मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा जिले में स्थित प्रसिद्ध बाबा सिंहेश्वरनाथ मंदिर परिसर में गुरुवार की अलसुबह शादी समारोह के दौरान बड़ा हादसा होते-होते टल गया। करीब 3:45 बजे पटाखे की चिंगारी से मंदिर परिसर में बने विशाल पंडाल में आग लग गई। देखते ही देखते पंडाल का करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा जलकर राख हो गया। आग लगने के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही सिंहेश्वर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सहरसा जिले के पतरघट निवासी दूल्हे प्रवीन कुमार समेत वर पक्ष के तीन लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले गई।
शादी समारोह के दौरान पटाखे से लगी आग
जानकारी के मुताबिक, मंदिर परिसर में शादी समारोह चल रहा था। दूल्हा-दुल्हन के रिश्तेदारों और दोस्तों की ओर से 60 शॉट वाला स्काई पटाखा छोड़ा गया था। पटाखा आसमान में जाकर चिंगारियां बिखेरता है। इसी दौरान एक चिंगारी मंदिर परिसर में बने विशाल पंडाल पर जा गिरी।
चिंगारी गिरते ही पंडाल के एक हिस्से में आग भड़क उठी। कुछ ही देर में आग तेजी से फैलने लगी, जिससे वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।
दूल्हे समेत तीन लोगों से पुलिस ने की पूछताछ
घटना की जानकारी मिलने के बाद सिंहेश्वर थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने पतरघट वार्ड नंबर 16 निवासी दूल्हे प्रवीन कुमार समेत तीन लोगों को पूछताछ के लिए थाना ले गई।
दूल्हे प्रवीन कुमार ने पुलिस को बताया कि वह करीब पांच-छह लोगों के साथ मंदिर में शादी की रस्म पूरी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पटाखा किस व्यक्ति ने छोड़ा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
टेंट हाउस कर्मियों और मंदिर गार्डों ने संभाला मोर्चा
आग लगने के बाद उत्तम टेंट हाउस के कर्मचारियों ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया। श्रवण कुमार, राहुल यादव, किश्टो सिंह, अनिल डाक्टर, छोटू कुमार और नितिश कुमार समेत मंदिर के गार्ड दिलीप कुमार और आदर्श कुमार ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।
कर्मचारियों ने CO₂ अग्निशामक के आठ गैस सिलेंडरों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की। उनकी तत्परता से आग को पंडाल के दूसरे हिस्सों और आसपास के क्षेत्र में फैलने से रोकने में मदद मिली।
ऊंचाई के कारण अग्निशमन टीम को हुई परेशानी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। हालांकि, पंडाल काफी ऊंचा होने के कारण पानी की धार वहां तक पहुंचाने में परेशानी हुई।
बताया गया कि अग्निशमन कर्मियों को पाइप लेकर बांस के सहारे ऊपर चढ़ने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद टेंट हाउस के कर्मचारियों ने खुद बांस पर चढ़कर पानी डाला और आग को पूरी तरह बुझाने का प्रयास किया। यह सुनिश्चित किया गया कि पंडाल में आग की कोई चिंगारी बाकी न रह जाए।
समय रहते आग पर पाया गया काबू, टला बड़ा हादसा
गौरतलब है कि सावन-भादो के दौरान मंदिर परिसर में आमतौर पर अग्निशमन की गाड़ियां तैनात रहती हैं। हालांकि, घटना के समय अग्निशमन वाहन मंदिर परिसर में मौजूद नहीं था।
ऐसे में टेंट हाउस कर्मचारियों और मंदिर के गार्डों की तत्परता से आग को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। अगर आग पंडाल के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और पटाखा किसकी ओर से छोड़ा गया था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।