पटना: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यापक, आधुनिक और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में सरकार ने विस्तार की जरूरत पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का तीन से चार गुना विस्तार जरूरी है, ताकि आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उनके नजदीक मिल सकें। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के संचालन में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था में बिहार के चिकित्सकों को प्राथमिकता देने की तैयारी है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को पटना के होटल मौर्या में आयोजित ISCCM सोशल कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की पटना शाखा की ओर से आयोजित सम्मेलन में गंभीर मरीजों के इलाज, क्रिटिकल केयर सुविधाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
स्वास्थ्य सेवाओं का तीन से चार गुना विस्तार लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की बढ़ती आबादी और लोगों की बदलती अपेक्षाओं को देखते हुए मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि आम लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए दूसरे राज्यों या बड़े महानगरों का रुख न करना पड़े, इसके लिए राज्य के भीतर ही बेहतर स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि बिहार के लोग भी चाहते हैं कि उन्हें पटना और राज्य के अन्य शहरों में ऐसी चिकित्सा सुविधाएं मिलें, जैसी दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में उपलब्ध हैं। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सरकार अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, बड़े निजी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहित करने और मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली बेहतर बनाने पर काम कर रही है।

मेडिकल कॉलेजों में PPP मॉडल को बढ़ावा देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में PPP मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सरकार आने वाले दिनों में इस दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया में बिहार के चिकित्सकों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे स्थानीय डॉक्टरों की भागीदारी बढ़ाने और राज्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने चिकित्सा व्यवस्था में विशेषज्ञता के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत भी बताई। मुख्यमंत्री के अनुसार, जिस चिकित्सक की विशेषज्ञता जिस क्षेत्र में है, उसकी सेवाओं का उपयोग उसी क्षेत्र में किया जाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि यदि कोई डॉक्टर सर्जन है तो उसकी सेवाएं सर्जरी के काम में ही अधिक प्रभावी ढंग से ली जानी चाहिए।
जिला अस्पतालों में हर महीने करीब 10 हजार ऑपरेशन का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के जिला अस्पतालों में अब हर महीने लगभग 10 हजार ऑपरेशन किए जा रहे हैं। उन्होंने अस्पतालों से मरीजों को अनावश्यक रूप से पटना रेफर करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की बात कही। उनके अनुसार, किसी मरीज को रेफर करने वाले डॉक्टर को रेफर किए जाने का कारण स्पष्ट करना होगा। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर ही अधिक से अधिक मरीजों को उपचार उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता बढ़ने से मरीजों पर आने-जाने का अतिरिक्त बोझ कम होगा। साथ ही गंभीर मामलों में समय पर इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।

आयुष्मान भारत से जुड़े करीब 92 प्रतिशत परिवार
मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना को भी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव से जोड़ा। उन्होंने कहा कि राज्य के करीब 92 प्रतिशत परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं। उनके अनुसार, पहले बड़ी संख्या में पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाने की समस्या थी। इसको दूर करने के लिए राज्य सरकार ने राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों को योजना से जोड़ने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत करीब 9.5 करोड़ लोगों को योजना से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। सरकार के अनुसार, योजना के विस्तार से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य उपचार के खर्च से जुड़ी सुरक्षा का लाभ मिल रहा है।
16 सरकारी मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण कार्य जारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में करीब 16 सरकारी मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि 10 से अधिक सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और क्रिटिकल केयर सुविधाओं के विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने आधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट, उच्चस्तरीय बेड और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाली चिकित्सा सुविधाओं के विकास के लिए निवेश को जरूरी बताया। सरकार की ओर से आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की बात भी कही गई।

डॉक्टरों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
सम्राट चौधरी ने डॉक्टरों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सक समाज के लिए भगवान के स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों के सम्मान को बढ़ाने और समाज को स्वस्थ बनाने में उनकी भूमिका को और मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने ISCCM के सम्मेलन को गंभीर मरीजों के उपचार और क्रिटिकल केयर सेवाओं की गुणवत्ता पर संवाद के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ऐसे संवाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ हुए सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान ISCCM की ओर से मुख्यमंत्री का प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंटकर अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों और ISCCM के राष्ट्रीय तथा पटना शाखा के पदाधिकारियों एवं पूर्व पदाधिकारियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. ई. हक, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. सहजानंद, वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.बी. गिरी, ISCCM के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. घनश्याम जगतकर, पटना शाखा की चेयरपर्सन डॉ. किशोर झुनझुनवाला और सचिव डॉ. राजेश रौशन समेत देशभर से आए चिकित्सक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

