खतरनाक घाटों का निरीक्षण करेंगे अधिकारी; अवैध बालू खनन से श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर चिंता, काली पूजा और जगद्धात्री पूजा के लिए भी निगरानी बढ़ाने के निर्देश
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में छठ पूजा समेत आगामी धार्मिक त्योहारों के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि निर्धारित नियमों के तहत किसी भी पर्व के आयोजन में बाधा नहीं डाली जाएगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोजकों को सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा। मुख्यमंत्री ने छठ घाटों की स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन को खतरनाक स्थानों का निरीक्षण करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कदम उठाने होंगे। शहरी क्षेत्रों में पुलिस और नगरपालिकाएं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगी।
अवैध बालू खनन से घाटों की सुरक्षा पर चिंता
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ स्थानों पर अवैध बालू खनन के कारण छठ घाटों की स्थिति खतरनाक हो गई है। ऐसे घाटों पर पानी की गहराई, जमीन की स्थिरता और श्रद्धालुओं के आने-जाने की व्यवस्था की जांच जरूरी है।
छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नदी, तालाब और अन्य जलाशयों के किनारे अर्घ्य देने पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों की सुरक्षा, पर्याप्त रोशनी, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी महत्वपूर्ण होती है। प्रशासन को संभावित जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर समय रहते जरूरी इंतजाम करने होंगे।

काली पूजा, छठ और जगद्धात्री पूजा पर विशेष निगरानी
मुख्यमंत्री ने काली पूजा, छठ पूजा और जगद्धात्री पूजा समेत आगामी त्योहारों की तैयारियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है।
प्रशासन की विशेष नजर उत्तर कोलकाता, नैहाटी, बारासात, तमलुक, चंदननगर, कृष्णनगर, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र जैसे स्थानों पर रहने की बात कही गई है। त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और आपात सेवाओं की उपलब्धता भी अहम होगी।
धार्मिक स्वतंत्रता के साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने दुर्गा पूजा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया, उसी तरह अन्य धार्मिक पर्व भी निर्धारित नियमों के तहत आयोजित किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन को धार्मिक आयोजनों में अनावश्यक बाधा डालने के बजाय सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े नियमों के पालन पर ध्यान देना चाहिए।
इस बीच, छठ घाटों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ आयोजकों की भी होगी। सुरक्षित घाटों की पहचान, खतरनाक स्थलों पर चेतावनी, पर्याप्त पुलिस बल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं त्योहार के दौरान दुर्घटनाओं का जोखिम कम कर सकती हैं।

चुनाव की तारीखों पर आयोग करेगा फैसला
चुनाव की तारीखों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित निर्वाचन आयोग के आयुक्त कृष्ण गुप्ता और शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग के प्रधान सचिव आयोग को आवश्यक जानकारी देंगे। चुनाव की तारीखों और संबंधित प्रक्रिया में लागू दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
आगामी त्योहारों को देखते हुए अब प्रशासन की चुनौती धार्मिक आयोजनों की स्वतंत्रता बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घाटों की समय पर जांच और सुरक्षा निर्देशों के प्रभावी पालन से ही इन तैयारियों का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
