भागलपुर: जिले के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को लंबे समय से एक ही फल दिए जाने की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने व्यवस्था में बदलाव के निर्देश दिए हैं। एक शिक्षक की ओर से 24 अक्टूबर को सहयोग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद जिला शिक्षा विभाग की एमडीएम शाखा ने मामले पर संज्ञान लिया। डीपीओ एमडीएम महेश प्रसाद ने एनजीओ और सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी करते हुए निर्धारित राशि के दायरे में केला, सेब, मौसंबी और अन्य मौसमी फल बदल-बदलकर उपलब्ध कराने को कहा है।
शिकायत में कहा गया था कि कई स्कूलों में बच्चों को लंबे समय से फल के नाम पर मुख्य रूप से केला ही दिया जा रहा है। विभाग के निर्देश के बाद अब व्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि बच्चों को उपलब्ध बजट के भीतर अलग-अलग मौसमी फलों का विकल्प मिल सके।
एक साल से एक ही फल मिलने की शिकायत
शिक्षकों के अनुसार जिले के कई प्रखंडों में लगभग एक साल से बच्चों को नियमित रूप से केला दिए जाने की बात सामने आई है। ठंड के मौसम में कुछ दिनों तक संतरा दिए जाने की जानकारी भी दी गई, लेकिन बाद में यह व्यवस्था जारी नहीं रही। शिक्षकों का कहना है कि अलग-अलग विद्यालयों से एक ही फल बार-बार दिए जाने की शिकायत सामने आती रही है।
इसी पृष्ठभूमि में एक शिक्षक ने 24 अक्टूबर को सहयोग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में विद्यालयों में बच्चों को दिए जा रहे फलों में विविधता लाने की जरूरत बताई गई। विभाग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अब मौसमी फलों को बदल-बदलकर देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

भागलपुर के 1756 स्कूलों में संचालित होता है MDM
जिले में 1756 स्कूलों में रोजाना मध्याह्न भोजन का संचालन होता है। इनमें कुछ विद्यालयों में भोजन एनजीओ के माध्यम से पहुंचाया जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर वेंडर के माध्यम से स्कूलों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिला शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रोजाना करीब 65 से 70 प्रतिशत बच्चे मध्याह्न भोजन का लाभ लेते हैं। ऐसे में भोजन के साथ दिए जाने वाले फल की गुणवत्ता और विविधता भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों से जुड़ा विषय है।
विभागीय निर्देश के अनुसार स्कूलों और केंद्रीयकृत रसोई व्यवस्था से जुड़े स्तरों पर यह सुनिश्चित किया जाना है कि बच्चों को निर्धारित राशि की सीमा में उपलब्ध कराए जाने वाले फल एक ही प्रकार तक सीमित न रहें। मौसमी उपलब्धता के आधार पर फलों में बदलाव किया जा सकता है।
सेब, मौसंबी समेत मौसमी फल देने पर जोर
डीपीओ एमडीएम की ओर से जारी निर्देश में सेब, मौसंबी और अन्य मौसमी फलों को बदल-बदलकर देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को फल के रूप में अलग-अलग विकल्प मिलें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था निर्धारित राशि के दायरे में ही लागू की जानी है।
शिक्षा विभाग की इस पहल के बाद अब स्कूलों में फल वितरण की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। खास तौर पर उन विद्यालयों में जहां लंबे समय से एक ही फल दिए जाने की शिकायत थी, वहां नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

डीपीएम और बीआरपी एमडीएम करेंगे जांच
व्यवस्था की निगरानी के लिए डीपीएम और बीआरपी एमडीएम को भी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। डीपीओ ने निर्देश दिया है कि वे विद्यालयों और केंद्रीयकृत रसोई के माध्यम से बच्चों को दिए जा रहे फलों की व्यवस्था की जांच करें। उन्हें यह देखना होगा कि निर्धारित निर्देश के अनुसार अलग-अलग मौसमी फल उपलब्ध कराए जा रहे हैं या नहीं।
जांच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। इससे विभाग को जमीनी स्तर पर जारी निर्देश के अनुपालन की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
शिकायत के बाद व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद
शिक्षकों की शिकायत और विभागीय संज्ञान के बाद अब निगाह इस बात पर है कि नए निर्देश कितनी तेजी से स्कूलों में लागू होते हैं। बच्चों को नियमित रूप से एक ही फल दिए जाने की शिकायत के बीच मौसमी फलों में बदलाव का निर्देश विद्यालयों के लिए नई व्यवस्था लेकर आया है।
फिलहाल विभाग ने निर्धारित राशि के भीतर फल बदल-बदलकर उपलब्ध कराने और इसकी निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। जांच के बाद मिलने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि जिले के स्कूलों में निर्देश का कितना पालन हो रहा है और बच्चों को वास्तविक रूप से अलग-अलग मौसमी फल मिलना शुरू हुआ है या नहीं।

