विशेष लेख | 7 नवंबर | इतिहास के पन्नों से | अंतरिक्ष विज्ञान
7 नवंबर 1998 को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और सीनेटर जॉन हर्शेल ग्लेन जूनियर (John Herschel Glenn Jr.) अंतरिक्ष से सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पेस शटल डिस्कवरी के STS-95 मिशन में हिस्सा लेकर अंतरिक्ष यात्रा करने वाले उस समय के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि ग्लेन इससे पहले 1962 में पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री बने थे। लगभग 36 वर्ष बाद उनकी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ने विज्ञान, उम्र बढ़ने और मानव शरीर पर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के प्रभावों को समझने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान किया।
7 नवंबर 1998: डिस्कवरी की ऐतिहासिक वापसी
नासा का STS-95 मिशन 29 अक्टूबर 1998 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए प्रक्षेपित हुआ था। जॉन ग्लेन इस उड़ान में पेलोड स्पेशलिस्ट के रूप में शामिल थे। नौ दिन के करीब चले इस अभियान के बाद 7 नवंबर 1998 को दोपहर 12 बजकर 4 मिनट (अमेरिकी पूर्वी मानक समय) पर डिस्कवरी केनेडी स्पेस सेंटर के रनवे 33 पर उतरा। शटल ने पृथ्वी की 134 परिक्रमाएं पूरी की थीं।
ग्लेन उस समय 77 वर्ष के थे। उनकी सुरक्षित वापसी ने अंतरिक्ष उड़ान में उम्र की सीमाओं को लेकर नई चर्चा शुरू की। नासा के इतिहास अभिलेखों के अनुसार, वे अंतरिक्ष में जाने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बने और यह रिकॉर्ड लंबे समय तक कायम रहा। इस मिशन का महत्व केवल ग्लेन की उम्र से जुड़ा नहीं था; इसमें जीवन विज्ञान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, सूर्य के अध्ययन और अंतरिक्ष यान प्रणालियों से जुड़े 80 से अधिक प्रयोग भी किए गए।

जॉन ग्लेन: युद्ध के पायलट से अंतरिक्ष के अग्रदूत तक
जॉन ग्लेन का जन्म 18 जुलाई 1921 को कैम्ब्रिज, ओहायो में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अमेरिकी मरीन कॉर्प्स में पायलट के रूप में सेवा की और बाद में कोरियाई युद्ध में भी लड़ाकू विमान उड़ाए। युद्ध के बाद वे परीक्षण पायलट बने। तेज गति वाले विमानों और जोखिमपूर्ण उड़ानों के अनुभव ने उन्हें अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल होने की पृष्ठभूमि दी।
1959 में नासा ने अपने पहले सात अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया, जिन्हें “Mercury Seven” कहा गया। जॉन ग्लेन इस ऐतिहासिक समूह के सदस्य थे। अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दौर में अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कठोर शारीरिक, मानसिक और तकनीकी परीक्षणों के बाद किया गया था। ग्लेन की उड़ान क्षमता, अनुशासन और सार्वजनिक संवाद कौशल ने उन्हें जल्द ही राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
1962 की Friendship 7 उड़ान: पहले अमेरिकी के रूप में पृथ्वी की परिक्रमा
20 फरवरी 1962 को जॉन ग्लेन ने Mercury-Atlas 6 मिशन के तहत Friendship 7 अंतरिक्ष यान में पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरी। वे पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले पहले अमेरिकी बने। उनसे पहले सोवियत अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन 1961 में अंतरिक्ष में पहुंचकर पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगा चुके थे। इसलिए ग्लेन की उड़ान शीत युद्ध के दौर की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में अमेरिका के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।
Friendship 7 ने पृथ्वी की तीन परिक्रमाएं कीं और लगभग पांच घंटे की उड़ान के बाद अटलांटिक महासागर में उतरा। इस मिशन ने यह प्रदर्शित किया कि अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकते हैं और वहां से लौट सकते हैं। ग्लेन देशभर में लोकप्रिय नायक बन गए, लेकिन उन्होंने इसके बाद लंबे समय तक अंतरिक्ष उड़ान नहीं भरी।

