पटना, 13 सितंबर 2026: National Consciousness Book: बिहार विधान परिषद् सभागार में रविवार को ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान, पटना के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद् में सत्तारूढ़ दल के उपनेता एवं स्तंभकार प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की पुस्तक का विमोचन हुआ।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुस्तक को राष्ट्रीय चेतना, जनजागरण और वैचारिक विमर्श की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
वक्ताओं ने कहा कि पुस्तक के माध्यम से पाठकों को राष्ट्रहित, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। कार्यक्रम में पुस्तक की विषयवस्तु, लेखन शैली और इसमें शामिल विभिन्न समकालीन एवं वैचारिक आलेखों पर चर्चा हुई।
अवधेश नारायण सिंह ने कहा- पुस्तक राष्ट्र जागरण में करेगी महत्वपूर्ण कार्य
बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें राष्ट्रवादी धारा से जोड़ने में राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ पाठकों को राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर आकर्षित करने का काम करेगी। उनके अनुसार यह पुस्तक राष्ट्र जागरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रविशंकर प्रसाद ने की भाषा-शैली की सराहना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पटना साहिब सांसद रविशंकर प्रसाद ने पुस्तक की भाषा और शैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि कॉमर्स के प्राध्यापक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने गंभीर विषयों को सहज और सरल हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया है।
उनके मुताबिक, सरल भाषा के कारण पुस्तक में उठाए गए गंभीर विषय सामान्य पाठकों के लिए भी आसानी से समझने योग्य बन जाते हैं।
अखंड भारत समेत कई राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि पुस्तक में अखंड भारत की अवधारणा सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों को शामिल किया गया है। उन्होंने पुस्तक को युवाओं के लिए भी उपयोगी बताया।
उन्होंने कहा कि लेखक ने भारत विभाजन की पीड़ा, राजनीति में आए ह्रास और सत्ता प्राप्ति के लिए राजनेताओं द्वारा किए गए असंवैधानिक कार्यों जैसे विषयों पर गंभीरता से लिखा है। मंत्री ने पंजाब में प्रधानमंत्री की गाड़ी रोके जाने से जुड़े प्रसंग पर लिखे आलेख का भी उल्लेख किया।
पुस्तक में 36 आलेख, तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजन
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के मीडिया अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार भगत ने पुस्तक की संरचना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पुस्तक में कुल 36 आलेख शामिल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है।
पहले भाग में समकालीन मुद्दों, दूसरे भाग में वैचारिक विषयों और तीसरे भाग में विमर्श आधारित आलेखों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सभी आलेखों का मूल तत्व राष्ट्रीय चेतना है।
प्रो. भगत के अनुसार राष्ट्रीय चेतना में राष्ट्रहित के प्रति बोध, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और राष्ट्र जागरण जैसे भाव शामिल हैं और यही पुस्तक की केंद्रीय भावना है। उन्होंने पटना की हुंकार रैली और उससे जुड़े आलेख को भी महत्वपूर्ण बताया।
लेखक ने बताई पुस्तक की रचना के पीछे की सोच
वरिष्ठ लेखक राकेश प्रवीर ने कहा कि पुस्तक में तर्क, विश्लेषण और देश एवं जनता के प्रति चिंता दिखाई देती है। उनके अनुसार पुस्तक के विषय समाज, राज्य और देश से जुड़े हुए हैं।
पुस्तक के लेखक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने भी पुस्तक की रचना प्रक्रिया और इसके पीछे की वैचारिक पृष्ठभूमि पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि पुस्तक में समकालीन राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों को तथ्य एवं तर्क के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन बीएचयू के हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने किया। अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रो. अनीता ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवानी ने किया।
कार्यक्रम में बिहार विधानमंडल के अनेक सदस्य, कुलपति, प्राध्यापक, शोधार्थी, साहित्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग और पत्रकार मौजूद रहे। ‘राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली ने किया है।