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Home - देश - राष्ट्रीय बोध और तिरंगा यात्रा

राष्ट्रीय बोध और तिरंगा यात्रा

प्रशांत कुमार
Last updated: अगस्त 12, 2026 10:11 अपराह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 3 महीना पहले
राष्ट्रीय बोध
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तिरंगा महज तीन रंगों का समुच्चय नही है। यह भारत की ताकत, सत्य पथ पर अनवरत आगे बढ़ने और सर्वे भावन्तु: सुखिना के समेकित भाव का गौरव तिलक और स्वाभिमान का प्रतीक है । यह हर भारतीय के दिलों मे लहराते रहता है । यह महज उत्सवी पताका नहीं है। हिमालय की चोटी से गाँव की अमराईयों तक इसके ध्वजवाहक हैं। यह देशभक्ति और राष्ट्रीय भावबोध का परचम है। इसका सम्मान हर भारतीय को करना चाहिए।

राष्ट्र सबका है और तिरंगा हम सबकी शान है। इसके प्रति प्रेम स्वाभाविक होना चाहिए न की उत्सवी। केवल स्वतन्त्रता दिवस, गणतन्त्र दिवस या किसी राष्ट्रीय समारोहों मे फहरा देने मात्र का नहीं है, बल्कि हनुमान की भांति राम को दिल में बसाने की तरह होना चाहिए। राष्ट्रीयता केवल तिरंगा लेकर सड़क पर चलने से पैदा नहीं होती , वह व्यक्ति के भीतर देश संविधान , समाज और उसके लोगों के प्रति अपनत्व और ज़िम्मेदारी से बनती है । अगर कोई व्यक्ति ऐसा नहीं करता और ईमानदारी से कानून का पालन करता है , दूसरे नागरिकों का सम्मान करता है और देश के लिए अपना काम पूरी निष्ठा से करता है तो वह राष्ट्रवादी है। तिरंगा यात्रा के माध्यम से व्यक्ति के अंदर मौजूद राष्ट्रीय भावना को सार्वजनिक , लोकतान्त्रिक और समावेशी रूप मे व्यक्त किया जाता है। इस यात्रा का औचित्य केवल राष्ट्रीयता पैदा करना नही बल्कि राष्ट्रीय भावना की सामूहिक अभिव्यक्ति करना है ।

एक सवाल लोग बार-बार उठा रहे हैं। जो राष्ट्र प्रेम लोगों के मन में है उसे तिरंगा यात्रा के माध्यम से किसी खास स्वरूप में ढालने की कोशिश क्यों ? तिरंगा यात्रा तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के बजाय पूरे समाज की साझा राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बने । तिरंगा यात्रा का औचित्य केवल राष्ट्रीयता जगाने मे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के माध्यम से सामूहिक नागरिक चेतना को अभिव्यक्त करने में है।

राष्ट्रीयता जगायी नही जाती बल्कि वो व्यक्ति और समाज के भीतर विस्तार पाती है , स्वतन्त्रता संग्राम की स्मृतियों, देश के प्रति अपनत्व, संविधान में विश्वास और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन से राष्ट्रीय चेतना पनपती है । इसलिए तिरंगा यात्रा की सार्थकता उसके आकार और भीड़ से नहीं उसके उद्देश्य से होनी चाहिए । आइये ,अपने तिरंगे को सल्युट करें और राष्ट्र के प्रति निष्ठा और सम्मान व्यक्त करते हुए अपने राष्ट्रीय ध्वज को अपने दिल में बसाएँ।

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