कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी निकाय चुनावों से पहले TMC, कांग्रेस और CPM से जुड़े नेताओं की ओर से मतदाता सूची के मुद्दे पर साझा पहल सामने आई है। राज्य चुनाव आयोग को सौंपे गए संयुक्त ज्ञापन में मांग की गई है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और लंबित अपीलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नगर निगमों और नगरपालिकाओं के चुनाव कराए जाएं।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की राजनीति में इन दलों के बीच अलग-अलग स्तर पर लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस संयुक्त पहल को फिलहाल मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी साझा मांग के रूप में ही देखा जा रहा है। इसे किसी औपचारिक चुनावी गठबंधन की घोषणा मानना जल्दबाजी होगी।
4 जनवरी 2027 के बाद चुनाव कराने की मांग
संयुक्त ज्ञापन में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की तय समयसीमा का हवाला दिया गया है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 12 नवंबर 2026 को प्रारूप मतदाता सूची और 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची प्रकाशित की जानी है। ज्ञापन देने वाले पक्षों का कहना है कि अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थानीय निकाय चुनावों की दिशा तय की जानी चाहिए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं, उन्हें दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। साथ ही, जिन लोगों की अपीलें संबंधित न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं, उनके मामलों का निपटारा भी चुनाव से पहले किया जाना चाहिए।

कोलकाता-हावड़ा के करीब 1.6 लाख लंबित मामलों का मुद्दा
ज्ञापन में कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम के लंबित मामलों को विशेष रूप से उठाया गया है। इसमें निर्वाचन आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 16 सितंबर 2026 के हलफनामे का हवाला देते हुए बताया गया कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में करीब 1.2 लाख और हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में लगभग 39 हजार अपीलें लंबित हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर यह संख्या करीब 1.6 लाख बैठती है।
ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं और संगठनों का तर्क है कि यदि इन मामलों के अंतिम निपटारे से पहले निकाय चुनाव करा दिए जाते हैं, तो उन पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार को लेकर सवाल खड़ा हो सकता है जिनकी अपील अभी विचाराधीन है। उन्होंने चुनाव आयोग से ऐसे आवेदकों के मामलों को ध्यान में रखते हुए मतदाता सूची तैयार करने की मांग की है।
पहले निपटाए गए मामलों के आंकड़ों का भी हवाला
संयुक्त ज्ञापन में पहले निपटाए जा चुके मामलों के नतीजों का भी उल्लेख किया गया है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि निपटाए गए मामलों में कोलकाता जिले में 100 प्रतिशत और हावड़ा में 99 प्रतिशत फैसले नाम शामिल किए जाने के पक्ष में रहे। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इन्हीं आंकड़ों के आधार पर लंबित अपीलों को भी जल्द निपटाने की जरूरत बताई है।
हालांकि, इन आंकड़ों का इस्तेमाल ज्ञापन देने वाले पक्षों की दलील के तौर पर किया गया है। लंबित प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति अलग हो सकती है और अंतिम निर्णय संबंधित दस्तावेजों तथा प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। इसलिए इन आंकड़ों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने वाले लोगों की संख्या के रूप में नहीं देखा जा सकता।

संवैधानिक प्रावधानों का दिया गया हवाला
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243ZA और पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग अधिनियम, 1994 की धारा 5 का भी उल्लेख किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि नगर निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची से जुड़े मामलों में राज्य चुनाव आयोग को अपनी वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
उनकी मांग है कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय मतदाता सूची के पुनरीक्षण, पुनर्नामांकन और लंबित अपीलों की स्थिति को ध्यान में रखा जाए। राज्य चुनाव आयोग की ओर से इस मांग पर अंतिम फैसला क्या होगा, यह उसकी आगामी प्रक्रिया और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
TMC-Congress-CPM के साथ आने से राजनीतिक चर्चा तेज
मतदाता सूची के सवाल पर TMC, कांग्रेस और CPM से जुड़े प्रतिनिधियों की साझा पहल ने बंगाल की राजनीतिक तस्वीर को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। खास तौर पर स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी के बीच अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के नेताओं का एक ज्ञापन पर साथ आना राजनीतिक नजरिए से उल्लेखनीय है।
फिलहाल उपलब्ध तथ्यों में इस पहल का केंद्र मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया है। इसे सीट बंटवारे या व्यापक चुनावी गठबंधन का अंतिम संकेत मानने के लिए अभी कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। हालांकि, कांग्रेस और तृणमूल के नेताओं के एक साथ सामने आने से भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हुई है।

राज्य चुनाव आयोग के अगले कदम पर नजर
अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम राज्य चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया होगी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल के साथ 28 अक्टूबर को बैठक का कार्यक्रम भी सामने आया है। इस बैठक में मतदाता सूची, लंबित अपीलों और निकाय चुनाव के कार्यक्रम को लेकर पक्ष अपनी मांग रख सकते हैं।
इस बीच, कोलकाता और हावड़ा समेत निकाय चुनावों की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की समयसीमा और चुनाव कार्यक्रम के बीच तालमेल आने वाले दिनों में अहम मुद्दा बन सकता है। अंतिम फैसला राज्य चुनाव आयोग और संबंधित चुनावी प्रक्रिया के तहत ही होगा।