अंतरिक्ष से राजनीति तक का सफर
1964 में ग्लेन ने राजनीति में प्रवेश की कोशिश की, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण चुनाव अभियान से हट गए। बाद में वे ओहायो से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर चुने गए। उन्होंने 1974 से 1999 तक अमेरिकी सीनेट में सेवा की और चार बार निर्वाचित हुए। सीनेट में उन्होंने ऊर्जा, विज्ञान, राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकारी जवाबदेही और परमाणु प्रसार रोकने जैसे विषयों पर काम किया।
राजनीतिक जीवन के दौरान भी अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी अनुसंधान में उनकी रुचि बनी रही। उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर उनका ध्यान विशेष था। उन्होंने यह विचार रखा कि अंतरिक्ष में शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन पृथ्वी पर बुजुर्ग लोगों के स्वास्थ्य को समझने में उपयोगी हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में 1998 के STS-95 मिशन में उनकी भागीदारी को वैज्ञानिक महत्व मिला।
STS-95 मिशन: उम्र बढ़ने और अंतरिक्ष के प्रभावों का अध्ययन
STS-95 में सात सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल शामिल था। कमांडर कर्टिस एल. ब्राउन, पायलट स्टीवन डब्ल्यू. लिंडसे, मिशन विशेषज्ञ स्टीफन रॉबिन्सन, स्कॉट पाराज़िन्स्की और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के पेड्रो ड्यूक के साथ जापान की अंतरिक्ष यात्री चियाकी मुकाई और जॉन ग्लेन इस दल का हिस्सा थे। यह अभियान कई देशों और संस्थानों के वैज्ञानिक सहयोग का उदाहरण भी था।
ग्लेन ने इस मिशन में ऐसे प्रयोगों में भाग लिया जिनका उद्देश्य यह समझना था कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में रहने से मानव शरीर में क्या बदलाव आते हैं और उनका संबंध पृथ्वी पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाले परिवर्तनों से किस तरह जोड़ा जा सकता है। शोध में संतुलन और शरीर की स्थिति पहचानने की क्षमता, नींद, रक्त प्रवाह, चयापचय, प्रतिरक्षा प्रणाली, हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया गया।

अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण मांसपेशियों और हड्डियों पर भार कम पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर मांसपेशियों की क्षमता और हड्डियों का घनत्व घट सकता है। शरीर में तरल पदार्थों का वितरण भी बदलता है। उम्र बढ़ने के साथ पृथ्वी पर भी कुछ शारीरिक प्रणालियों में बदलाव आते हैं। वैज्ञानिक यह जांचना चाहते थे कि दोनों स्थितियों में कौन-सी समानताएं हैं और किन प्रक्रियाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।
ग्लेन की भागीदारी से शोधकर्ताओं को एक ऐसे व्यक्ति के शरीर की प्रतिक्रिया का अध्ययन करने का अवसर मिला जो 77 वर्ष का था और अंतरिक्ष यात्रा के लिए व्यापक चिकित्सकीय परीक्षणों से गुजर चुका था। यह प्रयोग उम्रदराज लोगों के लिए अंतरिक्ष यात्रा को सुरक्षित घोषित करने का प्रमाण नहीं था; बल्कि यह सीमित, नियंत्रित वैज्ञानिक अध्ययन था, जिसके परिणामों को चिकित्सा और अंतरिक्ष जीवन विज्ञान के संदर्भ में परखा गया।
STS-95 के अन्य वैज्ञानिक उद्देश्य
ग्लेन की उड़ान मीडिया का मुख्य आकर्षण रही, लेकिन STS-95 एक बहुआयामी वैज्ञानिक मिशन था। इसके प्रमुख उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल थे:
- Spartan उपग्रह: सूर्य और सौर पवन का अध्ययन करने के लिए Spartan-201 फ्री-फ्लाइंग उपग्रह को तैनात किया गया और बाद में वापस प्राप्त किया गया। सौर पवन और सूर्य की गतिविधियों को समझना पृथ्वी के संचार और बिजली प्रणालियों पर अंतरिक्ष मौसम के प्रभावों के अध्ययन में उपयोगी है।
- Hubble Space Telescope परीक्षण: हबल स्पेस टेलीस्कोप की भावी सर्विसिंग से जुड़ी प्रणालियों और उपकरणों के परीक्षण के लिए Hubble Space Telescope Orbital Systems Test (HOST) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया।
- SPACEHAB प्रयोगशाला: शटल के पेलोड बे में लगे SPACEHAB मॉड्यूल में जीवन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान से जुड़े अनेक प्रयोग किए गए।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: जापान, यूरोप और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, जैविक प्रक्रियाओं और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रयोगों में भाग लिया।
इस तरह STS-95 ने मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभावों के अध्ययन के साथ-साथ खगोलभौतिकी, उपग्रह तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी प्रणालियों पर भी काम किया।

