किशनगंज/वैशाली: ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के मामले की जांच में बिहार एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। STF की विशेष टीम ने वांछित आरोपी राजू कुमार को वैशाली जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। गिरफ्तारी 30 अक्टूबर 2026 को की गई कार्रवाई में हुई।
STF के अनुसार, मामला ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 148/26 से संबंधित है, जो 8 मई 2026 को दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया कि ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में कुछ साइबर अपराधियों ने फिन सपोर्ट माइक्रो फाउंडेशन के नाम पर करीब 200 महिलाओं से चार-चार हजार रुपये की कथित ठगी की थी। इसी मामले में राजू कुमार को वांछित आरोपी के रूप में तलाशा जा रहा था।
ठाकुरगंज साइबर ठगी में आरोपी की गिरफ्तारी
बिहार एसटीएफ की विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए राजू कुमार को वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र में छापेमारी कर गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान पिता अशोक कुमार झा के रूप में हुई है। उसका पता भटंडी पोस्ट धरहरा, थाना सदर हाजीपुर, जिला वैशाली बताया गया है।
STF की कार्रवाई के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और 50 हजार रुपये नकद मिले। डिजिटल उपकरणों की मौजूदगी इस मामले में जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि साइबर ठगी से जुड़े मामलों में मोबाइल और लैपटॉप से संपर्क, ऑनलाइन गतिविधि तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी मिल सकती है। हालांकि, बरामद उपकरणों में क्या-क्या तथ्य मिले हैं, इसकी जानकारी STF की ओर से अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

फिन सपोर्ट माइक्रो फाउंडेशन के नाम पर ठगी का आरोप
STF के अनुसार, ठाकुरगंज थाना क्षेत्र में कुछ साइबर अपराधियों ने फिन सपोर्ट माइक्रो फाउंडेशन के नाम का इस्तेमाल करते हुए करीब 200 महिलाओं से 4,000-4,000 रुपये की धोखाधड़ी की। इस आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। यह भी जांच का विषय है कि कथित ठगी के लिए संगठन के नाम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और रकम को किस माध्यम से लिया गया।
उपलब्ध आधिकारिक सूचना में पीड़ित महिलाओं के नाम या कथित ठगी की कुल राशि का अलग से उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, 200 महिलाओं से चार-चार हजार रुपये की राशि लेने की बात सामने आने से मामले का दायरा व्यापक दिखाई देता है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे लेन-देन की कड़ियों को समझने की कोशिश कर रही हैं।
मई में दर्ज हुआ था मामला
ठाकुरगंज थाना कांड संख्या 148/26 दिनांक 8 मई 2026 का है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(3), 319(2), 318(4), 316(2), 316(5) और 3(5) का उल्लेख है। इसी मामले में राजू कुमार को वांछित बताया गया था। STF ने मामले का सफल उद्भेदन करते हुए गिरफ्तारी की जानकारी दी है।
किसी साइबर अपराध मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण डिजिटल साक्ष्यों की जांच और वित्तीय लेन-देन का मिलान होता है। इस मामले में बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन के साथ नकद राशि भी जांच के दायरे में रहेगी। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि कथित ठगी के दौरान आरोपी की भूमिका क्या थी और उससे कौन-कौन लोग जुड़े थे।

वैशाली से किशनगंज तक पहुंची जांच
इस मामले का भौगोलिक दायरा भी जांच के लिए महत्वपूर्ण है। घटना का थाना क्षेत्र किशनगंज जिले का ठाकुरगंज है, जबकि वांछित आरोपी वैशाली जिले में मिला। STF की टीम ने दूसरे जिले में जाकर छापेमारी की और आरोपी को पकड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि जांच के दौरान आरोपी की तलाश उसके स्थानीय पते से आगे बढ़कर संभावित ठिकानों तक की गई।
साइबर अपराध में आरोपियों के अलग-अलग जिलों में मौजूद होने की वजह से जांच एजेंसियों को स्थानीय पुलिस के सहयोग के साथ काम करना पड़ता है। इस कार्रवाई में भी STF ने इसी तरह की कार्रवाई करते हुए राजू कुमार को गिरफ्तार किया।
आगे डिजिटल और वित्तीय कड़ियों की जांच
राजू कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब कथित ठगी से जुड़े डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों को जोड़ने की चुनौती होगी। बरामद मोबाइल और लैपटॉप की जांच से कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। साथ ही 50 हजार रुपये नकद की बरामदगी को भी मामले के संदर्भ में जांचा जाएगा।
STF ने बताया है कि गिरफ्तार आरोपी के अन्य आपराधिक इतिहास के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल आधिकारिक सूचना के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ठाकुरगंज साइबर ठगी मामले में वांछित राजू कुमार को वैशाली से गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका को लेकर अभी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

