कोलकाता: उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत और करीब 25 लोगों के घायल होने की खबर है। घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बोबाजार थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत तीन दिन के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं।
यह घटना शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम महा सप्तमी के दौरान हुई। पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बारिश के बीच भीड़ बढ़ने और निकास मार्ग के आसपास दबाव बनने से अफरा-तफरी मच गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
आयोजन समिति और सुरक्षा से जुड़े सात लोग गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में पूजा समिति के पदाधिकारी, पंडाल के अस्थायी ढांचे के निर्माण से जुड़े व्यक्ति, भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने वाले लोग और निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं। जांच का केंद्र आयोजन स्थल पर भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा सुरक्षा इंतजामों में संभावित चूक है।
मामले में पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है; आरोपों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और आयोजन की व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रही है।

बोबाजार के कुछ हिस्सों में धारा 163 के तहत प्रतिबंध
कोलकाता पुलिस आयुक्त के आदेश के अनुसार, बोबाजार थाना क्षेत्र के निर्धारित हिस्से में 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। यह क्षेत्र कॉलेज स्ट्रीट, सीआर एवेन्यू, कोलूटोला स्ट्रीट और ईडन हॉस्पिटल रोड से घिरे इलाके के अंतर्गत बताया गया है। आदेश का उद्देश्य संभावित तनाव, प्रदर्शन या ऐसी गतिविधियों को रोकना है जिनसे शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
निर्धारित क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के गैरकानूनी जमावड़े, लाठी या अन्य खतरनाक हथियार लेकर चलने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। आदेश तीन दिन तक या अगले निर्देश जारी होने तक प्रभावी रहेगा। नागरिकों को स्थानीय पुलिस के निर्देशों का पालन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटाने से बचने की सलाह दी गई है।
मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए सहायता
राज्य सरकार ने मृतकों के प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों के लिए पांच लाख रुपये की सहायता घोषित की गई है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों की मदद और मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी रखी है। सहायता संबंधी विवरण और पात्रता की पुष्टि आधिकारिक प्रशासनिक सूचना से की जानी चाहिए।
सरकार ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 345 5678 जारी किया है। प्रभावित परिवार इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

जांच में सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका पर फोकस
प्रारंभिक रिपोर्टों में भारी भीड़, बारिश और प्रवेश-निकास व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भीड़ का दबाव किस तरह बढ़ा और क्या सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था। घटना के बाद पंडाल को बंद कर दिया गया और अन्य भीड़भाड़ वाले पूजा स्थलों पर भी सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की गई।
त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के जुटने वाले आयोजनों में स्पष्ट प्रवेश और निकास मार्ग, पर्याप्त प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी, भीड़ की आवाजाही पर निगरानी और आपातकालीन निकासी की योजना जरूरी होती है। चोरबागान हादसे की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन व्यवस्थागत कमियों ने दुर्घटना में भूमिका निभाई।
पुलिस ने जांच जारी रहने की पुष्टि की है। प्रशासन से आने वाली आधिकारिक जानकारी के आधार पर मृतकों, घायलों और कानूनी कार्रवाई से जुड़े आंकड़ों में बदलाव संभव है।
