना और भूख हड़ताल
रणविजय कुमार ने चेतावनी दी कि छठ पर्व से पहले हटाए गए सभी 15 वार्ड बॉय और वार्ड गर्ल को काम पर वापस नहीं लिया गया, तो ऐक्टू और आउटसोर्स वर्कर्स यूनियन बिहार के बैनर तले पीएमसीएच के सामने धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल सहित लगातार आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने आउटसोर्स कर्मचारियों की बकाया मजदूरी का भुगतान, न्यूनतम वेतन और अन्य श्रम अधिकार सुनिश्चित करने के साथ सभी कार्यरत मजदूरों की सेवा नियमित करने की भी मांग उठाई। फिलहाल, इस मामले में पीएमसीएच प्रशासन और संबंधित आउटसोर्स एजेंसियों का पक्ष सामने नहीं आया है।

