अतिरिक्त समय पाने के लिए मेडिकल बोर्ड के नाम से बनाए गए कथित फर्जी प्रमाणपत्र; बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के परीक्षा केंद्रों पर इनके इस्तेमाल का मामला आया सामने
मुंगेर में दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे प्रतियोगी परीक्षा में अनुचित लाभ लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सदर अस्पताल के दिव्यांग मेडिकल बोर्ड में शामिल चिकित्सकों के हस्ताक्षर की नकल कर करीब 20 अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराए और उनके आधार पर कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की परीक्षा दी। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर परीक्षा और नियुक्ति से जुड़े महकमों तक हलचल है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अभ्यर्थियों ने दिव्यांग परीक्षार्थियों को मिलने वाली अतिरिक्त समय की सुविधा का लाभ उठाने के लिए कथित तौर पर यह तरीका अपनाया। हालांकि, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और परीक्षा में इनके इस्तेमाल के पीछे किसका हाथ है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अतिरिक्त समय के लिए बनाया गया फर्जी प्रमाणपत्र
दिव्यांग श्रेणी के पात्र परीक्षार्थियों को परीक्षा में नियमानुसार अतिरिक्त समय दिया जाता है। यह समय परीक्षा और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार 20 से 30 मिनट तक हो सकता है। इसी सुविधा का लाभ लेने के लिए मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों के नाम से कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए।
इन हस्ताक्षरों के आधार पर तैयार प्रमाणपत्रों को SSC परीक्षा के दौरान संबंधित केंद्रों पर जमा किया गया। मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित सुविधा का लाभ कथित रूप से गलत दस्तावेजों के जरिए लेने की कोशिश की गई।

परीक्षा केंद्रों से सत्यापन के लिए पहुंचे प्रमाणपत्र, तब खुली पोल
फर्जीवाड़े का पता तब चला, जब परीक्षा केंद्रों पर जमा प्रमाणपत्रों पर किए गए हस्ताक्षरों का सत्यापन कराने के लिए उन्हें मुंगेर सदर अस्पताल भेजा गया। संबंधित चिकित्सकों ने अपने नाम से किए गए हस्ताक्षरों को देखा तो वे भी हैरान रह गए।
जांच के दौरान हस्ताक्षर वास्तविक नहीं पाए गए। इसके बाद चिकित्सकों ने हस्ताक्षर फर्जी होने की जानकारी लिखित रूप में संबंधित विभाग को भेज दी। इस तरह करीब 20 प्रमाणपत्रों पर फर्जी हस्ताक्षर होने का मामला सामने आया।
क्या नौकरी पाने में भी हुआ फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल?
अब जांच का एक अहम पहलू यह है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों में से कितने चयनित हुए हैं और क्या किसी ने नौकरी भी हासिल कर ली है। यदि नियुक्ति की प्रक्रिया में भी फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल साबित होता है, तो संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, नियुक्ति रद्द करने या आगे की कार्रवाई का फैसला संबंधित नियुक्ति विभाग करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सामने आए सभी 20 मामलों में अभ्यर्थियों की परीक्षा और चयन की स्थिति क्या है।

20 मामले सामने आए, जांच में बढ़ सकता है दायरा
सदर अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. रमन कुमार ने बताया कि दिव्यांग मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों के फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े करीब 20 मामले सामने आए हैं। SSC परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया था। संबंधित चिकित्सकों ने हस्ताक्षर फर्जी होने की रिपोर्ट विभाग को भेज दी है।
डॉ. कुमार के अनुसार, आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग के स्तर से की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी प्रमाणपत्र किसने तैयार किए, क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है और इस कथित फर्जीवाड़े से कितने अभ्यर्थियों को लाभ मिला। इन सवालों के जवाब जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होंगे।