रिकॉर्ड से आगे: उम्र, विज्ञान और मानवीय जिज्ञासा
जॉन ग्लेन की 1998 की उड़ान ने यह संदेश दिया कि वैज्ञानिक जिज्ञासा और खोज की इच्छा उम्र के साथ समाप्त नहीं होती। फिर भी इस उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत साहस की कहानी मानना पर्याप्त नहीं होगा। अंतरिक्ष यात्रा के लिए ग्लेन की फिटनेस का कठोर मूल्यांकन हुआ था और मिशन में उनकी भूमिका विशेष रूप से वैज्ञानिक प्रयोगों से जुड़ी थी। अंतरिक्ष में उम्रदराज व्यक्ति को भेजने का निर्णय चिकित्सा परीक्षण, जोखिम मूल्यांकन और अनुसंधान की स्पष्ट योजना के आधार पर लिया गया था।
ग्लेन की वापसी ने यह भी दिखाया कि अंतरिक्ष अनुसंधान का लाभ पृथ्वी पर जीवन को समझने में मिल सकता है। सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में हड्डियों, मांसपेशियों, नींद और रक्त प्रवाह में होने वाले बदलावों का अध्ययन अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उम्र बढ़ने और गतिशीलता से जुड़े कुछ चिकित्सकीय सवालों पर भी प्रकाश डाल सकता है।
जॉन ग्लेन की विरासत
जॉन ग्लेन ने 1999 में अमेरिकी सीनेट से विदाई ली। उन्हें अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दौर के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है। 1962 की Friendship 7 उड़ान ने उन्हें अंतरिक्ष इतिहास में स्थान दिया, जबकि 1998 की STS-95 उड़ान ने उन्हें एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया। 8 दिसंबर 2016 को 95 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
उनके नाम पर ओहायो में नासा के जॉन एच. ग्लेन रिसर्च सेंटर का नाम रखा गया। यह सम्मान विज्ञान, विमानन, अंतरिक्ष अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान की याद दिलाता है। उनकी जीवन-यात्रा सैन्य विमानन, अंतरिक्ष अन्वेषण, लोकतांत्रिक राजनीति और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक दुर्लभ सेतु प्रस्तुत करती है।

निष्कर्ष
7 नवंबर 1998 को 77 वर्षीय जॉन ग्लेन का डिस्कवरी के साथ सुरक्षित पृथ्वी पर लौटना अंतरिक्ष इतिहास की यादगार घटनाओं में शामिल है। वे STS-95 मिशन में शामिल होकर अंतरिक्ष में जाने वाले उस समय के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बने। उनकी उड़ान ने 1962 की ऐतिहासिक Friendship 7 यात्रा के 36 वर्ष बाद उन्हें फिर से कक्षा में पहुंचाया और उम्र बढ़ने तथा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण पर वैज्ञानिक शोध को एक अनूठा अवसर दिया। जॉन ग्लेन की कहानी केवल रिकॉर्ड बनाने की नहीं, बल्कि जीवनभर सीखने, सेवा करने और मानव ज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने की कहानी है।
