पश्चिम बंगाल सरकार ने ग्रामीण रोजगार और पंचायत प्रशासन को मजबूत करने के लिए वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) योजना को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को योजना के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी बनने और प्रतिदिन 22 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया है। इसके साथ ही विभाग में कर्मचारियों और अभियंताओं की कमी दूर करने के लिए 7,190 पदों पर भर्ती की तैयारी की गई है। नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित विधेयक दीपावली के बाद विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा
बुधवार को विधाननगर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और विभागीय मंत्री दिलीप घोष मौजूद रहे। इस दौरान ग्रामीण रोजगार, पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सरकार की प्राथमिकताओं और प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी। सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ पंचायत स्तर पर योजनाओं को समय पर लागू कराने पर है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने राज्य के लिए 22 करोड़ मानव कार्य दिवस और 22 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य के मुकाबले 1,200 करोड़ रुपये पहले ही राज्य को मिल चुके हैं। राज्य सरकार का दावा है कि अब तक 65 लाख 62 हजार मानव कार्य दिवस सृजित किए जा चुके हैं। फिलहाल प्रतिदिन औसतन करीब सात लाख मानव कार्य दिवस तैयार किए जा रहे हैं। सरकार ने समय कम होने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है।
22 लाख लोगों को प्रतिदिन काम देने की तैयारी
वीबी-जी राम जी योजना को लेकर राज्य सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन 22 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का है। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया है। सरकार चाहती है कि ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर मिलें और पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों को गति दी जाए। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभागीय ढांचे, कर्मचारियों की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल बनने की मंशा भी जताई है। इसके लिए केवल लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पंचायतों और प्रखंडों में काम की वास्तविक प्रगति, श्रमिकों को उपलब्ध काम और योजनाओं के संचालन पर लगातार नजर रखनी होगी। बैठक में इन्हीं प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा की गई।
पंचायत विभाग के 7,190 पदों पर नियुक्ति
ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने में कर्मचारियों और अभियंताओं की भूमिका अहम होती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न ब्लॉकों में पंचायत विभाग के 7,190 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का फैसला विभागीय कामकाज को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। सरकार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने की व्यवस्था की जाएगी।
नियुक्ति से संबंधित विधेयक दीपावली की छुट्टियों के बाद विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। इसके लिए विशेष अधिवेशन बुलाने की तैयारी है। विधेयक पेश होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती की आगे की रूपरेखा स्पष्ट होगी। फिलहाल सरकार ने पदों की कुल संख्या और विधायी प्रक्रिया को लेकर अपना फैसला सार्वजनिक किया है। पदवार विवरण, चयन प्रक्रिया और आवेदन की तारीखों की जानकारी उपलब्ध सूचना में नहीं दी गई है।
पंचायतों का कामकाज बाधित नहीं होने देने का दावा
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ पंचायतों में प्रधान और उपप्रधान के इस्तीफे के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की स्थिति बनी थी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि पंचायतों का काम किसी भी परिस्थिति में रुकने नहीं दिया जाएगा। इस उद्देश्य से पंचायत कानून में संशोधन कर विशेष विधेयक पारित कराया जा चुका है। सरकार का कहना है कि पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रखने और ग्रामीण विकास की योजनाओं को जारी रखने के लिए कानूनी स्तर पर कदम उठाए गए हैं।

पंचायतों की भूमिका ग्रामीण रोजगार, स्थानीय निर्माण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में निर्वाचित पदाधिकारियों के इस्तीफे या प्रशासनिक बदलाव के कारण काम रुकने की आशंका को दूर करना सरकार की प्राथमिकता बताई गई है।
न्यूटाउन में पांच एकड़ जमीन पर बनेगा पंचायत भवन
विभागीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए न्यूटाउन में पांच एकड़ जमीन पर नया पंचायत भवन बनाने की भी घोषणा की गई है। प्रस्तावित भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कामकाज को व्यवस्थित करने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि विभागीय गतिविधियों को एक स्थान पर लाने से प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा और योजनाओं की निगरानी में सुविधा मिलेगी।
केंद्र की नई वीबी-जी राम जी व्यवस्था के तहत ग्रामीण रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने की जानकारी भी दी गई है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू बताई गई है। राज्य सरकार के सामने अब इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने, रोजगार लक्ष्य हासिल करने और पंचायत विभाग में प्रस्तावित नियुक्तियों को आगे बढ़ाने की चुनौती है।
सरकार ने ग्रामीण रोजगार और पंचायत प्रशासन को लेकर कई घोषणाएं की हैं। इन फैसलों का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विशेष सत्र में विधेयक किस रूप में पेश होता है, भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होती है और पंचायत स्तर पर रोजगार के लक्ष्य कितनी तेजी से पूरे किए जाते हैं।

