कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव कार्यक्रम को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। 16 जनवरी को संशोधित मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन, परिसीमन के बाद मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और जनगणना से जुड़ी तैयारियों ने चुनाव की संभावित समयसीमा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध प्रशासनिक कार्यक्रम को देखते हुए दिसंबर में मतदान कराना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है और जनवरी के अंत या फरवरी 2027 तक चुनाव खिंचने की चर्चा तेज हो गई है।
कोलकाता उत्तर के जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार संशोधित मतदाता सूची अगले वर्ष 16 जनवरी को अंतिम रूप से प्रकाशित की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन एक अहम पड़ाव होता है, क्योंकि इसी आधार पर मतदाताओं के नाम, मतदान केंद्र और संबंधित चुनावी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाता है। इसके साथ परिसीमन के बाद नए मतदान केंद्रों का पुनर्गठन भी किया जा रहा है।
मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया
नगर निगम चुनाव के लिए केवल मतदान की तारीख तय करना पर्याप्त नहीं होता। चुनावी प्रक्रिया के पहले मतदाता सूची को अद्यतन करना, नए नामों को शामिल करना, आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया पूरी करना तथा अंतिम सूची प्रकाशित करना जरूरी होता है। इसके बाद मतदाताओं को उनके निर्धारित मतदान केंद्रों से जोड़ने की व्यवस्था भी करनी होती है।
कोलकाता में परिसीमन के बाद मतदान केंद्रों के पुनर्गठन का काम भी चल रहा है। ऐसे में प्रशासन को नई सूची और नए मतदान केंद्रों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। यही वजह है कि दिसंबर में चुनाव कराने की संभावना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यावहारिक कठिनाइयों की चर्चा हो रही है।

जनगणना की तैयारियां भी बढ़ा सकती हैं दबाव
चुनावी कार्यक्रम के सामने दूसरी बड़ी चुनौती जनगणना से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियां हैं। इस काम में सरकारी कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती की संभावना बताई गई है। यदि जनगणना और चुनावी प्रक्रिया एक ही अवधि में चलती है, तो कर्मचारियों की उपलब्धता और जिम्मेदारियों का समन्वय प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
इस बीच वर्ष 2027 की माध्यमिक परीक्षा की प्रस्तावित समयसारिणी भी चुनावी कार्यक्रम को प्रभावित करने वाला एक अन्य पहलू बन सकती है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार दसवीं की बोर्ड परीक्षा मार्च की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। यदि नगर निगम चुनाव फरवरी में होते हैं, तो परीक्षा और चुनावी गतिविधियों के बीच प्रशासनिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
तीन मुद्दे तय करेंगे चुनाव की संभावित तारीख
फिलहाल कोलकाता नगर निगम चुनाव के कार्यक्रम को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख पहलू सामने हैं। पहला, 16 जनवरी को संशोधित मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन। दूसरा, 2027 की माध्यमिक परीक्षा की अंतिम समयसारिणी। तीसरा, जनगणना के दौरान सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की संभावित तैनाती। इन तीनों के बीच तालमेल चुनाव की तारीख तय करने में अहम हो सकता है।
मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कितना समय लगेगा, यह भी महत्वपूर्ण होगा। मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और अन्य प्रशासनिक तैयारियों के साथ सुरक्षा, मतदानकर्मियों की उपलब्धता और चुनाव संबंधी व्यवस्थाओं को भी अंतिम रूप देना होगा।

अभी आधिकारिक तौर पर तारीख टालने की घोषणा नहीं
हालांकि, कोलकाता नगर निगम चुनाव को दिसंबर से आगे बढ़ाने या जनवरी-अंत अथवा फरवरी 2027 में कराने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल चुनाव टलने की बात को संभावित स्थिति के तौर पर ही देखा जा रहा है। निर्वाचन आयोग और प्रशासन की ओर से आगे जारी होने वाले कार्यक्रम से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा इसलिए बढ़ी है क्योंकि मतदाता सूची, मतदान केंद्रों के पुनर्गठन, जनगणना और माध्यमिक परीक्षा जैसे कई कार्यक्रम एक-दूसरे के आसपास पड़ रहे हैं। यदि सभी प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता रहती है, तो मतदान की तारीख आगे बढ़ाना एक विकल्प बन सकता है।
ऐसे में जनवरी के अंत या फरवरी 2027 तक कोलकाता नगर निगम चुनाव खिंचने की संभावना पर नजर बनी हुई है। फिलहाल अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग की चुनावी तैयारी, प्रशासनिक संसाधनों की उपलब्धता और संबंधित कार्यक्रमों के समन्वय पर निर्भर करेगा।
