अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों के इतिहास में 5 नवंबर की तारीख दो अलग-अलग दौरों की याद दिलाती है। इसी दिन 1912 में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार वुडरो विल्सन ने रिपब्लिकन पार्टी के विभाजन का लाभ उठाते हुए राष्ट्रपति चुनाव जीता और अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति बनने का रास्ता बनाया। इसके 56 वर्ष बाद, 5 नवंबर 1968 को रिपब्लिकन उम्मीदवार रिचर्ड निक्सन ने बेहद उथल-पुथल भरे राजनीतिक माहौल में जीत दर्ज की और अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। दोनों चुनावों ने अमेरिकी राजनीति की दिशा पर गहरा असर डाला, लेकिन उनके पीछे की परिस्थितियां और चुनावी समीकरण एक-दूसरे से काफी अलग थे।
1912 का चुनाव: रिपब्लिकन पार्टी में फूट और विल्सन का उदय
1912 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव उस समय हुआ, जब देश औद्योगिक विस्तार, आर्थिक असमानता, बड़े कारोबारी समूहों के प्रभाव और राजनीतिक सुधारों की मांग जैसे सवालों से जूझ रहा था। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट और पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के बीच मतभेद गहरा गए थे। रूजवेल्ट पार्टी का राष्ट्रपति पद का नामांकन हासिल नहीं कर सके और उन्होंने अलग होकर प्रोग्रेसिव पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस पार्टी को उसके प्रतीक के कारण ‘बुल मूस पार्टी’ भी कहा गया।
रिपब्लिकन खेमे के इस विभाजन ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार वुडरो विल्सन के लिए अवसर पैदा किया। विल्सन उस समय न्यू जर्सी के गवर्नर थे और उन्होंने ‘न्यू फ्रीडम’ नाम से अपना चुनावी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इसमें शुल्कों में कमी, बैंकिंग व्यवस्था में सुधार और बड़े कारोबारी एकाधिकार पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे। वह खुद को राजनीतिक और आर्थिक सुधारों का समर्थक बताते थे।
5 नवंबर 1912: विल्सन की निर्णायक चुनावी जीत
5 नवंबर 1912 को हुए चुनाव में विल्सन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और तत्कालीन राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट तथा प्रोग्रेसिव पार्टी के थियोडोर रूजवेल्ट को पीछे छोड़ दिया। सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार यूजीन वी. डेब्स भी चुनाव मैदान में थे। अमेरिकी चुनावी इतिहास में यह मुकाबला इसलिए खास माना जाता है, क्योंकि एक मौजूदा राष्ट्रपति और एक पूर्व राष्ट्रपति—दोनों को किसी तीसरे उम्मीदवार ने पराजित किया।

नेशनल आर्काइव्स के चुनावी आंकड़ों के अनुसार, विल्सन को 435 इलेक्टोरल वोट मिले, जबकि रूजवेल्ट को 88 और टैफ्ट को केवल 8 वोट मिले। लोकप्रिय मतों में विल्सन को लगभग 41.8 प्रतिशत समर्थन मिला। रूजवेल्ट को करीब 27.4 प्रतिशत और टैफ्ट को लगभग 23.2 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इसका अर्थ यह था कि विल्सन को लोकप्रिय मतों का पूर्ण बहुमत नहीं मिला, लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज में उनकी जीत बहुत बड़ी रही।
विल्सन की जीत को केवल उनके व्यक्तिगत अभियान की सफलता के रूप में नहीं देखा जा सकता। रिपब्लिकन पार्टी के विभाजन ने उसके मतदाताओं को दो प्रमुख उम्मीदवारों के बीच बांट दिया था। इस राजनीतिक परिस्थिति ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
विल्सन का राष्ट्रपति कार्यकाल और ऐतिहासिक विरासत
वुडरो विल्सन ने 4 मार्च 1913 को अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्होंने 1916 में दोबारा चुनाव जीता और 1921 तक राष्ट्रपति पद पर रहे। उनके कार्यकाल में बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण बदलाव हुए। फेडरल रिजर्व सिस्टम की स्थापना, फेडरल ट्रेड कमीशन का गठन और एंटीट्रस्ट कानूनों को मजबूत करने वाली पहलें उनके घरेलू राजनीतिक एजेंडे की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विल्सन का कार्यकाल प्रथम विश्व युद्ध से गहराई से प्रभावित रहा। शुरुआत में अमेरिका ने तटस्थता की नीति अपनाई, लेकिन अप्रैल 1917 में जर्मनी के खिलाफ युद्ध में शामिल होने का निर्णय लिया। युद्ध के बाद विल्सन ने अपने ‘फोर्टीन पॉइंट्स’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा राष्ट्र संघ की स्थापना का समर्थन किया। हालांकि, अमेरिकी सीनेट ने वर्साय संधि और राष्ट्र संघ में शामिल होने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। इस तरह उनकी विदेश नीति की विरासत उपलब्धियों और सीमाओं—दोनों से जुड़ी रही।

