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Home - देश - जब डीडीसी बच्चों के बीच बैठकर बने विद्यार्थी, सवाल पूछे तो सामने आई मोतीपुर के आदर्श विद्यालय की तस्वीर

जब डीडीसी बच्चों के बीच बैठकर बने विद्यार्थी, सवाल पूछे तो सामने आई मोतीपुर के आदर्श विद्यालय की तस्वीर

Sumit Kumar
Last updated: सितम्बर 10, 2026 10:37 अपराह्न
By : Sumit Kumar
Published on : 22 घंटे पहले
मोतीपुर आदर्श विद्यालय में डीडीसी का निरीक्षण
मोतीपुर आदर्श विद्यालय में डीडीसी का निरीक्षण
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सरस्वती विद्या निकेतन में निशांत सिहारा ने कक्षा में विद्यार्थियों के साथ बिताया समय; पढ़ाई के साथ अनुशासन, कंप्यूटर, पुस्तकालय और प्रतियोगिताओं पर दिया जोर

मुजफ्फरपुर/मोतीपुर।
अफसरों का निरीक्षण आमतौर पर फाइलों, रजिस्टरों और व्यवस्थाओं की जांच तक सीमित माना जाता है। लेकिन मोतीपुर के सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) में उप विकास आयुक्त निशांत सिहारा का निरीक्षण कुछ अलग नजर आया।

वे सिर्फ कक्षाओं और व्यवस्थाओं को देखने नहीं पहुंचे, बल्कि विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनकी पढ़ाई को समझा, सवाल पूछे और अपने अनुभव भी उनके साथ साझा किए।

मोतीपुर आदर्श विद्यालय में डीडीसी का निरीक्षण
मोतीपुर आदर्श विद्यालय में डीडीसी का निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने अलग-अलग कक्षाओं का जायजा लिया और विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। बच्चों से विषयों से जुड़े सवाल पूछे गए तो विद्यार्थियों ने संतोषजनक जवाब देकर अपनी प्रतिभा और विषयगत समझ का परिचय दिया। विद्यार्थियों के प्रदर्शन से प्रभावित डीडीसी ने उनकी सराहना की और उन्हें आगे भी बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया।

निरीक्षण का केंद्र सिर्फ स्कूल नहीं, बच्चों का भविष्य रहा

निशांत सिहारा ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि अच्छी शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। अनुशासन, नियमित अध्ययन, रचनात्मक सोच और प्रतियोगिताओं में भागीदारी भी व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने बच्चों को लगातार सीखते रहने और अपनी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने के लिए प्रेरित किया। उनका विद्यार्थियों के साथ कक्षा में बैठना और बातचीत करना निरीक्षण को एक अलग मानवीय रूप देता नजर आया।

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कंप्यूटर और पुस्तकालय को बनाया जाएगा पढ़ाई का मजबूत आधार

डीडीसी ने विद्यालय के कंप्यूटर कक्ष और पुस्तकालय का भी निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया कि इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग विद्यार्थियों की शिक्षा में हो।

आज के दौर में जहां डिजिटल शिक्षा तेजी से पढ़ाई का हिस्सा बन रही है, वहीं पुस्तकालय विद्यार्थियों में पढ़ने और स्वयं जानकारी हासिल करने की आदत विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रशासन ने दोनों क्षेत्रों के बेहतर उपयोग पर जोर देकर शिक्षा को केवल कक्षा-केंद्रित रखने के बजाय उसे व्यापक बनाने का संकेत दिया।

‘सिर्फ नामांकन नहीं, स्कूल में बच्चों की मौजूदगी भी जरूरी’

निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

डीडीसी ने विद्यालय में नियमित रूप से साप्ताहिक पैरेंट्स मीटिंग आयोजित करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की उपस्थिति, पढ़ाई में प्रगति और उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के बारे में अभिभावकों को लगातार जानकारी देना है।

यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी स्कूल की सफलता केवल नामांकित विद्यार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति और सीखने की वास्तविक स्थिति से तय होती है।

प्रतियोगिताओं से बच्चों में पैदा होगी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

निशांत सिहारा ने विद्यालय प्रबंधन को समय-समय पर विभिन्न शैक्षणिक और रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित कराने का निर्देश दिया।

उनका मानना है कि प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करती हैं। इससे बच्चों को अपनी क्षमता पहचानने और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलती है।

प्रशासन का फोकस: किताब से लेकर कंप्यूटर तक, हर स्तर पर विकास

निरीक्षण के बाद स्पष्ट है कि विद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है।

मोतीपुर आदर्श विद्यालय में डीडीसी का निरीक्षण
मोतीपुर के सरस्वती विद्या निकेतन में डीडीसी ने विद्यार्थियों से संवाद कर शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

कक्षा में पढ़ाई, कंप्यूटर का ज्ञान, पुस्तकालय का इस्तेमाल, रचनात्मक गतिविधियां, प्रतियोगिताएं और अभिभावकों की नियमित भागीदारी—इन सभी को एक साथ जोड़कर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की कोशिश है।

मोतीपुर के इस निरीक्षण का बड़ा संदेश

डीडीसी का यह दौरा सिर्फ एक विद्यालय के निरीक्षण की औपचारिकता नहीं रहा। बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुनना, उनसे सवाल करना और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद की उस जरूरत को सामने लाता है, जो अक्सर सरकारी निरीक्षणों में पीछे छूट जाती है।

अगर स्कूलों में संसाधनों के साथ उनका वास्तविक इस्तेमाल, शिक्षकों की सक्रियता, बच्चों की नियमित उपस्थिति और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो सरकारी स्तर पर शिक्षा को बेहतर बनाने की कोशिशों का असर जमीन पर और मजबूत दिखाई दे सकता है।

सरस्वती विद्या निकेतन, मोतीपुर में डीडीसी का निरीक्षण इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है।

TAGGED:आदर्श विद्यालयमुजफ्फरपुरमोतीपुरसरस्वती विद्या निकेतन
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