बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन का राहत अभियान जारी, SDRF की 8 और SSB की 2 टीमें तैनात; 3,200 से अधिक पशुओं का इलाज और 12,600 पॉलीथीन शीट वितरित
पटना, 10 सितंबर 2026।
पटना में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतरने लगा हो, लेकिन प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान में ढील नहीं दी है। प्रभावित इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित आवागमन, भोजन, चिकित्सा और पशुओं की देखभाल जैसी बुनियादी जरूरतों की आवश्यकता है।
यही वजह है कि जिला प्रशासन ने राहत व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखा है और संवेदनशील इलाकों में संसाधनों की तैनाती जारी है।
जिले में फिलहाल 160 नावों का परिचालन, 36 सामुदायिक रसोई, 21 मेडिकल कैंप, 31 एम्बुलेंस और 6 बोट एम्बुलेंस लोगों की सहायता में लगी हैं। इसके साथ ही SDRF की 8 और SSB की 2 टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं।
राहत व्यवस्था सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पशुधन को बचाना भी है। ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका का बड़ा हिस्सा पशुओं पर निर्भर रहता है। ऐसे में प्रशासन ने पशुओं के लिए भी अलग राहत व्यवस्था तैयार की है।
जिले में 23 पशु शिविर संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 2,000 क्विंटल पशु चारा वितरित किया जा चुका है, जबकि 3,200 से अधिक पशुओं का उपचार किया गया है।
यह आंकड़ा बताता है कि बाढ़ राहत अभियान को केवल मानव राहत तक सीमित रखने के बजाय पशुधन को भी राहत व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
36 सामुदायिक रसोई दे रही हैं भोजन
बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के सामने सबसे तत्काल जरूरत भोजन की होती है। इसे देखते हुए जिले में 36 सामुदायिक रसोई केंद्र लगातार संचालित किए जा रहे हैं।
इन केंद्रों पर प्रभावित लोगों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे समय में सामुदायिक रसोई सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के लिए अस्थायी सामाजिक सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं।
दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए नाव और बोट एम्बुलेंस
बाढ़ के पानी में सड़क संपर्क प्रभावित होने पर नाव ही कई इलाकों के लिए मुख्य परिवहन साधन बन जाती है। प्रशासन ने जरूरत और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति के अनुसार 160 नावों को परिचालन में रखा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्थिति और महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी वजह से 31 एम्बुलेंस के साथ 6 बोट एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं, ताकि सड़क से पहुंचना मुश्किल होने पर भी मरीजों को चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाया जा सके।
जिले में 21 मेडिकल कैंप भी संचालित किए जा रहे हैं।
12,600 से अधिक पॉलीथीन शीट बांटी गईं
बाढ़ में घरों के क्षतिग्रस्त होने या जलभराव के कारण खुले में रहने को मजबूर परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय की जरूरत होती है। प्रशासन की ओर से अब तक 12,600 से अधिक पॉलीथीन शीट जरूरतमंद लोगों के बीच वितरित की जा चुकी हैं।
यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए तत्काल राहत का साधन है, जिनके घरों में पानी भरने या अन्य कारणों से रहना मुश्किल हुआ है।
पानी घट रहा है, फिर भी खतरा पूरी तरह टला नहीं
जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नदियों के जलस्तर में कमी आने के बावजूद अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक रूप से नदियों में स्नान करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने को कहा है। बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को विशेष रूप से पानी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की अपील की गई है।
क्यों जरूरी है यह सावधानी?
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी खतरे खत्म नहीं होते। जलभराव वाले इलाकों में सड़क और जमीन की स्थिति बदल सकती है, खुले नाले या गड्ढे पानी में छिपे रह सकते हैं और दूषित पानी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए जलस्तर में कमी को बाढ़ की तत्काल समाप्ति मानना जोखिम भरा हो सकता है।
तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी
बाढ़ के दौरान प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती तटबंधों की सुरक्षा है। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को तटबंधों की 24 घंटे सतत निगरानी का निर्देश दिया है।
कहीं भी तटबंध में क्षति, रिसाव या अन्य समस्या मिलने पर तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण कार्य कराने को कहा गया है।
आंकड़े बताते हैं राहत अभियान का पैमाना
पटना में इस समय राहत व्यवस्था को देखें तो प्रशासन का अभियान कई स्तरों पर एक साथ चल रहा है—भोजन, परिवहन, स्वास्थ्य, पशुधन और अस्थायी आश्रय।
| राहत व्यवस्था | संख्या/स्थिति |
|---|---|
| नावें | 160 |
| सामुदायिक रसोई | 36 |
| मेडिकल कैंप | 21 |
| एम्बुलेंस | 31 |
| बोट एम्बुलेंस | 6 |
| SDRF टीमें | 8 |
| SSB टीमें | 2 |
| पशु शिविर | 23 |
| पशुओं का उपचार | 3,200+ |
| पशु चारा वितरण | करीब 2,000 क्विंटल |
| पॉलीथीन शीट वितरण | 12,600+ |
160 नावें प्रभावित इलाकों में आवागमन का सहारा बनी हैं। 36 सामुदायिक रसोई भोजन उपलब्ध करा रही हैं। 21 मेडिकल कैंप और 37 एम्बुलेंस/बोट एम्बुलेंस स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए हुए हैं। वहीं पशुओं के लिए 23 शिविर संचालित हैं।
असली परीक्षा अब भी बाकी
बाढ़ के दौरान राहत पहुंचाना जितना जरूरी है, पानी उतरने के बाद की स्थिति संभालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रभावित परिवारों की सुरक्षित वापसी, जलजनित बीमारियों की रोकथाम, क्षतिग्रस्त सड़कों और तटबंधों की निगरानी तथा पशुधन की सुरक्षा आने वाले दिनों में प्रशासन की प्राथमिक चुनौतियां रहेंगी।
फिलहाल पटना में राहत अभियान का संदेश साफ है—पानी घटने लगा है, लेकिन प्रशासन की निगरानी और राहत व्यवस्था अभी कम नहीं हुई है।