1968 का चुनाव: युद्ध, सामाजिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल
1912 के चुनाव से अलग, 1968 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव देश के लिए अत्यंत अशांत वर्ष में हुआ। वियतनाम युद्ध के खिलाफ विरोध तेज था और नागरिक अधिकारों को लेकर संघर्ष जारी था। इसी वर्ष नागरिक अधिकार आंदोलन के प्रमुख नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर और डेमोक्रेटिक नेता रॉबर्ट एफ. केनेडी की हत्या ने देश को झकझोर दिया। जून में रॉबर्ट केनेडी की हत्या के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी का चुनावी माहौल और अधिक जटिल हो गया। अगस्त में शिकागो में हुए डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन के दौरान युद्ध-विरोधी प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई भी राष्ट्रीय बहस का विषय बने।
राष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने मार्च 1968 में घोषणा की कि वह दोबारा राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल नहीं होंगे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अंततः उपराष्ट्रपति ह्यूबर्ट हम्फ्री को अपना उम्मीदवार बनाया। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी ने पूर्व उपराष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को उम्मीदवार चुना। अलबामा के पूर्व गवर्नर जॉर्ज वालेस ने अमेरिकन इंडिपेंडेंट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और दक्षिणी राज्यों में अपना मजबूत आधार बनाया।
5 नवंबर 1968: रिचर्ड निक्सन की जीत
5 नवंबर 1968 को हुए राष्ट्रपति चुनाव में रिचर्ड निक्सन ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ह्यूबर्ट हम्फ्री को हराया। अमेरिकी नेशनल आर्काइव्स के आधिकारिक इलेक्टोरल कॉलेज रिकॉर्ड के मुताबिक, निक्सन को 301 इलेक्टोरल वोट मिले, जबकि हम्फ्री को 191 और जॉर्ज वालेस को 46 वोट प्राप्त हुए। इस परिणाम ने निक्सन को अमेरिका का 37वां राष्ट्रपति बनने का जनादेश दिया।
हालांकि इलेक्टोरल कॉलेज में निक्सन की बढ़त स्पष्ट थी, लोकप्रिय मतों में मुकाबला बहुत करीबी रहा। अमेरिकन प्रेसिडेंसी प्रोजेक्ट के संकलित आंकड़ों के अनुसार, निक्सन को लगभग 43.4 प्रतिशत और हम्फ्री को 42.7 प्रतिशत लोकप्रिय मत मिले। वालेस को करीब 13.5 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इस प्रकार निक्सन की जीत लोकप्रिय मतों में बड़े अंतर से नहीं, बल्कि इलेक्टोरल कॉलेज के निर्णायक परिणाम से तय हुई।

निक्सन के अभियान में कानून-व्यवस्था, वियतनाम युद्ध और राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर असंतोष जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने देश में स्थिरता और व्यवस्था बहाल करने का संदेश दिया। दूसरी ओर, हम्फ्री को जॉनसन प्रशासन की युद्ध नीति से जुड़ी नाराजगी और डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर के मतभेदों का सामना करना पड़ा। वालेस की उम्मीदवारी ने चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया, खासकर दक्षिणी राज्यों में।
निक्सन का राष्ट्रपति कार्यकाल: उपलब्धियां और विवाद
रिचर्ड निक्सन ने 20 जनवरी 1969 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली। उनके पहले कार्यकाल में अमेरिका ने चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की। 1972 में उनकी चीन यात्रा शीत युद्ध के दौर की कूटनीति की एक बड़ी घटना बनी। उसी वर्ष सोवियत संघ के साथ सामरिक हथियारों की सीमा तय करने से जुड़ा SALT-I समझौता भी हुआ। वियतनाम युद्ध से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया भी उनके कार्यकाल में आगे बढ़ी, हालांकि युद्ध का अंत उनके पद छोड़ने के बाद 1975 में हुआ।
निक्सन के राष्ट्रपति कार्यकाल पर वाटरगेट कांड की छाया भी पड़ी। 1972 में डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय में हुई सेंधमारी और उसके बाद प्रशासन की भूमिका छिपाने के प्रयासों ने गंभीर संवैधानिक संकट पैदा किया। महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने और पद से हटाए जाने की आशंका के बीच निक्सन ने 9 अगस्त 1974 को इस्तीफा दे दिया। वह अमेरिकी इतिहास के पहले राष्ट्रपति बने जिन्होंने पद से इस्तीफा दिया।
दो चुनाव, दो दौर और अमेरिकी लोकतंत्र की बदलती तस्वीर
1912 और 1968 के राष्ट्रपति चुनावों में एक समानता यह रही कि दोनों में तीसरे उम्मीदवार की मौजूदगी ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया। 1912 में थियोडोर रूजवेल्ट की प्रोग्रेसिव उम्मीदवारी ने रिपब्लिकन पार्टी को बांटा और विल्सन की जीत का रास्ता आसान किया। 1968 में जॉर्ज वालेस की उम्मीदवारी ने दक्षिणी राज्यों में महत्वपूर्ण मत हासिल किए और निक्सन-हम्फ्री मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया।

दोनों चुनाव अमेरिकी राजनीति के अलग-अलग ऐतिहासिक मोड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 1912 का चुनाव प्रगतिशील सुधारों, औद्योगिक अर्थव्यवस्था और पार्टी के भीतर विभाजन के दौर से जुड़ा था। 1968 का चुनाव वियतनाम युद्ध, नागरिक अधिकार संघर्ष, सामाजिक तनाव और राष्ट्रीय नेतृत्व पर उठते सवालों के बीच हुआ। 5 नवंबर की ये दोनों तारीखें बताती हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव केवल उम्मीदवारों की जीत-हार नहीं तय करते, बल्कि देश की नीतियों, राजनीतिक दलों और अंतरराष्ट्रीय भूमिका की दिशा भी प्रभावित करते हैं।
