परसा (पटना): मानव उत्थान सेवा समिति की परसा शाखा की ओर से आयोजित दो दिवसीय भागवत सत्संग ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन 31 अक्टूबर 2026 को भव्य कलश यात्रा निकाली गई। धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा के दौरान महिलाओं ने सिर पर कलश धारण किया, जबकि पुरुष श्रद्धालु हाथों में मानव धर्म की ध्वज-पताकाएं लेकर यात्रा में शामिल हुए।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक जागरूकता, मानव धर्म और महापुरुषों के प्रेरणादायी संदेशों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। कलश यात्रा के चलते पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं की सहभागिता और आध्यात्मिक नारों से आयोजन स्थल तथा यात्रा मार्ग पर उत्साह का माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं ने लिया मानवता और सद्भाव का संकल्प
भागवत सत्संग ज्ञान यज्ञ के दौरान विश्व शांति, सद्भाव, मानवता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश प्रमुख रूप से सामने रखा गया। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने मानव धर्म, भारतीय संस्कृति और विश्व बंधुत्व की भावना को आत्मसात करने का संकल्प लिया। समिति के अनुसार सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में प्रेम, एकता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के माध्यम से आध्यात्मिक गतिविधियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, सेवा भावना और आपसी सहयोग को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। कलश यात्रा इसी व्यापक उद्देश्य के तहत आयोजित कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

महात्माओं ने भागवत महापुराण के महत्व पर रखा विचार
सत्संग के दौरान मंच पर विराजमान पूज्य हीरा बाई जी, पंकजा बाई जी, गुणवंतानंद जी, चिन्मयानंद जी, श्यामा बाई जी, गिरिजा बाई जी और सुनिता बाई जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। वक्ताओं ने मद्भागवत महापुराण के आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।
पूज्य हीरा बाई जी ने अपने प्रवचन में प्रेम, दया, करुणा, सेवा, परोपकार, सदाचार और मानवता जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने मनुष्य के जीवन के वास्तविक उद्देश्य के रूप में आत्मज्ञान प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं को मानवीय मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के प्रति प्रेरित किया गया।
आध्यात्मिक जागरण के साथ मानव कल्याण का संदेश
आयोजन का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि आध्यात्मिक जागरण के साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा मानव कल्याण की भावना को समाज तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। आयोजकों के अनुसार प्रेम, एकता, भाईचारा और सेवा जैसे मूल्यों को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा कार्यक्रम के केंद्र में रही।
कलश यात्रा में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया। महिलाओं के सिर पर सजे कलश और पुरुषों के हाथों में मानव धर्म की ध्वज-पताकाएं यात्रा की प्रमुख विशेषताओं में रहीं। श्रद्धालु आध्यात्मिक संदेशों के साथ आगे बढ़े और आयोजन स्थल पर भी धार्मिक वातावरण बना रहा।

परसा शाखा के कार्यकर्ताओं ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
दो दिवसीय भागवत सत्संग ज्ञान यज्ञ को सुचारु रूप से संपन्न कराने में मानव उत्थान सेवा समिति की परसा शाखा के कार्यकर्ताओं, मानव सेवा दल और युवा प्रकोष्ठ के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम की व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं के बीच समन्वय तक कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारियां संभालीं।
आयोजन के सफल संचालन में परसा शाखा की प्रधान डॉ. ज्योति जी के साथ संध्या बहन, शुभम, संगीता, ममता सिंह, गिरिजानंद, सुषमा बहन तथा मानव सेवा दल और युवा प्रकोष्ठ के अन्य सदस्यों ने सहयोग किया। आयोजकों ने सभी कार्यकर्ताओं के समर्पण, सहयोग और प्रयासों की सराहना की।
सामाजिक एकता और सेवा भावना पर जोर
सत्संग के दौरान दिए गए संदेशों में समाज में आपसी प्रेम और सहयोग को बढ़ाने के साथ मानव सेवा की भावना को मजबूत करने पर जोर रहा। आयोजकों ने कहा कि आध्यात्मिक जागरण का उद्देश्य व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ समाज में भी नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करना है।
दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित कलश यात्रा के बाद सत्संग और प्रवचन का क्रम जारी रहा। श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक संदेशों को सुना और मानवता, सेवा तथा सदाचार के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

मीडिया प्रभारी: अनिल कुमार
