विशेष लेख | 7 नवंबर | आज का इतिहास | समुद्री इतिहास
समुद्र की सतह पर एक जहाज बिना किसी कप्तान, नाविक या यात्री के आगे बढ़ता मिले—और उसके भीतर सामान, भोजन तथा माल लगभग अपनी जगह मौजूद हो, तो यह दृश्य किसी रहस्य-कथा जैसा लगता है। लेकिन 1872 में अटलांटिक महासागर में ऐसा ही एक वास्तविक घटनाक्रम सामने आया, जिसने दुनिया को चकित कर दिया। अमेरिकी मालवाहक ब्रिगेंटाइन मेरी सेलेस्टे (Mary Celeste) 7 नवंबर 1872 को न्यूयॉर्क से जेनोआ के लिए रवाना हुआ। लगभग एक महीने बाद, 4 दिसंबर को, ब्रिटिश जहाज देई ग्रात्सिया (Dei Gratia) के नाविकों ने उसे अटलांटिक में लावारिस हालत में पाया। जहाज पर सवार सभी दस लोग गायब थे। वे कहाँ गए और जहाज क्यों छोड़ा गया—इसका निर्णायक उत्तर आज तक नहीं मिला।
7 नवंबर 1872: न्यूयॉर्क से शुरू हुई अंतिम रहस्यमयी यात्रा
मेरी सेलेस्टे उस समय एक अमेरिकी व्यापारिक जहाज था। इसका मूल नाम अमेज़न (Amazon) था। कनाडा के नोवा स्कोटिया में 1861 में निर्मित इस पोत ने शुरुआती वर्षों में कई दुर्घटनाओं और स्वामित्व-परिवर्तनों का सामना किया। बाद में इसका नाम बदलकर मेरी सेलेस्टे रखा गया। 1872 में जहाज के कप्तान बेंजामिन स्पूनर ब्रिग्स (Benjamin Spooner Briggs) थे—एक अनुभवी नाविक, जो जहाज में हिस्सेदार भी थे।
7 नवंबर 1872 को जहाज न्यूयॉर्क से इटली के जेनोआ बंदरगाह के लिए रवाना हुआ। इसके साथ कप्तान ब्रिग्स, उनकी पत्नी सारा, उनकी लगभग दो वर्ष की बेटी सोफिया और सात सदस्यीय चालक दल था। इस प्रकार जहाज पर कुल दस लोग सवार थे। जहाज के माल में औद्योगिक उपयोग के लिए रखी गई अल्कोहल की लगभग 1,701 पीपें थीं। यह यात्रा एक नियमित व्यावसायिक समुद्री यात्रा होनी थी, लेकिन आगे चलकर समुद्री इतिहास की सबसे चर्चित पहेलियों में शामिल हो गई।

अटलांटिक में मिला खाली जहाज
4 दिसंबर 1872 को पुर्तगाल के अज़ोरेस द्वीपसमूह के पूर्व में ब्रिटिश ब्रिगेंटाइन देई ग्रात्सिया के दल ने समुद्र में एक जहाज को असामान्य ढंग से आगे बढ़ते देखा। उसके पाल आंशिक रूप से खुले थे और उसकी चाल अनियमित लग रही थी। पास जाने पर पहचान हुई कि वह मेरी सेलेस्टे है। देई ग्रात्सिया के कप्तान डेविड मोरहाउस (David Morehouse) ने सहायता के लिए नाविकों को उस पर भेजा।
जहाज पर चढ़े लोगों को वहाँ कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला। कप्तान, उनका परिवार और चालक दल—सभी लापता थे। जहाज पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ था और समुद्र में आगे बढ़ने की स्थिति में था। उसके माल का बड़ा हिस्सा सुरक्षित था। जहाज के भीतर पानी जमा था, लेकिन उपलब्ध विवरणों के अनुसार स्थिति ऐसी नहीं थी कि पोत तत्काल डूबने वाला हो। जहाज की एक लाइफबोट गायब थी और कुछ नौवहन उपकरण भी नहीं मिले। इन परिस्थितियों ने यह सवाल और गहरा कर दिया कि यदि जहाज चलने योग्य था, तो सभी लोगों ने उसे क्यों छोड़ा?
जांच में क्या सामने आया?
मेरी सेलेस्टे को देई ग्रात्सिया के नाविकों ने नियंत्रित करते हुए जिब्राल्टर पहुँचाया। वहाँ ब्रिटिश वाइस-एडमिरल्टी अदालत में जहाज के परित्याग और उसे बचाकर लाने के मामले की जांच हुई। यह जांच केवल रहस्य सुलझाने के लिए नहीं थी; इसका संबंध समुद्री कानून और बचावकर्ता दल को मिलने वाले salvage award से भी था। अधिकारियों ने जहाज की स्थिति, माल, दस्तावेजों और संभावित नुकसान की पड़ताल की।
जांच में जहाज के बाहरी हिस्से पर ऐसा निर्णायक नुकसान नहीं मिला, जो किसी बड़े टकराव या चट्टान से टकराने की पुष्टि करे। माल का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित था, हालांकि एक पीपा क्षतिग्रस्त बताया गया। जहाज के भीतर पानी मौजूद था और पंपों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे। लाइफबोट का गायब होना इस संभावना की ओर संकेत करता था कि लोग अपनी इच्छा से या किसी आपात स्थिति में जहाज छोड़कर गए होंगे। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें किस खतरे का आभास हुआ था।

