अकबरपुर प्रखंड के रहीमपुर गांव स्थित मुसहरी टोला में आजादी के दशकों बाद भी शिक्षा की तस्वीर बेहद चिंताजनक बनी हुई है। करीब 200 परिवारों की आबादी वाले इस टोले में आज तक एक भी व्यक्ति के मैट्रिक पास नहीं होने की बात सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि टोले से महज 200 मीटर की दूरी पर मध्य विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हैं, बावजूद इसके बच्चों की पढ़ाई के प्रति नियमितता बेहद कम है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आर्थिक तंगी और परिवार की रोजी-रोटी की मजबूरी बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। टोले के कई बच्चे अपने माता-पिता के साथ ईंट-भट्ठों पर काम करने के लिए चले जाते हैं। ऐसे में स्कूल जाने की उम्र में ही बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी की जगह मजदूरी का बोझ आ जाता है। लगातार स्कूल से दूर रहने के कारण अधिकांश बच्चे प्रारंभिक शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते और आगे की पढ़ाई तक पहुंचने से पहले ही उनका स्कूल छूट जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा की सुविधा आसपास मौजूद होने के बावजूद आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण बच्चे उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अगर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के साथ उनके परिवारों को आर्थिक सहयोग और जागरूकता से जोड़ा जाए तो स्थिति में बदलाव आ सकता है।
मुसहरी टोला की यह तस्वीर सरकारी स्तर पर शिक्षा के दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। जरूरत है कि प्रशासन और शिक्षा विभाग ऐसे परिवारों को चिन्हित कर बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए, ताकि आने वाली पीढ़ी भी मजदूरी के चक्र में फंसने के बजाय शिक्षा के जरिए अपने भविष्य को संवार सके।