नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर सक्रिय स्वतंत्र भारद्वाज जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट के मामले में तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से बाहर आ गए हैं। पटियाला हाउस कोर्ट ने 15 सितंबर को उन्हें अंतरिम राहत दी थी। इसके बाद जमानतदार की पुष्टि होने पर रिहाई का आदेश जारी किया गया और 17 सितंबर की देर रात उन्हें जेल से रिहा किया गया।
छात्र के पिता से कथित मारपीट के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। अदालत ने अंतरिम जमानत देते समय कई शर्तें भी लगाई हैं। इनमें शिकायतकर्ता, उसकी नाबालिग बेटी, परिवार के सदस्यों और अभियोजन पक्ष के गवाहों से संपर्क नहीं करने तथा मामले से संबंधित सामग्री को सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने की शर्त शामिल है।
रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में भारद्वाज तिहाड़ जेल के बाहर इंतजार कर रही कार की ओर जाते और वहां से निकलते दिखाई दिए। मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होनी है, जब नियमित जमानत से संबंधित आवेदन पर आगे सुनवाई होगी।
कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?
स्वतंत्र भारद्वाज सोशल मीडिया पर सक्रिय कंटेंट क्रिएटर हैं। वह खुद को हिंदुत्व से जुड़े विचारों के साथ पेश करते रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में उनका एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा में आया, जिसमें जंतर-मंतर की घटना से संबंधित उनके कथित बयानों को लेकर विवाद हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार, इस इंटरव्यू में उन्होंने संजय आजाद के साथ हुई कथित झड़प का जिक्र किया था। इसके बाद मामले में उनकी भूमिका और उनके बयानों को लेकर पुलिस कार्रवाई तथा अदालत में सुनवाई का सिलसिला आगे बढ़ा।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है। भारद्वाज की ओर से उनके वकील ने आरोपों को चुनौती दी है। बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि शिकायतकर्ता की ओर से पहले हमला किया गया था और भारद्वाज ने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी।
आखिर क्या हुआ था जंतर-मंतर पर?
मामला 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा बताया गया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से संबंधित था। पुलिस के अनुसार, संजय आजाद भी अपनी बेटी के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे।
FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक, वीडियो बनाने को लेकर विवाद शुरू हुआ और इसके बाद मामला बहस तथा कथित मारपीट तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें चोट लगी।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने घटना को लेकर अलग दावा किया है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें रखी गई हैं और मामले से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ा विवाद
मामला बाद में तब और चर्चा में आया जब स्वतंत्र भारद्वाज से संबंधित एक इंटरव्यू वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में जंतर-मंतर की घटना को लेकर उनके कथित बयान सामने आए थे।
इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से कार्रवाई की मांग की गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग आरोपों और FIR से संबंधित तथ्यों को भी अदालत के सामने रखा।
मामले में SC/ST Act और POCSO Act से संबंधित प्रावधानों का भी उल्लेख हुआ है। हालांकि इन आरोपों और संबंधित मामलों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है।
बेटी ने ऑनलाइन धमकी के आरोप लगाए
घटना के बाद संजय आजाद की बेटी निशु आजाद ने सोशल मीडिया के माध्यम से मदद की अपील की थी। उसने ऑनलाइन गाली-गलौज, धमकी और अपनी तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक छेड़छाड़ किए जाने के आरोप लगाए।
इसके बाद मामले में अतिरिक्त कानूनी धाराओं और अलग FIR से संबंधित जानकारी भी सामने आई। इन आरोपों की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और इन पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
गिरफ्तारी की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन
स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सितंबर की शुरुआत में प्रदर्शन भी हुआ। इसके बाद पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया और दिल्ली लाया गया। अदालत की कार्यवाही के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
बाद में उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाई गई। इसके बाद बचाव पक्ष ने अदालत में अंतरिम जमानत की मांग की।
15 सितंबर को कोर्ट ने दी तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत
पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और आरोपों को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता की भूमिका को लेकर भी दलीलें रखीं। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत का विरोध किया और मामले में दर्ज विभिन्न FIR तथा अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया।
15 सितंबर 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर की अदालत ने स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।
इसके बाद जमानतदार की पुष्टि होने पर रिहाई वारंट जारी किया गया और 17 सितंबर की देर रात उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।
जमानत मिली, लेकिन कोर्ट ने लगाईं कई शर्तें
अंतरिम जमानत का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मामले में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
अदालत ने भारद्वाज को शिकायतकर्ता, उसकी नाबालिग बेटी, परिवार के सदस्यों और अभियोजन पक्ष के गवाहों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा उन्हें मामले से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, रील, इंटरव्यू या सार्वजनिक बयान जारी करने से भी रोका गया है। अदालत ने अंतरिम जमानत की अवधि में उनके आचरण पर नजर रखने और आगे की सुनवाई के दौरान इसका संज्ञान लेने की बात कही है।
पूरा मामला एक नजर में
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 23 जून 2026 | जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित मारपीट की घटना |
| बाद में | संजय आजाद की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई शुरू |
| सितंबर की शुरुआत | भारद्वाज से संबंधित इंटरव्यू वीडियो चर्चा में आया |
| सितंबर 2026 | पुलिस ने भारद्वाज को हिरासत में लेकर दिल्ली लाया |
| 15 सितंबर | पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी |
| 17 सितंबर | तिहाड़ जेल से देर रात रिहाई |
| 6 अक्टूबर 2026 | नियमित जमानत से संबंधित अगली सुनवाई |
अब आगे क्या होगा?
स्वतंत्र भारद्वाज फिलहाल तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर हैं। हालांकि जंतर-मंतर से जुड़े कथित मारपीट मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है।
अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों का पालन इस अवधि में महत्वपूर्ण रहेगा। 6 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में नियमित जमानत से संबंधित मामले पर आगे की कार्रवाई होगी।
मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत की आगे की कार्यवाही के आधार पर होगा।