कोलकाता। उत्तर बंगाल में लंबे समय से चली आ रही बेहतर और उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की मांग के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने रायगंज में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की दिशा में पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की रायगंज सभा में घोषणा के बाद राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष प्रस्ताव आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है। राज्य सरकार के अनुसार, रायगंज में प्रस्तावित एम्स के लिए करीब 180 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।
राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव पुण्य सलिल श्रीवास्तव को पत्र भेजकर परियोजना पर विचार करने का अनुरोध किया है। पत्र के जरिए राज्य सरकार ने उत्तर बंगाल में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित संस्थान के लिए केंद्र से आगे की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है।
हालांकि, यह परियोजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है। केंद्र सरकार की मंजूरी, जमीन की तकनीकी जांच और परियोजना से जुड़ी अन्य औपचारिकताओं के बाद ही निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठ सकेगा। राज्य सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तकनीकी टीम के संभावित निरीक्षण के दौरान हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है।
रायगंज में एम्स प्रस्ताव पर अब केंद्र की नजर
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रायगंज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर बंगाल के लिए एम्स की जरूरत को प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रायगंज के दिकनगर क्षेत्र में संस्थान के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजेगी। मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण कदम केंद्र सरकार के स्तर पर प्रस्ताव की समीक्षा और उसके बाद तय होने वाली तकनीकी प्रक्रिया है।

राज्य सरकार की ओर से चिह्नित जमीन को परियोजना के मानकों के अनुरूप पाया जाना भी जरूरी होगा। इसके लिए जमीन की स्थिति, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सकती है। इसी वजह से प्रस्ताव के बाद तकनीकी टीम की भूमिका अहम मानी जा रही है।
- प्रस्तावित स्थान: रायगंज का दिकनगर क्षेत्र
- चिह्नित जमीन: करीब 180 एकड़, राज्य सरकार के अनुसार
- अगला चरण: केंद्र सरकार की मंजूरी और तकनीकी मूल्यांकन
- राज्य का रुख: केंद्रीय टीम को आवश्यक सहयोग देने का भरोसा
उत्तर बंगाल के मरीजों के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव
रायगंज में एम्स जैसी संस्था की स्थापना होने पर उत्तर बंगाल के मरीजों को विशेषज्ञ और उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाओं के लिए दूर के बड़े शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज में तृतीयक स्तर की चिकित्सा सुविधा क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर सकती है।
एम्स जैसे संस्थान का प्रभाव केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहता। यहां चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण तथा मेडिकल रिसर्च की संभावनाएं भी विकसित होती हैं। हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक असर संस्थान की मंजूरी, निर्माण, संसाधनों की उपलब्धता और संचालन शुरू होने के बाद ही सामने आएगा।
रायगंज की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए प्रस्तावित संस्थान से उत्तर बंगाल के अलावा आसपास के इलाकों और पड़ोसी क्षेत्रों के मरीजों को भी लाभ मिलने की संभावना पर चर्चा हो रही है। गंभीर उपचार के लिए मरीजों और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होना इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण संभावित फायदा हो सकता है।

कल्याणी में पहले से संचालित है एम्स
पश्चिम बंगाल में एम्स कल्याणी पहले से मौजूद है। ऐसे में रायगंज में एक और एम्स का प्रस्ताव राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में क्षेत्रीय विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण है। रायगंज में एम्स की मांग नई नहीं है। संसद में भी उत्तर बंगाल में एम्स की जरूरत का मुद्दा पहले उठाया जा चुका है। 2024 में रायगंज के सांसद ने लोकसभा में इस मांग का उल्लेख करते हुए कहा था कि क्षेत्र के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है।
रायगंज में एम्स का मुद्दा पहले भी केंद्र और राज्य के बीच चर्चा में रहा है। बाद में पश्चिम बंगाल के लिए एम्स कल्याणी में स्थापित हुआ। अब रायगंज में नए संस्थान का प्रस्ताव सामने आने से उत्तर बंगाल की पुरानी मांग फिर चर्चा में आ गई है।
जलपाईगुड़ी में कैंसर अस्पताल का भी ऐलान
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रायगंज कार्यक्रम में जलपाईगुड़ी में पूर्ण सुविधाओं वाला कैंसर अस्पताल स्थापित करने का भी आश्वासन दिया। इसे उत्तर बंगाल में कैंसर उपचार की सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक अलग पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र के मरीजों को उन्नत कैंसर उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की जरूरत कम करना है।
रायगंज में एम्स और जलपाईगुड़ी में कैंसर अस्पताल की घोषणाओं को उत्तर बंगाल के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के विस्तार की व्यापक योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि दोनों परियोजनाओं की समयसीमा, लागत और निर्माण की शुरुआत को लेकर अंतिम तस्वीर संबंधित मंजूरियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

चुनावी वादे से सरकारी प्रक्रिया तक पहुंचा मुद्दा
उत्तर बंगाल में एम्स स्थापित करने का मुद्दा विधानसभा चुनाव से पहले भी राजनीतिक चर्चा में रहा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र में एम्स और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का वादा किया था। अब राज्य सरकार की ओर से रायगंज में जमीन चिह्नित करने और केंद्र को प्रस्ताव भेजने की पहल के बाद यह मुद्दा राजनीतिक घोषणा से आगे बढ़कर प्रशासनिक प्रक्रिया के चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है और तकनीकी मूल्यांकन के बाद रायगंज की जमीन परियोजना के लिए उपयुक्त पाई जाती है या नहीं। केंद्र की मंजूरी और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही रायगंज एम्स के निर्माण की दिशा में अगला बड़ा कदम संभव होगा।