अदालत की जांच में देई ग्रात्सिया के चालक दल के विरुद्ध किसी षड्यंत्र या हिंसक अपराध का निर्णायक प्रमाण नहीं मिला। बचावकर्ता दल को सीमित salvage राशि दी गई, जो जहाज और माल के मूल्य की तुलना में अपेक्षाकृत कम थी। यह तथ्य बताता है कि अधिकारियों ने मामले को सामान्य बचाव-कार्रवाई मानकर बिना सवाल किए स्वीकार नहीं किया था; फिर भी जांच किसी निश्चित आपराधिक निष्कर्ष तक नहीं पहुँची।
आखिर मेरी सेलेस्टे को क्यों छोड़ा गया?
इस घटना के बाद कई सिद्धांत सामने आए, लेकिन किसी को भी अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सका। एक संभावना यह है कि खराब मौसम, जहाज में पानी भरने या पंपों के काम न करने की आशंका से कप्तान ने जहाज खाली करने का आदेश दिया हो। यदि कप्तान को लगा हो कि पोत डूब सकता है, तो वह अपने परिवार और चालक दल को लाइफबोट में बैठाकर अस्थायी रूप से जहाज से दूर ले जाने का निर्णय कर सकता था। बाद में समुद्री हवा और लहरों ने जहाज तथा छोटी नाव को अलग-अलग दिशाओं में बहा दिया हो—यह एक परिकल्पना है, प्रमाणित तथ्य नहीं।
दूसरी चर्चित संभावना माल में रखी औद्योगिक अल्कोहल के वाष्प या रिसाव से जुड़ी है। यदि जहाज के भीतर अल्कोहल की गंध, दबाव या विस्फोट की आशंका पैदा हुई हो, तो चालक दल ने सुरक्षा के लिए जहाज छोड़ा हो सकता है। लेकिन उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्य किसी विस्फोट या आग की पुष्टि नहीं करते। समुद्री डाकुओं के हमले, विद्रोह, हत्या, समुद्री जीवों या अन्य सनसनीखेज कहानियों के समर्थन में भी विश्वसनीय प्रमाण नहीं हैं।
जहाज की लॉगबुक में अंतिम दर्ज प्रविष्टि 25 नवंबर 1872 की थी। उसके बाद की घटनाओं का प्रत्यक्ष विवरण उपलब्ध नहीं है। इसीलिए जहाज छोड़ने का वास्तविक समय, तत्काल कारण और दसों लोगों का अंतिम भाग्य अनिश्चित बना हुआ है।

कहानी और इतिहास के बीच: अफवाहों ने कैसे बढ़ाया रहस्य
मेरी सेलेस्टे की घटना ने समाचार-पत्रों और लेखकों की कल्पना को खूब आकर्षित किया। 1884 में आर्थर कॉनन डॉयल ने J. Habakuk Jephson’s Statement नाम से एक काल्पनिक कहानी प्रकाशित की। कहानी ने घटना के इर्द-गिर्द रहस्य और सनसनी को बढ़ाया, लेकिन उसमें दिए गए विवरण ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं थे। समय के साथ आधे खाए भोजन, बिना छुए चाय, खून के निशान और अन्य नाटकीय दावों ने भी लोकप्रिय संस्कृति में जगह बना ली। इनमें से कई बातें समकालीन दस्तावेजों से पुष्ट नहीं होतीं।
इसलिए मेरी सेलेस्टे की चर्चा करते समय वास्तविक जांच के निष्कर्षों और बाद में गढ़ी गई कहानियों में अंतर करना आवश्यक है। प्रमाणित तथ्य इतने ही असाधारण हैं कि उनके लिए काल्पनिक विवरणों की जरूरत नहीं पड़ती: समुद्र में चलने योग्य जहाज मिला, उसका पूरा दल गायब था, लाइफबोट मौजूद नहीं थी और कारण का कोई निर्णायक उत्तर नहीं मिला।
समुद्री इतिहास की अनसुलझी पहेली
मेरी सेलेस्टे बाद के वर्षों में फिर व्यापारिक सेवा में लौटा और अलग-अलग मालिकों के अधीन चला। 1885 में हैती के पास इसे जानबूझकर चट्टान की ओर ले जाकर डुबो दिया गया; इस अंतिम घटना को बीमा धोखाधड़ी की कोशिश से भी जोड़ा गया। लेकिन 1872 में इसके चालक दल के गायब होने की गुत्थी अलग ही बनी रही। कप्तान ब्रिग्स, उनकी पत्नी, बेटी और सात नाविकों का कोई विश्वसनीय पता कभी नहीं चला।
7 नवंबर 1872 को न्यूयॉर्क से निकली मेरी सेलेस्टे की यात्रा ने समुद्री सुरक्षा, जहाज पर आपात निर्णय, मौसम और मानवीय अनिश्चितता से जुड़े अनेक प्रश्न छोड़े। डेढ़ सदी से अधिक समय बाद भी यह घटना याद दिलाती है कि इतिहास की कुछ पहेलियाँ उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के बावजूद पूरी तरह नहीं सुलझ पातीं। मेरी सेलेस्टे इसी कारण दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ‘घोस्ट शिप’—भूतिया जहाज—के रूप में समुद्री इतिहास में दर्ज है।

